भारत ने श्रीलंका को सौंपे 250 मीट्रिक टन के बेली ब्रिज, ₹45 करोड़ डॉलर पुनर्निर्माण पैकेज का हिस्सा
सारांश
मुख्य बातें
भारत के श्रीलंका में उप उच्चायुक्त मैत्रेय कुलकर्णी ने 6 अगस्त 2026 को कोलंबो में श्रीलंका के सहकारी विकास उप मंत्री उपाली समरसिंघे को 250 मीट्रिक टन से अधिक वजन वाले बेली ब्रिजों की अगली खेप औपचारिक रूप से सौंपी। ये पुल भारत के 45 करोड़ अमेरिकी डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज का हिस्सा हैं और इन्हें भारतीय सेना के इंजीनियर श्रीलंका के विभिन्न हिस्सों में स्थापित करेंगे।
मुख्य घटनाक्रम
कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस हस्तांतरण की पुष्टि करते हुए कहा कि ये पुल श्रीलंका में संपर्क व्यवस्था बहाल करने और बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने में सहायक होंगे। भारतीय सेना के इंजीनियर दल इन पुलों की स्थापना की जिम्मेदारी संभालेंगे, जिससे दूरदराज और चक्रवात-प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही सुगम होगी।
यह ऐसे समय में आया है जब दिसंबर 2025 में चक्रवात 'डिटवाह' के बाद भारत ने श्रीलंका के पुनर्निर्माण के लिए 45 करोड़ अमेरिकी डॉलर के विशेष पैकेज की घोषणा की थी। इस पैकेज में सड़क, रेलवे और पुलों की मरम्मत, क्षतिग्रस्त घरों का निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि विकास तथा आपदा प्रबंधन को सुदृढ़ करने जैसी पहलें शामिल हैं।
विदेश सचिव की कोलंबो यात्रा
इसी सप्ताह विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अपनी आधिकारिक श्रीलंका यात्रा के दौरान भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति और 'विजन महासागर' के तहत श्रीलंका के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। मिस्री ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके, प्रधानमंत्री हरिणी अमरसूर्या, विदेश मंत्री विजिता हेराथ और विदेश सचिव अरुनी रनराजा से मुलाकात की।
इसके अलावा, उन्होंने विपक्ष के नेता सजित प्रेमदासा तथा श्रीलंकाई तमिल एवं भारतीय मूल के तमिल (आईओटी) समुदाय के नेताओं से अलग-अलग बैठकें कीं। इन सभी बैठकों में दोनों देशों के बीच चल रहे सहयोगी कार्यक्रमों और परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा की गई।
भारत की कुल सहायता का दायरा
पिछले सप्ताह श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने श्रीलंका के श्रम और विदेशी रोजगार मंत्री अनिल जयंथा फर्नांडो के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए बताया कि श्रीलंका में भारत की विकास सहायता 7.5 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुकी है, जिसमें 85 करोड़ अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा की अनुदान राशि शामिल है।
गौरतलब है कि ये परियोजनाएँ श्रीलंका के सभी 25 जिलों में सक्रिय हैं और आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, रेलवे, ऊर्जा तथा आजीविका जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बदलाव ला रही हैं।
आम जनता पर असर
बेली ब्रिजों की स्थापना से चक्रवात-प्रभावित क्षेत्रों में कटे हुए गाँवों और कस्बों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ा जा सकेगा, जिससे आपातकालीन सेवाएँ, कृषि उपज की आपूर्ति और दैनिक यातायात सुचारु होगा। भारतीय सेना के इंजीनियरों की तैनाती इस प्रक्रिया को तेज़ करेगी।
क्या होगा आगे
भारतीय सेना के इंजीनियर दल शीघ्र ही श्रीलंका के विभिन्न हिस्सों में इन पुलों की स्थापना शुरू करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल भारत-श्रीलंका के बीच रणनीतिक और मानवीय सहयोग को और मज़बूत करेगी, तथा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की 'विजन महासागर' नीति को ज़मीन पर साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है।