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सोलन की 44 पंचायतें टीबी मुक्त घोषित, 7 को गोल्ड और 6 को सिल्वर मेडल से नवाजा

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सोलन की 44 पंचायतें टीबी मुक्त घोषित, 7 को गोल्ड और 6 को सिल्वर मेडल से नवाजा

सारांश

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले की 44 पंचायतें टीबी मुक्त घोषित हुईं — 7 को लगातार तीन साल की उपलब्धि पर गोल्ड, 6 को सिल्वर और 31 को ब्रॉन्ज मेडल। यह जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त अभियान की बड़ी जीत है।

मुख्य बातें

सोलन जिले की 44 पंचायतें टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी मुक्त घोषित की गईं।
7 पंचायतों को लगातार 3 वर्षों तक टीबी मुक्त रहने पर गोल्ड मेडल प्रदान किया गया।
6 पंचायतों को लगातार 2 वर्षों की उपलब्धि पर सिल्वर मेडल मिला; 31 पंचायतों को ब्रॉन्ज मेडल दिया गया।
टीबी मुक्त दर्जे के लिए प्रति 1,000 आबादी पर कम से कम 30 लोगों की जाँच और 1 से कम मरीज होना अनिवार्य है।
निक्षय पोषण योजना के तहत पोषण सहायता भी टीबी मुक्त दर्जे की एक अनिवार्य शर्त है।
अजय पाठक ने 10–14 दिन की खाँसी, बुखार और वजन घटने जैसे लक्षणों पर तत्काल जाँच कराने की अपील की।

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 44 पंचायतों को आधिकारिक रूप से टीबी मुक्त घोषित किया गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अजय पाठक ने 21 अक्टूबर 2026 को बताया कि यह उपलब्धि पंचायती राज प्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विभाग के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। उत्कृष्टता के आधार पर इन पंचायतों को गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज — तीन श्रेणियों में पुरस्कृत किया गया है।

पुरस्कार वितरण: तीन श्रेणियाँ, तीन उपलब्धियाँ

डॉ. पाठक के अनुसार, 7 पंचायतों को गोल्ड मेडल प्रदान किया गया, जो लगातार तीन वर्षों से टीबी मुक्त बनी हुई हैं। 6 पंचायतों को सिल्वर मेडल मिला, जिन्होंने लगातार दो वर्षों तक टीबी मुक्त स्थिति बनाए रखी। वहीं 31 पंचायतों को इस वर्ष पहली बार टीबी मुक्त घोषित होने पर ब्रॉन्ज मेडल से सम्मानित किया गया।

टीबी मुक्त दर्जे के मानदंड

किसी पंचायत को टीबी मुक्त घोषित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट मापदंड निर्धारित किए हैं। इसके तहत प्रति 1,000 की आबादी पर कम से कम 30 लोगों की टीबी जाँच अनिवार्य है। इसके अलावा प्रति 1,000 आबादी पर टीबी मरीजों की संख्या 1 से कम होनी चाहिए।

चिह्नित मरीजों का उपचार पूर्ण होना तथा उनका स्वस्थ होना भी ज़रूरी है। साथ ही निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत सभी पात्र मरीजों को पोषण सहायता उपलब्ध कराना भी इस प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है।

सामाजिक भ्रांतियाँ दूर करना भी जरूरी

सीएमओ डॉ. पाठक ने कहा कि टीबी को लेकर समाज में व्याप्त भ्रांतियों और भेदभाव को समाप्त करने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका निर्णायक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय पर जाँच और नियमित उपचार से इस बीमारी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से टीबी के लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करने की अपील की।

टीबी के संभावित लक्षण क्या हैं

डॉ. पाठक के अनुसार, शाम को बुखार आना, अत्यधिक थकान, तेज़ी से वजन घटना, शारीरिक कमज़ोरी, 10 से 14 दिन तक लगातार खाँसी रहना और गले में गाँठें होना टीबी के संभावित लक्षण हो सकते हैं। ऐसे कोई भी लक्षण दिखने पर नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र में तुरंत जाँच करवाने की सलाह दी गई है।

जिन क्षेत्रों में जाँच की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहाँ स्वास्थ्य विभाग खुद सैंपल एकत्र कर उन्हें जाँच केंद्र तक पहुँचाने की व्यवस्था करेगा। सीएमओ ने सभी नागरिकों से टीबी उन्मूलन अभियान में सक्रिय सहयोग का आह्वान किया है, ताकि सोलन जिला शीघ्र ही पूर्णतः टीबी मुक्त बन सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे केंद्र सरकार के 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य — जो अब चूक चुका है — की पृष्ठभूमि में देखना ज़रूरी है। 44 में से केवल 7 पंचायतों का लगातार तीन साल तक टीबी मुक्त रहना बताता है कि दीर्घकालिक बनाए रखना सबसे कठिन चुनौती है। असली सवाल यह है कि ब्रॉन्ज मेडल पाने वाली 31 नई पंचायतें अगले दो-तीन वर्षों में अपनी स्थिति बरकरार रख पाती हैं या नहीं — और क्या स्वास्थ्य विभाग के पास इस विस्तार को टिकाऊ बनाने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोलन जिले की कितनी पंचायतें टीबी मुक्त घोषित हुई हैं?
सोलन जिले की कुल 44 पंचायतें टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी मुक्त घोषित की गई हैं। इनमें से 7 को गोल्ड, 6 को सिल्वर और 31 को ब्रॉन्ज मेडल से सम्मानित किया गया है।
किसी पंचायत को टीबी मुक्त घोषित करने के लिए क्या मानदंड हैं?
टीबी मुक्त दर्जे के लिए प्रति 1,000 आबादी पर कम से कम 30 लोगों की जाँच और प्रति 1,000 पर 1 से कम सक्रिय टीबी मरीज होना ज़रूरी है। इसके अलावा चिह्नित मरीजों का पूर्ण उपचार और निक्षय पोषण योजना के तहत पोषण सहायता सुनिश्चित करना भी अनिवार्य है।
गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल में क्या अंतर है?
गोल्ड मेडल उन पंचायतों को दिया गया जो लगातार तीन वर्षों से टीबी मुक्त हैं, सिल्वर उन्हें जो लगातार दो वर्ष टीबी मुक्त रहीं, और ब्रॉन्ज उन्हें जो इस वर्ष पहली बार टीबी मुक्त घोषित हुई हैं।
टीबी के प्रमुख लक्षण क्या हैं और कहाँ जाँच कराएँ?
CMO डॉ. अजय पाठक के अनुसार शाम को बुखार, थकान, वजन घटना, 10 से 14 दिन की खाँसी और गले में गाँठें टीबी के संभावित लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाँच करानी चाहिए; जहाँ सुविधा नहीं है वहाँ स्वास्थ्य विभाग सैंपल एकत्र करने की व्यवस्था करता है।
निक्षय पोषण योजना क्या है और टीबी उन्मूलन में इसकी क्या भूमिका है?
निक्षय पोषण योजना केंद्र सरकार की योजना है, जिसके तहत टीबी मरीजों को उपचार के दौरान पोषण सहायता दी जाती है। यह योजना टीबी मुक्त पंचायत घोषित होने की अनिवार्य शर्तों में से एक है, क्योंकि पर्याप्त पोषण उपचार की सफलता दर को बढ़ाता है।
राष्ट्र प्रेस
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