ड्रग तस्करों पर बड़ी कार्रवाई: श्रीनगर पुलिस ने 3.5 करोड़ की संपत्ति जब्त की

Click to start listening
ड्रग तस्करों पर बड़ी कार्रवाई: श्रीनगर पुलिस ने 3.5 करोड़ की संपत्ति जब्त की

सारांश

श्रीनगर पुलिस ने NDPS एक्ट के तहत दो ड्रग तस्करों — शकील अहमद गनी और फारूक अहमद मीर — की 3.5 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां जब्त कीं। नशामुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के तहत यह कार्रवाई आतंक-नशा नेक्सस तोड़ने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

Key Takeaways

  • श्रीनगर पुलिस ने 25 अप्रैल 2025 को ड्रग तस्करों की 3.5 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां जब्त कीं।
  • एफआईआर संख्या 56/2025 के आरोपी शकील अहमद गनी और फारूक अहमद मीर की संपत्तियां सीज की गईं।
  • जब्त संपत्तियों में तीन दो मंजिला आवासीय मकान और तीन कनाल भूमि शामिल हैं।
  • कार्रवाई एनडीपीएस अधिनियम की धारा 68-एफ के तहत संगम पुलिस स्टेशन द्वारा की गई।
  • उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सांबा में नशा-विरोधी अभियान में भाग लेकर 100 दिवसीय अभियान की अहमियत को रेखांकित किया।
  • सुरक्षा बलों का मानना है कि ड्रग मनी का उपयोग आतंकवाद के वित्तपोषण में होता है — इसलिए यह अभियान सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

श्रीनगर, 25 अप्रैल — नशामुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के तहत श्रीनगर पुलिस ने मादक पदार्थों के तस्करों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए 3.5 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां जब्त कर ली हैं। एनडीपीएस अधिनियम की धारा 68-एफ के अंतर्गत की गई इस कार्रवाई में दो आरोपियों के आवासीय मकान और भूमि को सीज किया गया है। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर में चल रहे व्यापक नशा-विरोधी अभियान का हिस्सा है।

जब्त संपत्तियों का विवरण

संगम पुलिस स्टेशन ने एफआईआर संख्या 56/2025 (एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8/20 और 29) के अंतर्गत दो आरोपियों से जुड़ी संपत्तियां जब्त की हैं। पहले आरोपी शकील अहमद गनी, पुत्र अब्दुस सतर गनी, निवासी क्रेशबल, नूरबाग, श्रीनगर का एक दो मंजिला आवासीय मकान और 1 कनाल भूमि सीज की गई है।

दूसरे आरोपी फारूक अहमद मीर, पुत्र अब्दुर रहमान मीर, निवासी क्रेशबल, नूरबाग, श्रीनगर की 2 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की एक दो मंजिला संपत्ति और 1 कनाल जमीन जब्त की गई। इसके अतिरिक्त उसी क्षेत्र में फारूक अहमद मीर के स्वामित्व वाला लगभग 1.5 करोड़ रुपये मूल्य का एक और दो मंजिला आवासीय मकान और 1 कनाल भूमि भी सीज की गई है।

उपराज्यपाल की नशा-विरोधी अभियान में भागीदारी

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को सांबा में आयोजित नशा-विरोधी कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने कहा कि यह 100 दिवसीय अभियान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा और यह प्रमाण होगा कि जब जनता एकजुट होती है तो इतिहास बदला जा सकता है।

उपराज्यपाल ने सांबा के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस गंभीर समस्या का समाधान उन्हीं के हाथों में है। उन्होंने युवाओं से दृढ़ संकल्प के साथ सही राह पर बने रहने का आह्वान किया और कहा कि उनके सपने शक्तिशाली हैं और उनकी क्षमता असीमित है।

मादक पदार्थ और आतंकवाद का खतरनाक गठजोड़

जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बल ड्रग तस्करों, पेडलर्स और हवाला रैकेट में शामिल तत्वों के विरुद्ध आक्रामक अभियान चला रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन अवैध गतिविधियों से प्राप्त धन का उपयोग केंद्र शासित प्रदेश में आतंकवाद को वित्तपोषित करने के लिए किया जाता है।

भीतरी इलाकों में जहां पुलिस और अर्धसैनिक बल ड्रग नेटवर्क तोड़ रहे हैं, वहीं सेना और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) सीमा पर पाकिस्तान की आईएसआई समर्थित संगठनों द्वारा संचालित मादक पदार्थों की तस्करी, घुसपैठ और ड्रोन गतिविधियों को विफल कर रहे हैं।

व्यापक संदर्भ और नीतिगत महत्व

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में हाल के महीनों में ड्रग तस्करों की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाइयां तेज हुई हैं। एनडीपीएस अधिनियम की धारा 68-एफ एक शक्तिशाली कानूनी हथियार है जो बिना दोषसिद्धि की प्रतीक्षा किए भी संपत्ति जब्त करने का अधिकार देता है। यह प्रावधान ड्रग माफिया की आर्थिक नींव को कमजोर करने में कारगर साबित हो रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, तस्करों की संपत्ति जब्त करना केवल दंडात्मक कार्रवाई नहीं बल्कि एक निवारक रणनीति भी है — जो संभावित तस्करों को यह संदेश देती है कि नशे के धंधे से अर्जित दौलत सुरक्षित नहीं रहेगी। आने वाले दिनों में इस अभियान के और विस्तार की उम्मीद है और प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि बड़े ड्रग किंगपिन भी निशाने पर हैं।

Point of View

बल्कि उस आर्थिक ढांचे पर सीधा प्रहार है जो ड्रग माफिया और आतंकी नेटवर्क को एक साथ पोषित करता है। विडंबना यह है कि जिन मकानों और जमीनों को नशे के पैसे से खड़ा किया गया, वे अब राज्य की संपत्ति बन रहे हैं — यह संदेश तस्करों के लिए सबसे बड़ा झटका है। NDPS की धारा 68-एफ का आक्रामक उपयोग दर्शाता है कि प्रशासन अब केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं, बल्कि ड्रग इकोनॉमी की जड़ें उखाड़ने पर केंद्रित है। सवाल यह है कि क्या यह अभियान 100 दिनों के बाद भी उसी तीव्रता से जारी रहेगा या यह केवल एक प्रशासनिक प्रदर्शन बनकर रह जाएगा।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

श्रीनगर पुलिस ने किसकी संपत्ति जब्त की और कितनी कीमत की है?
श्रीनगर पुलिस ने ड्रग तस्करों शकील अहमद गनी और फारूक अहमद मीर की कुल 3.5 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां जब्त की हैं। इनमें तीन दो मंजिला आवासीय मकान और तीन कनाल भूमि शामिल हैं।
किस कानून के तहत यह संपत्ति जब्त की गई?
एनडीपीएस अधिनियम की धारा 68-एफ के प्रावधानों के तहत यह जब्ती की गई। यह धारा अदालती दोषसिद्धि से पहले भी ड्रग तस्करों की संपत्ति सीज करने का अधिकार देती है।
नशामुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान क्या है?
यह जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा शुरू किया गया 100 दिवसीय नशा-विरोधी अभियान है जिसका उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेश को मादक पदार्थों से मुक्त करना है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा स्वयं इस अभियान में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में ड्रग तस्करी और आतंकवाद का क्या संबंध है?
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ड्रग तस्करी से प्राप्त धन का उपयोग आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए किया जाता है। पाकिस्तान की आईएसआई समर्थित संगठन सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी और ड्रोन गतिविधियों के जरिए इस नेटवर्क को संचालित करते हैं।
फारूक अहमद मीर की कितनी संपत्ति जब्त हुई?
फारूक अहमद मीर की 2 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का एक मकान और 1.5 करोड़ रुपये मूल्य का एक अन्य मकान सहित कुल दो आवासीय संपत्तियां और 2 कनाल भूमि जब्त की गई है।
Nation Press