दांबुला गुफा मंदिर को भारत ने सौंपे आईटी उपकरण, पिरिवेना में बौद्ध शिक्षा होगी तकनीक से समृद्ध
सारांश
मुख्य बातें
श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने 5 जून 2025 को दांबुला के ऐतिहासिक गुफा मंदिर परिसर में स्थित वेलागम्बा महापिरिवेना को आईटी उपकरण और संबंधित सामग्री सौंपी। इस सहयोग का उद्देश्य पिरिवेना में पारंपरिक बौद्ध शिक्षा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से और अधिक प्रभावशाली बनाना है।
मुख्य घटनाक्रम
उच्चायुक्त संतोष झा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस अवसर की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि वेलागम्बा महापिरिवेना को सौंपे गए उपकरण पिरिवेना में आधुनिक तरीकों और तकनीक का उपयोग करके पारंपरिक बौद्ध शिक्षा प्रदान करने में सहायक होंगे। उन्होंने कहा, 'बौद्ध विरासत और मूल्यों को बढ़ावा देने का हमारा साझा वादा हमारे चिरस्थायी संबंध और सभ्यतागत साझेदारी का सबसे सशक्त प्रमाण है।'
यह कदम भारत-श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक और शैक्षिक सहयोग की उस दीर्घकालिक परंपरा का हिस्सा है, जो बौद्ध धर्म की साझी विरासत पर आधारित है। दांबुला का गुफा मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और श्रीलंका के सर्वाधिक पूजनीय बौद्ध स्थलों में गिना जाता है।
जाफना में मछुआरा समुदाय को सहायता
बुधवार, 4 जून को उच्चायुक्त ने जाफना के केट्स डिवीजन में मछुआरा समुदाय को भारतीय सहायता प्रदान की। उन्होंने समुदाय को मत्स्य पालन क्षेत्र में भारत की प्रमुख पहलों से अवगत कराया, जिनमें पॉइंट पेड्रो हार्बर का विकास, कराईनगर बोटयार्ड, उत्तरी प्रांत में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, मछुआरों के लिए प्रशिक्षण के अवसर और मत्स्य पालन अधिकारियों को मोटरबाइक की आपूर्ति शामिल हैं।
उन्होंने कहा, 'पाल्क स्ट्रेट के साझा जल में हमारे मछुआरा समुदायों के लिए एक बेहतर भविष्य का निर्माण।' यह टिप्पणी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पाल्क स्ट्रेट में मछली पकड़ने के अधिकारों को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव का इतिहास रहा है।
फेरी सेवा और बंदरगाह विकास
उच्चायुक्त संतोष झा ने नागापट्टिनम (भारत) और कांकेसंथुराई — केकेएस (श्रीलंका) के बीच चलने वाली यात्री फेरी सेवा का भी निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि इस फेरी की परिचालन निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए भारत प्रतिवर्ष एलकेआर 300 मिलियन से अधिक की व्यवहार्यता अंतराल अनुदान (Viability Gap Funding) प्रदान कर रहा है।
इसके अलावा, केकेएस आधुनिकीकरण परियोजना के तहत बंदरगाह उन्नयन और क्षेत्रीय व्यापार एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भारत ने 6.15 करोड़ अमेरिकी डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है।
नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ जल पहल
उच्चायुक्त ने डेल्फ्ट आइलैंड पर हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली स्थल का भी दौरा किया। यह परियोजना जाफना के निकट तीन द्वीपों — डेल्फ्ट, अनलाईतिवु और नैनातिवु — में कार्यान्वित की जा रही है और सौर, पवन तथा बैटरी भंडारण को डीजल बैकअप के साथ एकीकृत करते हुए 4.3 मेगावाट विश्वसनीय क्षमता प्रदान करती है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत की लोगों-केंद्रित पहलें उत्तरी प्रांत के प्रमुख मंदिरों — नागुलेश्वरम, सेल्वा सानिधि और थिरुकीथेश्वरम — में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने तक भी विस्तारित हैं।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह दौरा भारत-श्रीलंका संबंधों के उस व्यापक ढाँचे का हिस्सा है जो सांस्कृतिक, आर्थिक और मानवीय सहयोग के कई स्तरों पर एक साथ आगे बढ़ रहा है। बौद्ध शिक्षा से लेकर मत्स्य पालन, नवीकरणीय ऊर्जा और समुद्री कनेक्टिविटी तक — भारत की यह बहु-आयामी कूटनीति श्रीलंका के उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर अपनी उपस्थिति मजबूत करने की रणनीति को दर्शाती है।