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दांबुला गुफा मंदिर को भारत ने सौंपे आईटी उपकरण, पिरिवेना में आधुनिक बौद्ध शिक्षा को मिलेगा बल

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दांबुला गुफा मंदिर को भारत ने सौंपे आईटी उपकरण, पिरिवेना में आधुनिक बौद्ध शिक्षा को मिलेगा बल

सारांश

भारत ने श्रीलंका में एक साथ कई मोर्चों पर सहयोग का विस्तार किया — दांबुला के प्राचीन गुफा मंदिर को आईटी उपकरण, जाफना के मछुआरों को सहायता, फेरी सेवा को अनुदान और द्वीपों पर 4.3 मेगावाट की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना। यह 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति की ज़मीनी तस्वीर है।

मुख्य बातें

उच्चायुक्त संतोष झा ने दांबुला गुफा मंदिर के वेलागम्बा महापिरिवेना को आईटी उपकरण सौंपे, पारंपरिक बौद्ध शिक्षा को तकनीक से जोड़ने के लिए।
जाफना के केट्स डिवीजन में मछुआरा समुदाय को भारतीय सहायता दी गई; पॉइंट पेड्रो हार्बर विकास और कराईनगर बोटयार्ड जैसी पहलों की जानकारी साझा की गई।
नागापट्टिनम-केकेएस फेरी सेवा के लिए भारत प्रतिवर्ष LKR 300 मिलियन से अधिक की व्यवहार्यता अनुदान दे रहा है।
केकेएस आधुनिकीकरण परियोजना के लिए भारत ने 6.15 करोड़ अमेरिकी डॉलर की प्रतिबद्धता जताई है।
डेल्फ्ट, अनलाईतिवु और नैनातिवु द्वीपों पर 4.3 मेगावाट की हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना क्रियान्वित की जा रही है।

भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने 5 जून 2025 को श्रीलंका के विश्वप्रसिद्ध दांबुला गुफा मंदिर स्थित वेलागम्बा महापिरिवेना को आईटी उपकरण एवं संबंधित सामग्री सौंपी। इस सहयोग का उद्देश्य पिरिवेना में आधुनिक तकनीक के माध्यम से पारंपरिक बौद्ध शिक्षा को सशक्त बनाना है। यह कदम भारत-श्रीलंका के बीच गहरी सभ्यतागत साझेदारी का ताज़ा उदाहरण है।

मुख्य घटनाक्रम

उच्चायुक्त संतोष झा ने एक्स पर लिखा, 'श्रीलंका के मशहूर और पुराने गुफा मंदिर, दांबुला में वेलागम्बा महापिरिवेना को आईटी उपकरण और उससे जुड़े सामान सौंपे। इससे पिरिवेना में आधुनिक तरीकों और उपकरण का इस्तेमाल करके पारंपरिक बौद्ध शिक्षा दी जा सकेगी।' उन्होंने यह भी कहा, 'बौद्ध विरासत और मूल्यों को बढ़ावा देने का हमारा साझा वादा हमारे स्थायी संबंध और सभ्यता की साझेदारी का सबसे मजबूत प्रमाण है।'

जाफना मछुआरा समुदाय को भी मिली मदद

इससे एक दिन पहले, बुधवार को उच्चायुक्त ने जाफना के केट्स डिवीजन में मछुआरा समुदाय को भारतीय सहायता प्रदान की। उन्होंने समुदाय को मत्स्य पालन क्षेत्र में भारत की चल रही पहलों से अवगत कराया — जिनमें पॉइंट पेड्रो हार्बर का विकास, कराईनगर बोटयार्ड, उत्तरी प्रांत में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, मछुआरों के लिए प्रशिक्षण अवसर और मत्स्य अधिकारियों को मोटरबाइक की आपूर्ति शामिल हैं। झा ने कहा, 'पाल्क स्ट्रेट के साझा जल में हमारे मछुआरा समुदायों के लिए एक बेहतर भविष्य बनाना।'

नागापट्टिनम-केकेएस फेरी सेवा और बंदरगाह आधुनिकीकरण

उच्चायुक्त ने भारत के नागापट्टिनम और श्रीलंका के कांकेसंथुराई (केकेएस) के बीच चलने वाली पैसेंजर फेरी सेवा का भी दौरा किया। उन्होंने बताया कि भारत इस फेरी के परिचालन को टिकाऊ बनाए रखने के लिए प्रतिवर्ष LKR 300 मिलियन से अधिक की व्यवहार्यता अंतराल अनुदान (Viability Gap Funding) दे रहा है। इसके साथ ही, केकेएस आधुनिकीकरण परियोजना के लिए भारत ने बंदरगाह उन्नयन और क्षेत्रीय व्यापार एवं पर्यटन को प्रोत्साहित करने हेतु 6.15 करोड़ अमेरिकी डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है।

नवीकरणीय ऊर्जा और पेयजल परियोजनाएँ

उच्चायुक्त ने डेल्फ्ट आइलैंड पर हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली स्थल का भी निरीक्षण किया। जाफना के निकट अनलाईतिवु और नैनातिवु सहित तीन द्वीपों में क्रियान्वित यह परियोजना सौर, पवन और बैटरी भंडारण को डीजल बैकअप के साथ एकीकृत करके 4.3 मेगावाट की विश्वसनीय क्षमता प्रदान करती है। इसके अलावा, उत्तरी प्रांत के प्रमुख मंदिरों — नागुलेश्वरम, सेल्वा सानिधि और थिरुकीथेश्वरम — में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के प्रयास भी इसी व्यापक पहल का हिस्सा हैं।

भारत-श्रीलंका संबंधों का व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत श्रीलंका में लोगों पर केंद्रित परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रहा है। गौरतलब है कि श्रीलंका के आर्थिक संकट के बाद से भारत ने वहाँ बुनियादी ढाँचे, ऊर्जा और सामाजिक क्षेत्रों में निवेश उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। उच्चायुक्त झा ने कहा, 'भारत लोगों पर केंद्रित पहलों के लिए प्रतिबद्ध है, जो सीधे श्रीलंका में स्थानीय समुदायों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करती हैं।' आने वाले समय में केकेएस बंदरगाह आधुनिकीकरण और द्वीपीय ऊर्जा परियोजनाओं के पूर्ण होने से उत्तरी श्रीलंका में भारत की साझेदारी और गहरी होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समुदाय-स्तरीय उपस्थिति दर्ज कराना चाहता है। हालाँकि, पाल्क स्ट्रेट में मछुआरों के बीच तनाव की पुरानी समस्या अभी भी अनसुलझी है, जो इस 'साझा भविष्य' की कथा को जटिल बनाती है। केकेएस बंदरगाह में 6.15 करोड़ डॉलर का निवेश उत्तरी श्रीलंका में भारत की दीर्घकालिक आर्थिक पैठ का संकेत है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ स्थानीय समुदायों तक कितनी तेज़ी से पहुँचता है, यही असली कसौटी होगी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दांबुला गुफा मंदिर को भारत ने क्या सौंपा?
भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने दांबुला स्थित वेलागम्बा महापिरिवेना को आईटी उपकरण और संबंधित सामग्री सौंपी। इससे पिरिवेना में आधुनिक तकनीक के माध्यम से पारंपरिक बौद्ध शिक्षा दी जा सकेगी।
भारत श्रीलंका की फेरी सेवा के लिए कितनी सहायता दे रहा है?
भारत नागापट्टिनम और कांकेसंथुराई (केकेएस) के बीच चलने वाली पैसेंजर फेरी सेवा के परिचालन के लिए प्रतिवर्ष LKR 300 मिलियन से अधिक की व्यवहार्यता अंतराल अनुदान दे रहा है। इसके अलावा केकेएस बंदरगाह आधुनिकीकरण के लिए 6.15 करोड़ अमेरिकी डॉलर की प्रतिबद्धता भी जताई गई है।
जाफना के मछुआरों को भारत ने क्या सहायता दी?
उच्चायुक्त ने जाफना के केट्स डिवीजन में मछुआरा समुदाय को भारतीय सहायता प्रदान की और उन्हें पॉइंट पेड्रो हार्बर विकास, कराईनगर बोटयार्ड, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, प्रशिक्षण अवसरों और मोटरबाइक आपूर्ति जैसी पहलों की जानकारी दी।
श्रीलंका के द्वीपों पर भारत की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना क्या है?
जाफना के निकट डेल्फ्ट, अनलाईतिवु और नैनातिवु द्वीपों पर भारत की हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना क्रियान्वित की जा रही है। यह परियोजना सौर, पवन और बैटरी भंडारण को डीजल बैकअप के साथ एकीकृत कर 4.3 मेगावाट की विश्वसनीय बिजली क्षमता प्रदान करती है।
भारत-श्रीलंका के बीच यह सहयोग क्यों महत्वपूर्ण है?
यह सहयोग भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति का व्यावहारिक क्रियान्वयन है, जो श्रीलंका में शिक्षा, आजीविका, ऊर्जा और बुनियादी ढाँचे — सभी स्तरों पर एक साथ काम करती है। श्रीलंका के हालिया आर्थिक संकट के बाद यह साझेदारी दोनों देशों के ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों को मज़बूत करने की दिशा में एक ठोस कदम है।
राष्ट्र प्रेस
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