नकली दवा रैकेट: एसआईटी ने चेन्नई से बालासुब्रमण्यन को दबोचा, कुल गिरफ्तारियाँ सात हुईं
सारांश
मुख्य बातें
स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने 30 सितंबर 2026 को चेन्नई से नकली दवा रैकेट के एक और प्रमुख आरोपी बालासुब्रमण्यन को गिरफ्तार कर लिया, जिसके साथ ही इस मामले में अब तक गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या सात हो गई है। यह गिरफ्तारी मुख्य आरोपी प्रशांत रंजन से पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के आधार पर हुई, जिन्हें कुछ दिन पूर्व बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था।
गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
पुलिस के अनुसार, अदालत में पेश किए जाने के बाद बालासुब्रमण्यन को आगे की पूछताछ के लिए सात दिन की एसआईटी कस्टडी में भेज दिया गया है। चेन्नई स्थित फार्मा पार्टनर के रूप में पहचाने गए बालासुब्रमण्यन, फार्मास्युटिकल कंपनी 'डीएम फार्मा' में प्रशांत रंजन के साझेदार थे। जाँच में सामने आया है कि नकली दवाओं के निर्माण और वितरण में उनकी कथित तौर पर अहम भूमिका थी।
इससे पहले एसआईटी ने मुख्य आरोपी प्रशांत रंजन बाबू को बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उस समय गिरफ्तार किया जब वे अजरबैजान से भारत लौटे। पुलिस के मुताबिक, नकली दवा नेटवर्क के उजागर होते ही प्रशांत कथित तौर पर देश छोड़कर अजरबैजान भाग गए थे, जहाँ जाँच टीम ने उन्हें ट्रेस किया। एसआईटी के दबाव के बाद वे भारत लौटे और एयरपोर्ट पर पहुँचते ही हिरासत में ले लिए गए।
रैकेट की व्यापकता
गौरतलब है कि बेंगलुरु में इस घोटाले के सामने आने के बाद एसआईटी ने ₹5 करोड़ से अधिक मूल्य की नकली, एक्सपायर हो चुकी और री-लेबल की गई जीवन रक्षक, आईसीयू तथा कैंसर की दवाएँ जब्त की थीं। जाँच में पता चला कि यह गैर-कानूनी नेटवर्क 90 से अधिक अस्पतालों और क्लीनिकों को घटिया दवाएँ सप्लाई करता था।
बाद में एसआईटी ने कर्नाटक, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में कई स्थानों पर छापेमारी की। कर्नाटक फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने इस घोटाले से जुड़े रिटेलर्स, होलसेलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स के 16 ड्रग लाइसेंस रद्द कर दिए हैं और आठ अन्य को निलंबित कर दिया है। निलंबित लाइसेंस में फाइजर का सी एंड एफ (कैरीइंग एंड फॉरवर्डिंग) डिपो भी शामिल था।
सरकार की प्रतिक्रिया
कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने बताया कि फाइजर एजेंसी जाँचकर्ताओं के साथ सहयोग करने या जब्त की गई नकली दवाओं के रासायनिक घटकों की लैब-टेस्टिंग के लिए आवश्यक रेफरेंस स्टैंडर्ड उपलब्ध कराने में नाकाम रही। स्वास्थ्य विभाग अब प्रभावित मरीजों का पता लगाने और उनकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने में जुटा है, क्योंकि कैंसर और गंभीर बीमारियों की नकली दवाएँ मरीजों तक पहुँची थीं।
आम जनता पर असर और सावधानी
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे दवाओं की पैकेजिंग और लेबल को ध्यान से जाँचें। यदि किसी दवा का क्यूआर कोड स्कैन न हो, तो इसकी सूचना तत्काल ड्रग एनफोर्समेंट अधिकारियों को दें। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में नकली दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
आगे की जाँच
एसआईटी इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए आरोपियों से पूछताछ जारी रखे हुए है। जाँचकर्ताओं का ध्यान अब उन आपूर्ति श्रृंखला की कड़ियों पर है जो कई राज्यों में फैली हुई हैं। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।