सूरत VGRC 2025: मैंगो फेस्टिवल और 120 साल पुराने जरी उद्योग पर रहेगा विशेष फोकस
सारांश
Key Takeaways
- VGRC का तीसरा संस्करण 1 और 2 मई को सूरत में आयोजित होगा।
- पाँच दिवसीय आम महोत्सव 1 से 5 मई तक ऑरो विश्वविद्यालय, हजीरा रोड पर; 40-50 किसान भाग लेंगे।
- सूरत के जरी उद्योग को नवंबर 2010 में केंद्र सरकार से जीआई दर्जा मिला; उद्योग की आयु 120+ वर्ष।
- जरी उद्योग भारत के कुल जरी उत्पादन का 70%25 हिस्सा; ₹800-900 करोड़ का वार्षिक कारोबार।
- लगभग 25 लाख लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जरी उद्योग पर निर्भर।
- 1 मई शाम 4:00-5:30 बजे IST को बागवानी पद्धतियों पर विशेष सेमिनार।
सूरत में वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन (VGRC) का तीसरा संस्करण 1 और 2 मई को आयोजित होने जा रहा है। इस बार सम्मेलन में पाँच दिवसीय आम महोत्सव (मैंगो फेस्टिवल) और शहर के ऐतिहासिक जरी उद्योग को विशेष स्थान मिलेगा, जो दक्षिण गुजरात की क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति देने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
आम महोत्सव: कहाँ और कब
राज्य के बागवानी विभाग द्वारा आयोजित यह आम महोत्सव 1 से 5 मई तक हजीरा रोड स्थित ऑरो विश्वविद्यालय में होगा। दक्षिण गुजरात के विभिन्न जिलों से लगभग 40 से 50 किसानों के भाग लेने की उम्मीद है, जो उच्च गुणवत्ता वाले और प्राकृतिक रूप से उगाए गए आमों को प्रदर्शन एवं बिक्री के लिए पेश करेंगे।
डोम नंबर 3 में आगंतुक किसानों से सीधे फल खरीद सकेंगे। आयोजकों के अनुसार, उपलब्ध उत्पाद 'कार्बाइड-मुक्त, शुद्ध, प्राकृतिक और स्वादिष्ट' होंगे। 1 मई को दक्षिण गुजरात, भारत के अन्य भागों और चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय किस्मों के आमों की एक विशेष प्रदर्शनी भी खुलेगी।
उसी दिन शाम 4:00 बजे से 5:30 बजे IST तक बागवानी पद्धतियों पर एक सेमिनार भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें किसानों और विशेषज्ञों के बीच सीधे संवाद का अवसर रहेगा।
जरी उद्योग: 120 साल की विरासत, ₹800-900 करोड़ का कारोबार
सम्मेलन में सूरत के जरी उद्योग पर भी विशेष प्रकाश डाला जाएगा। इस उद्योग की जड़ें 120 वर्षों से भी अधिक पुरानी हैं और यह वर्तमान में भारत के कुल जरी उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा है। उल्लेखनीय है कि इस उद्योग को नवंबर 2010 में केंद्र सरकार से जीआई (भौगोलिक संकेत) का दर्जा प्राप्त हुआ था।
अनुमान है कि लगभग 25 लाख लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस क्षेत्र पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर हैं। सूरत में लगभग 800 पंजीकृत इकाइयाँ हैं, जिनका वार्षिक कारोबार ₹800 से 900 करोड़ के आसपास है।
उद्योग में बदलाव: सोने से प्लास्टिक तक का सफर
सूरत जरी निर्माण संघ के अध्यक्ष बंकिमचंद्र जरीवाला ने बताया कि उद्योग ने समय के साथ बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढाला है। उन्होंने कहा कि जरी, जो कभी शुद्ध सोने और चाँदी से बनाई जाती थी, धीरे-धीरे तांबे और मिश्र धातुओं से बनने लगी। पिछले 10 से 15 वर्षों में प्लास्टिक के धागों से बने धातु के धागे का भी उपयोग शुरू हो गया है।
गौरतलब है कि यह बदलाव उद्योग की व्यावसायिक अनुकूलनशीलता को दर्शाता है, हालाँकि पारंपरिक शिल्प की गुणवत्ता को लेकर कारीगरों के बीच चर्चाएँ भी जारी हैं।
क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर असर और आगे की राह
VGRC का यह संस्करण दक्षिण गुजरात के कृषि और परंपरागत उद्योग — दोनों क्षेत्रों को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास है। आम महोत्सव जहाँ किसानों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ेगा, वहीं जरी उद्योग की प्रदर्शनी 25 लाख से अधिक निर्भर कामगारों की आजीविका को राष्ट्रीय मंच पर उजागर करेगी। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस सम्मेलन से उभरने वाले निवेश प्रस्ताव इन क्षेत्रों की दीर्घकालिक चुनौतियों का समाधान कर पाते हैं या नहीं।