26 जुलाई 2026
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पिच्चा मल पूजावा समारोह में भारत के उप उच्चायुक्त ने अनुराधापुरा में जय श्री महा बोधि वृक्ष पर अर्पित किए पुष्प

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पिच्चा मल पूजावा समारोह में भारत के उप उच्चायुक्त ने अनुराधापुरा में जय श्री महा बोधि वृक्ष पर अर्पित किए पुष्प

सारांश

पिच्चा मल पूजावा के अवसर पर भारत की उप उच्चायुक्त मैत्रेयी के ने अनुराधापुरा में जय श्री महा बोधि वृक्ष पर पुष्प अर्पित किए और अटमस्थानाधिपति से मिलकर पवित्र नगरी परिसर के विकास में भारत की सहायता पर चर्चा की — यह भारत-श्रीलंका की सदियों पुरानी बौद्ध विरासत कूटनीति का ताज़ा अध्याय है।

मुख्य बातें

भारत की उप उच्चायुक्त मैत्रेयी के ने 26 जुलाई 2026 को पिच्चा मल पूजावा समारोह में अनुराधापुरा स्थित जय श्री महा बोधि वृक्ष पर पुष्प अर्पित किए।
पिच्चा मल पूजावा एक वार्षिक बौद्ध उत्सव है जिसमें हज़ारों श्रद्धालु चमेली के सफेद फूल भगवान बुद्ध को अर्पित करते हैं।
उप उच्चायुक्त ने वेन.
ईथलावेतुनुवेवे ज्ञानतिलक थेरो (अटमस्थानाधिपति) से मुलाकात कर अनुराधापुरा पवित्र नगरी परिसर के विकास हेतु भारत सरकार की सहायता पर चर्चा की।
महा बोधि वृक्ष उस बोधि पौधे की कलम से विकसित है जिसे तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में संघमित्रा महा थेरी भारत से श्रीलंका लाई थीं।
अनुराधापुरा एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और विश्व के प्राचीनतम बसे नगरों में से एक है।

भारत की उप उच्चायुक्त मैत्रेयी के ने 26 जुलाई 2026 को श्रीलंका के अनुराधापुरा स्थित पवित्र जय श्री महा बोधि वृक्ष पर पुष्प अर्पित किए। यह अवसर था वार्षिक बौद्ध पुष्प अर्पण उत्सव 'पिच्चा मल पूजावा' का, जो भारत और श्रीलंका के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का जीवंत प्रतीक है।

पिच्चा मल पूजावा: समारोह का महत्व

पिच्चा मल पूजावा श्रीलंका के अनुराधापुरा में आयोजित होने वाला एक प्रतिष्ठित वार्षिक बौद्ध धार्मिक उत्सव है। इस अवसर पर हज़ारों श्रद्धालु भगवान बुद्ध को चमेली (पिच्चा) के सफेद फूलों की मालाएं और पुष्पगुच्छ अर्पित करते हैं। पूरा आयोजन श्री महा बोधि और रुवानवेलि महा सेया के प्रांगण में संपन्न होता है, जो अनुराधापुरा की पवित्र नगरी के हृदय में स्थित हैं।

भारतीय उच्चायोग की भागीदारी

भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस भागीदारी की जानकारी साझा करते हुए बताया कि जय श्री महा बोधि भारत और श्रीलंका के बीच साझा बौद्ध विरासत के सर्वाधिक अनूठे प्रतीकों में से एक है। उच्चायोग के अनुसार, यह स्थल दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को प्रतिबिंबित करता है।

इस यात्रा के दौरान उप उच्चायुक्त मैत्रेयी के ने वेन. ईथलावेतुनुवेवे ज्ञानतिलक थेरो से भी मुलाकात की, जो वर्तमान में अटमस्थानाधिपति के रूप में दायित्व निभा रहे हैं। इस बैठक में अनुराधापुरा पवित्र नगरी परिसर के विकास के लिए भारत सरकार द्वारा घोषित सहायता और आगे की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई।

महा बोधि वृक्ष की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

अनुराधापुरा विश्व के सबसे प्राचीन बसे हुए नगरों में से एक है और यह एक बौद्ध तीर्थ स्थल एवं यूनेस्को विश्व धरोहर संपत्ति है। यहाँ स्थित महा बोधि वृक्ष उस बोधि पौधे की कलम से विकसित हुआ है, जिसे तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में सम्राट अशोक की पुत्री संघमित्रा महा थेरी भारत से श्रीलंका लेकर आई थीं। मान्यता है कि मूल बोधि वृक्ष के नीचे ही 2,500 वर्ष से भी अधिक समय पहले भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया था।

गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक कूटनीति को नई गति मिल रही है। अनुराधापुरा परिसर के विकास में भारत की सहभागिता इस द्विपक्षीय संबंध के आध्यात्मिक आयाम को और मज़बूती प्रदान करती है।

भारत-श्रीलंका बौद्ध विरासत संबंध

भारत और श्रीलंका के बीच बौद्ध धर्म, संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं के माध्यम से गहरे संबंध सदियों से चले आ रहे हैं। जय श्री महा बोधि स्थल इस साझा आध्यात्मिक जुड़ाव का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। पिच्चा मल पूजावा जैसे समारोहों में भारतीय राजनयिकों की उपस्थिति इस संबंध को जन-से-जन के स्तर पर और प्रगाढ़ बनाती है।

आने वाले समय में अनुराधापुरा पवित्र नगरी परिसर के विकास कार्यों की प्रगति पर दोनों देशों की नज़र बनी रहेगी, जो इस ऐतिहासिक स्थल को और संरक्षित एवं विकसित करने की दिशा में एक ठोस कदम साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुविचारित संकेत है — ऐसे समय में जब भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति को सांस्कृतिक कूटनीति के ज़रिए मज़बूत कर रहा है। अनुराधापुरा परिसर के विकास में भारत की सहायता की घोषणा इस रणनीति का व्यावहारिक विस्तार है, जो धार्मिक साझेदारी को ठोस अवसंरचना सहयोग से जोड़ती है। हालाँकि, इस सहायता की राशि, समयसीमा और क्रियान्वयन तंत्र का अभी तक सार्वजनिक विवरण नहीं आया है — जो पारदर्शिता के लिहाज़ से एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पिच्चा मल पूजावा समारोह क्या है?
पिच्चा मल पूजावा श्रीलंका के अनुराधापुरा में आयोजित एक वार्षिक बौद्ध धार्मिक उत्सव है, जिसमें हज़ारों श्रद्धालु भगवान बुद्ध को चमेली (पिच्चा) के सफेद फूल अर्पित करते हैं। यह समारोह श्री महा बोधि और रुवानवेलि महा सेया के प्रांगण में आयोजित होता है।
जय श्री महा बोधि वृक्ष का भारत से क्या संबंध है?
जय श्री महा बोधि वृक्ष उस बोधि पौधे की कलम से विकसित हुआ है, जिसे तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में सम्राट अशोक की पुत्री संघमित्रा महा थेरी भारत से श्रीलंका लेकर आई थीं। मूल बोधि वृक्ष के नीचे ही भगवान बुद्ध ने 2,500 वर्ष से भी अधिक समय पहले ज्ञान प्राप्त किया था, इसलिए यह भारत-श्रीलंका की साझा बौद्ध विरासत का सबसे पवित्र प्रतीक माना जाता है।
भारत की उप उच्चायुक्त ने अनुराधापुरा में किससे मुलाकात की?
उप उच्चायुक्त मैत्रेयी के ने वेन. ईथलावेतुनुवेवे ज्ञानतिलक थेरो से मुलाकात की, जो वर्तमान में अटमस्थानाधिपति के रूप में दायित्व निभा रहे हैं। बैठक में अनुराधापुरा पवित्र नगरी परिसर के विकास के लिए भारत सरकार की घोषित सहायता और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा हुई।
अनुराधापुरा को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा क्यों मिला है?
अनुराधापुरा विश्व के सबसे प्राचीन बसे हुए नगरों में से एक है और यूनेस्को विश्व धरोहर संपत्ति है। यहाँ स्थित महा बोधि वृक्ष और अन्य बौद्ध स्मारक इसे वैश्विक बौद्ध तीर्थाटन का एक प्रमुख केंद्र बनाते हैं।
भारत-श्रीलंका बौद्ध विरासत सहयोग में क्या नया हुआ है?
पिच्चा मल पूजावा के अवसर पर भारत की उप उच्चायुक्त की उपस्थिति और अटमस्थानाधिपति के साथ बैठक में अनुराधापुरा पवित्र नगरी परिसर के विकास हेतु भारत सरकार की सहायता पर चर्चा हुई। यह भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत सांस्कृतिक और धार्मिक कूटनीति को मज़बूत करने की दिशा में एक ताज़ा कदम है।
राष्ट्र प्रेस
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