23 जुलाई 2026
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मनीषा कोइराला ने बताया कैसे 'लेटर्स टू अ यंग पोएट' ने बदला उनका नजरिया

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मनीषा कोइराला ने बताया कैसे 'लेटर्स टू अ यंग पोएट' ने बदला उनका नजरिया

सारांश

मनीषा कोइराला ने बताया कि रिल्के की 'लेटर्स टू अ यंग पोएट' उनके बिस्तर के पास एक महीने रखी रही — और जब पढ़ी, तो भीतर तक हिला गई। आत्म-खोज, एकांत और जीवन पर भरोसे की तीन सीखें जो एक कलाकार को नई दृष्टि दे गईं।

मुख्य बातें

अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने 23 जुलाई को इंस्टाग्राम पर 'लेटर्स टू अ यंग पोएट' पढ़ने का अनुभव साझा किया।
किताब एक दोस्त ने करीब एक महीने पहले उपहार में दी थी, जो बिस्तर के पास रखी रहने के बाद पढ़ी गई।
रिल्के की किताब से मिली तीन सीखें: आत्म-अवलोकन , एकांत को स्वीकारना और जीवन पर भरोसा रखना ।
मनीषा ने कहा कि कठिन समय में किताबें उनके लिए भावनात्मक सहारा रही हैं।
किताब खत्म होने के बाद उन्हें गहरी मानसिक शांति का अनुभव हुआ।

अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने गुरुवार, 23 जुलाई को इंस्टाग्राम पर तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि जर्मन कवि राइनर मारिया रिल्के की क्लासिक कृति 'लेटर्स टू अ यंग पोएट' ने उनके भीतर एक गहरा बदलाव लाया। एक दोस्त के उपहार में दी इस किताब ने उन्हें जीवन, कला और आत्म-खोज के बारे में नए सिरे से सोचने पर मजबूर किया।

किताब तक पहुँचने का सफर

मनीषा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि एक दोस्त ने उन्हें करीब एक महीने पहले यह किताब उपहार में दी थी। उन्होंने इसे बिस्तर के पास रख दिया, यह सोचकर कि 'जब समय मिलेगा, पढ़ूंगी।' जब आखिरकार उन्होंने इसे पढ़ा, तो उनके मन में एक सवाल उठा — 'क्या कुछ किताबों का अपना एक सही समय होता है?' उनके शब्दों में, ये किताबें हमारी ज़िंदगी में तब आती हैं जब हम तैयार नहीं होते, और चुपचाप उस पल का इंतज़ार करती हैं जब हमें उनकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है।

कलाकार के रूप में किताबों का सहारा

अभिनेत्री ने बताया कि जीवन के कठिन दौर में किताबें उनके लिए एक भरोसेमंद साथी रही हैं। उन्होंने लिखा कि एक कलाकार के रूप में जब जटिल भावनाओं को शब्दों में ढालना मुश्किल हो जाता है, तब किताबें उन्हें उन्हीं भावनाओं को समझने में मदद करती हैं — जिनके लिए उनके पास सही शब्द नहीं थे। यह स्वीकारोक्ति उनकी संवेदनशीलता और कला के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

रिल्के की तीन अमूल्य सीखें

मनीषा ने 'लेटर्स टू अ यंग पोएट' से मिली तीन अहम सीखें साझा कीं। पहली — खुद के भीतर झाँकना, क्योंकि सबसे गहरे जवाब बाहर नहीं, अपने अंदर मिलते हैं। दूसरी — अकेलेपन को स्वीकार करना, क्योंकि इसी शांत एकांत में कलाकार और आत्मा दोनों का विकास होता है। तीसरी — जीवन पर भरोसा रखना और अपने सवालों के साथ जीना सीखना, क्योंकि समय के साथ जवाब खुद सामने आ जाते हैं।

किताब बंद होने के बाद का एहसास

मनीषा ने बताया कि किताब खत्म करने के बाद उन्हें एक अजीब सी शांति महसूस हुई — जैसे मन हल्का हो गया हो और किसी ने उन्हें अंदर तक समझ लिया हो। उन्होंने अपने पाठकों से भी पूछा कि क्या उन्होंने कभी ऐसी किताब पढ़ी है जो ज़िंदगी में बिल्कुल सही वक्त पर आई हो। उनका यह सवाल किताबों और इंसान के रिश्ते की उस गहराई को छूता है जो शब्दों से परे है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'लेटर्स टू अ यंग पोएट' किताब क्या है?
'लेटर्स टू अ यंग पोएट' जर्मन कवि राइनर मारिया रिल्के द्वारा लिखे गए पत्रों का संग्रह है, जिसमें उन्होंने एक युवा कवि को कला, जीवन, एकांत और आत्म-खोज पर मार्गदर्शन दिया है। यह पुस्तक विश्व साहित्य में रचनात्मकता और आंतरिक जीवन पर एक क्लासिक कृति मानी जाती है।
मनीषा कोइराला ने इस किताब से क्या सीखा?
मनीषा ने तीन प्रमुख सीखें बताईं — खुद के भीतर झाँकना, एकांत को स्वीकार करना, और जीवन पर भरोसा रखते हुए अपने सवालों के साथ जीना सीखना। उनके अनुसार ये तीनों बातें एक कलाकार के विकास के लिए ज़रूरी हैं।
मनीषा कोइराला ने यह पोस्ट कब और कहाँ शेयर की?
अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने 23 जुलाई, गुरुवार को इंस्टाग्राम पर तस्वीरों के साथ यह अनुभव साझा किया। पोस्ट में उन्होंने किताब पढ़ने के बाद महसूस की गई मानसिक शांति का विस्तार से वर्णन किया।
क्या मनीषा कोइराला अक्सर किताबों के बारे में बात करती हैं?
मनीषा कोइराला ने इस पोस्ट में बताया कि जीवन के कठिन समय में किताबें हमेशा उनका सहारा रही हैं। एक कलाकार के रूप में जब भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल हो जाता है, तब किताबें उन्हें उन भावनाओं को समझने में मदद करती हैं।
इस किताब को पढ़ने की प्रेरणा मनीषा को कैसे मिली?
एक करीबी दोस्त ने यह किताब मनीषा को करीब एक महीने पहले उपहार में दी थी। उन्होंने इसे बिस्तर के पास रख दिया था और जब समय मिला तो पढ़ा — जिसके बाद उन्होंने महसूस किया कि शायद कुछ किताबें सही समय का इंतज़ार करती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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