28 अगस्त 2026
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भारत-श्रीलंका फाउंडेशन की 41वीं बोर्ड बैठक: उच्चायुक्त झा और कोलोने ने नई परियोजनाओं पर की चर्चा

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भारत-श्रीलंका फाउंडेशन की 41वीं बोर्ड बैठक: उच्चायुक्त झा और कोलोने ने नई परियोजनाओं पर की चर्चा

सारांश

नई दिल्ली में भारत-श्रीलंका फाउंडेशन की 41वीं बोर्ड बैठक में दोनों देशों के उच्चायुक्तों ने शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति में नई परियोजनाओं पर चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत श्रीलंका को 450 मिलियन डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज के तहत बेली ब्रिज सौंप रहा है और 'पड़ोसी प्रथम' नीति के तहत संबंध प्रगाढ़ हो रहे हैं।

मुख्य बातें

भारत-श्रीलंका फाउंडेशन की 41वीं बोर्ड बैठक 28 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में हुई।
उच्चायुक्त संतोष झा और महिशिनी कोलोने ने संयुक्त अध्यक्षता की; बोर्ड सदस्य मोहन कुमार , अशोक मलिक और प्रसाद करियावासम भी शामिल।
6 अगस्त को उप उच्चायुक्त मैत्रेयी कुलकर्णी ने श्रीलंका को 250 मीट्रिक टन क्षमता के बेली ब्रिज सौंपे — भारत के 450 मिलियन डॉलर पुनर्निर्माण पैकेज का हिस्सा।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 5 अगस्त की श्रीलंका यात्रा में 'पड़ोसी प्रथम' नीति और 'विजन महासागर' के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
ISLF की स्थापना 1998 के MoU के तहत हुई थी; इसका उद्देश्य आर्थिक, शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना है।

भारत-श्रीलंका फाउंडेशन (ISLF) की 41वीं बोर्ड बैठक शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुई, जिसमें श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा और भारत में श्रीलंका की उच्चायुक्त महिशिनी कोलोने ने संयुक्त अध्यक्षता की। बैठक में फाउंडेशन की चल रही पहलों की समीक्षा की गई और शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी को और गहरा करने के लिए नए परियोजना प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में क्या हुआ

बोर्ड बैठक में मोहन कुमार, अशोक मलिक और प्रसाद करियावासम सहित वरिष्ठ सदस्य भी शामिल हुए। उच्चायुक्त संतोष झा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'आज नई दिल्ली में भारत-श्रीलंका फाउंडेशन की 41वीं बोर्ड बैठक की सह-अध्यक्षता श्रीलंका की भारत में उच्चायुक्त महिशिनी कोलोने के साथ की।' उन्होंने बताया कि बैठक में फाउंडेशन की मौजूदा गतिविधियों की समीक्षा के साथ-साथ नए सहयोग क्षेत्रों पर भी विचार किया गया।

भारत-श्रीलंका फाउंडेशन की पृष्ठभूमि

भारत-श्रीलंका फाउंडेशन एक ट्रस्ट फंड है, जिसकी स्थापना 1998 में दोनों देशों की सरकारों के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत की गई थी। इसका मूल उद्देश्य आर्थिक, वैज्ञानिक, शैक्षणिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देकर दोनों देशों के संबंधों को सुदृढ़ करना है। यह फाउंडेशन भारत-श्रीलंका संबंधों की नींव में एक महत्वपूर्ण संस्थागत स्तंभ की भूमिका निभाता है।

बुनियादी ढाँचे में भारत का सहयोग

इससे पहले 6 अगस्त को श्रीलंका में भारत की उप उच्चायुक्त मैत्रेयी कुलकर्णी ने श्रीलंका के सहकारी विकास उपमंत्री उपाली समरसिंघे को अतिरिक्त बेली ब्रिज सौंपे थे। ये पुल भारत के 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज का हिस्सा हैं। 250 मीट्रिक टन से अधिक वजन वहन करने में सक्षम इन पुलों को भारतीय सेना के इंजीनियर पूरे श्रीलंका में स्थापित करेंगे, जिससे संपर्क व्यवस्था बहाल होगी और बुनियादी ढाँचे के विकास में मदद मिलेगी।

विदेश सचिव मिस्री की श्रीलंका यात्रा का संदर्भ

गौरतलब है कि 5 अगस्त को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अपनी श्रीलंका यात्रा के दौरान भारत की 'पड़ोसी प्रथम' नीति और 'विजन महासागर' के तहत श्रीलंका के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई थी। इस दौरान उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके, प्रधानमंत्री हरिणी अमरसूर्या, विदेश मंत्री विजिता हेराथ, विदेश सचिव अरुणी रणराजा तथा विपक्ष के नेता साजिथ प्रेमदासा से मुलाकात की। उन्होंने श्रीलंका के तमिल और भारतीय मूल के तमिल समुदाय के नेताओं से भी अलग-अलग बैठकें कीं।

आगे की दिशा

यह बैठक ऐसे समय में आई है जब भारत और श्रीलंका के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और बुनियादी ढाँचे के क्षेत्रों में सहयोग की रफ्तार तेज हो रही है। दोनों देशों के बीच चल रही द्विपक्षीय परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा और नए प्रस्तावों पर विचार यह संकेत देता है कि आने वाले महीनों में सहयोग के नए आयाम उभर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

भारत स्पष्ट रूप से 'पड़ोसी प्रथम' को ठोस परियोजनाओं में बदलने की कोशिश कर रहा है। लेकिन असली परीक्षा यह है कि फाउंडेशन के नए प्रस्ताव केवल कागज़ी घोषणाओं तक सीमित रहते हैं या ज़मीनी स्तर पर जन-केंद्रित परिणाम देते हैं — एक ऐसा सवाल जो 1998 से इस संस्था के इर्द-गिर्द मँडराता रहा है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-श्रीलंका फाउंडेशन (ISLF) क्या है?
भारत-श्रीलंका फाउंडेशन एक ट्रस्ट फंड है जिसकी स्थापना 1998 में दोनों देशों की सरकारों के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत हुई थी। इसका उद्देश्य आर्थिक, वैज्ञानिक, शैक्षणिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देकर भारत-श्रीलंका संबंधों को मज़बूत करना है।
41वीं बोर्ड बैठक में किन विषयों पर चर्चा हुई?
28 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में हुई इस बैठक में फाउंडेशन की मौजूदा पहलों की समीक्षा की गई और शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में नए परियोजना प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक की संयुक्त अध्यक्षता उच्चायुक्त संतोष झा और महिशिनी कोलोने ने की।
भारत ने श्रीलंका को बेली ब्रिज क्यों सौंपे?
ये बेली ब्रिज भारत के 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज का हिस्सा हैं। 6 अगस्त को उप उच्चायुक्त मैत्रेयी कुलकर्णी ने उपमंत्री उपाली समरसिंघे को ये पुल सौंपे, जिन्हें भारतीय सेना के इंजीनियर श्रीलंका के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित करेंगे ताकि संपर्क व्यवस्था बहाल हो सके।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री की श्रीलंका यात्रा का क्या महत्व है?
5 अगस्त को विक्रम मिस्री ने श्रीलंका के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और विपक्ष के नेता सहित कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने भारत की 'पड़ोसी प्रथम' नीति और 'विजन महासागर' के तहत श्रीलंका के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई, जो दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को नई दिशा देने का संकेत है।
भारत-श्रीलंका सहयोग के मुख्य क्षेत्र कौन से हैं?
ISLF के माध्यम से दोनों देश शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में सहयोग करते हैं। इसके अलावा बुनियादी ढाँचे के पुनर्निर्माण (बेली ब्रिज), आर्थिक सहायता और कूटनीतिक संवाद भी द्विपक्षीय संबंधों के प्रमुख स्तंभ हैं।
राष्ट्र प्रेस
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