30 सितंबर 2026
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नकली दवा रैकेट: एसआईटी ने चेन्नई से बालासुब्रमण्यन को दबोचा, कुल गिरफ्तारियाँ सात हुईं

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नकली दवा रैकेट: एसआईटी ने चेन्नई से बालासुब्रमण्यन को दबोचा, कुल गिरफ्तारियाँ सात हुईं

सारांश

बेंगलुरु का नकली दवा घोटाला अब सात राज्यों तक फैली जाँच में बदल चुका है। चेन्नई से बालासुब्रमण्यन की गिरफ्तारी के साथ एसआईटी ने नेटवर्क की एक और कड़ी तोड़ी है — लेकिन ₹5 करोड़ की नकली कैंसर व आईसीयू दवाएँ 90 से अधिक अस्पतालों तक पहुँच चुकी हैं, जो इस मामले की असली गंभीरता बयान करती हैं।

मुख्य बातें

एसआईटी ने 30 सितंबर 2026 को चेन्नई से बालासुब्रमण्यन को गिरफ्तार किया; कुल गिरफ्तारियाँ सात हुईं।
बालासुब्रमण्यन 'डीएम फार्मा' में मुख्य आरोपी प्रशांत रंजन के साझेदार थे; उन्हें सात दिन की एसआईटी कस्टडी में भेजा गया।
घोटाले में ₹5 करोड़ से अधिक की नकली, एक्सपायर और री-लेबल दवाएँ जब्त; 90 से अधिक अस्पतालों और क्लीनिकों को आपूर्ति हुई।
कर्नाटक फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने 16 ड्रग लाइसेंस रद्द और 8 निलंबित किए, जिनमें फाइजर का सी एंड एफ डिपो भी शामिल।
एसआईटी ने 5 राज्यों — कर्नाटक, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र — में छापेमारी की।
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से क्यूआर कोड स्कैन न होने पर ड्रग एनफोर्समेंट अधिकारियों को सूचित करने की अपील की।

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने 30 सितंबर 2026 को चेन्नई से नकली दवा रैकेट के एक और प्रमुख आरोपी बालासुब्रमण्यन को गिरफ्तार कर लिया, जिसके साथ ही इस मामले में अब तक गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या सात हो गई है। यह गिरफ्तारी मुख्य आरोपी प्रशांत रंजन से पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के आधार पर हुई, जिन्हें कुछ दिन पूर्व बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था।

गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि

पुलिस के अनुसार, अदालत में पेश किए जाने के बाद बालासुब्रमण्यन को आगे की पूछताछ के लिए सात दिन की एसआईटी कस्टडी में भेज दिया गया है। चेन्नई स्थित फार्मा पार्टनर के रूप में पहचाने गए बालासुब्रमण्यन, फार्मास्युटिकल कंपनी 'डीएम फार्मा' में प्रशांत रंजन के साझेदार थे। जाँच में सामने आया है कि नकली दवाओं के निर्माण और वितरण में उनकी कथित तौर पर अहम भूमिका थी।

इससे पहले एसआईटी ने मुख्य आरोपी प्रशांत रंजन बाबू को बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उस समय गिरफ्तार किया जब वे अजरबैजान से भारत लौटे। पुलिस के मुताबिक, नकली दवा नेटवर्क के उजागर होते ही प्रशांत कथित तौर पर देश छोड़कर अजरबैजान भाग गए थे, जहाँ जाँच टीम ने उन्हें ट्रेस किया। एसआईटी के दबाव के बाद वे भारत लौटे और एयरपोर्ट पर पहुँचते ही हिरासत में ले लिए गए।

रैकेट की व्यापकता

गौरतलब है कि बेंगलुरु में इस घोटाले के सामने आने के बाद एसआईटी ने ₹5 करोड़ से अधिक मूल्य की नकली, एक्सपायर हो चुकी और री-लेबल की गई जीवन रक्षक, आईसीयू तथा कैंसर की दवाएँ जब्त की थीं। जाँच में पता चला कि यह गैर-कानूनी नेटवर्क 90 से अधिक अस्पतालों और क्लीनिकों को घटिया दवाएँ सप्लाई करता था।

बाद में एसआईटी ने कर्नाटक, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में कई स्थानों पर छापेमारी की। कर्नाटक फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने इस घोटाले से जुड़े रिटेलर्स, होलसेलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स के 16 ड्रग लाइसेंस रद्द कर दिए हैं और आठ अन्य को निलंबित कर दिया है। निलंबित लाइसेंस में फाइजर का सी एंड एफ (कैरीइंग एंड फॉरवर्डिंग) डिपो भी शामिल था।

सरकार की प्रतिक्रिया

कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने बताया कि फाइजर एजेंसी जाँचकर्ताओं के साथ सहयोग करने या जब्त की गई नकली दवाओं के रासायनिक घटकों की लैब-टेस्टिंग के लिए आवश्यक रेफरेंस स्टैंडर्ड उपलब्ध कराने में नाकाम रही। स्वास्थ्य विभाग अब प्रभावित मरीजों का पता लगाने और उनकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने में जुटा है, क्योंकि कैंसर और गंभीर बीमारियों की नकली दवाएँ मरीजों तक पहुँची थीं।

आम जनता पर असर और सावधानी

स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे दवाओं की पैकेजिंग और लेबल को ध्यान से जाँचें। यदि किसी दवा का क्यूआर कोड स्कैन न हो, तो इसकी सूचना तत्काल ड्रग एनफोर्समेंट अधिकारियों को दें। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में नकली दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।

आगे की जाँच

एसआईटी इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए आरोपियों से पूछताछ जारी रखे हुए है। जाँचकर्ताओं का ध्यान अब उन आपूर्ति श्रृंखला की कड़ियों पर है जो कई राज्यों में फैली हुई हैं। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब तक कितने और मरीज अनजाने में असरहीन या हानिकारक दवाएँ ले चुके होंगे — और इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बालासुब्रमण्यन कौन हैं और उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया?
बालासुब्रमण्यन चेन्नई स्थित फार्मास्युटिकल कंपनी 'डीएम फार्मा' में मुख्य आरोपी प्रशांत रंजन के साझेदार थे। एसआईटी के अनुसार, नकली दवाओं के निर्माण और वितरण में उनकी कथित तौर पर अहम भूमिका थी और उन्हें मुख्य आरोपी से पूछताछ के बाद मिले सुरागों के आधार पर गिरफ्तार किया गया।
बेंगलुरु नकली दवा घोटाले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
30 सितंबर 2026 तक एसआईटी इस मामले में कुल सात लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें मुख्य आरोपी प्रशांत रंजन बाबू भी शामिल हैं, जिन्हें अजरबैजान से लौटने पर बेंगलुरु एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था।
इस नकली दवा रैकेट का क्या असर मरीजों पर पड़ा है?
जाँच के अनुसार, यह नेटवर्क 90 से अधिक अस्पतालों और क्लीनिकों को नकली, एक्सपायर और री-लेबल की गई कैंसर, आईसीयू और जीवन रक्षक दवाएँ सप्लाई करता था। स्वास्थ्य विभाग अब प्रभावित मरीजों का पता लगाने और उनकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने में जुटा है।
कर्नाटक में कितने ड्रग लाइसेंस रद्द या निलंबित किए गए हैं?
कर्नाटक फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने इस घोटाले से जुड़े 16 ड्रग लाइसेंस रद्द कर दिए हैं और 8 अन्य को निलंबित कर दिया है। निलंबित लाइसेंस में फाइजर का सी एंड एफ डिपो भी शामिल है।
नकली दवाओं की पहचान कैसे करें, सरकार ने क्या सलाह दी है?
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे दवाओं की पैकेजिंग और लेबल को ध्यान से जाँचें। यदि किसी दवा का क्यूआर कोड स्कैन न हो, तो इसकी सूचना तत्काल ड्रग एनफोर्समेंट अधिकारियों को दें।
राष्ट्र प्रेस
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