'संडे ऑन साइकिल' की प्रेरणा प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों से: डॉ. मनसुख मांडविया ने अक्षय कुमार को बताई कहानी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने खुलासा किया है कि उनके महत्वाकांक्षी अभियान 'संडे ऑन साइकिल' के पीछे की असली प्रेरणा उनके प्राइमरी स्कूल के दो शिक्षक हैं, जो दशकों तक साइकिल से विद्यालय आते रहे। 21 जून 2025 को 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मांडविया ने यह बात फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार के साथ बातचीत में कही।
शिक्षकों की दिनचर्या ने बदली सोच
मांडविया ने अक्षय कुमार से बातचीत में कहा, 'मैं साइकिल शुरू से चलाता हूं। इसकी प्रेरणा मुझे अपने प्राइमरी स्कूल के दो शिक्षकों से मिली है। एक तीन किलोमीटर और एक चार किलोमीटर साइकिल चलाकर आते थे। 20 साल तक उनकी यही दिनचर्या थी। आज की तारीख में एक 92 वर्ष के और एक 94 वर्ष के हैं। मुझे 'संडे ऑन साइकिल' कार्यक्रम के लिए अपने उन्हीं शिक्षकों से प्रेरणा मिलती है।' यह बातचीत मांडविया ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) प्लेटफॉर्म पर 19 सेकंड के वीडियो के रूप में साझा की।
'संडे ऑन साइकिल' अभियान क्या है
'संडे ऑन साइकिल' केंद्र सरकार का एक राष्ट्रव्यापी फिटनेस अभियान है, जिसकी शुरुआत दिसंबर 2024 में फिट इंडिया मूवमेंट के तहत डॉ. मांडविया ने की थी। इस अभियान के अंतर्गत प्रत्येक रविवार को नई दिल्ली समेत देशभर के सैकड़ों स्थानों पर युवा बड़ी संख्या में एकत्र होकर साइकिल रैली में भाग लेते हैं।
अभियान का मूल उद्देश्य समाज के हर वर्ग में फिटनेस के प्रति जागरूकता फैलाना और साइकिलिंग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश देना है। इसके साथ ही यह कार्यक्रम मोटापे से निपटने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का भी माध्यम बना है।
योग दिवस पर साझा मंच
डॉ. मांडविया और अक्षय कुमार दोनों 21 जून को 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में एक साथ शामिल हुए। गौरतलब है कि अक्षय कुमार लंबे समय से फिटनेस के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए जाने जाते हैं, और इस साझेदारी ने 'संडे ऑन साइकिल' अभियान को व्यापक सार्वजनिक ध्यान दिलाया।
आम जनता पर असर
यह अभियान विशेष रूप से शहरी युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहा है, जहाँ गतिहीन जीवनशैली और मोटापा तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याएँ बन चुकी हैं। साइकिलिंग को दिनचर्या में शामिल करने का यह संदेश न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य बल्कि सामूहिक पर्यावरण चेतना को भी बढ़ावा देता है। आने वाले रविवारों में इस अभियान का विस्तार और अधिक शहरों तक होने की संभावना जताई जा रही है।