क्या सूर्या हांसदा के पुलिस एनकाउंटर की कहानी सच है? सीबीआई जांच की मांग : बाबूलाल मरांडी

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क्या सूर्या हांसदा के पुलिस एनकाउंटर की कहानी सच है? सीबीआई जांच की मांग : बाबूलाल मरांडी

सारांश

क्या सूर्या हांसदा के पुलिस एनकाउंटर की कहानी सच है? भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मामले को झूठा बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की। क्या ये एक साजिश है? जानिए इस विवादास्पद कहानी के पीछे के तथ्य।

Key Takeaways

  • सूर्या हांसदा की हत्या की कहानी विवादास्पद है।
  • भाजपा ने सीबीआई जांच की मांग की है।
  • जांच समिति की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
  • हांसदा को एक संवेदनशील सामाजिक कार्यकर्ता बताया गया।
  • पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं।

रांची, 24 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सूर्या हांसदा के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की कहानी पूरी तरह से झूठी है।

उन्होंने यह भी कहा कि गोड्डा जिले के सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता सूर्या हांसदा की हत्या सत्तारूढ़ दल, माफिया और पुलिस की एक साजिश का परिणाम है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच सीबीआई द्वारा की जाए।

मरांडी ने आगे बताया कि इस मामले की जांच के लिए पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की अध्यक्षता में एक जांच समिति बनाई थी। समिति की रिपोर्ट बताती है कि हांसदा की हत्या पूर्व नियोजित थी।

उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि 11 जून 2025 को गोड्डा में झामुमो की सभा के दौरान मुख्यमंत्री के करीबी विधायक प्रतिनिधि ने खुले मंच पर कहा था कि जो सरकार की बात नहीं मानेगा, उसे पुलिस की गोली का शिकार होना पड़ेगा। इसके अगले दिन सूर्या हांसदा का नाम एक मुकदमे में जोड़ा गया और दो महीने बाद उन्हें कथित पुलिस मुठभेड़ में मार डाला गया।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पुलिस ने हांसदा को अपराधी घोषित किया, जबकि अदालत ने उन्हें कभी दोषी नहीं ठहराया। उनके खिलाफ दर्ज 24 मामलों में से 14 में वे बरी हो चुके थे, 5 मामलों में जमानत पर थे और 5 में जमानत विचाराधीन थी। जिस घटना (27 मई) के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई, उस दिन वे अपने बेटे का जन्मदिन मना रहे थे।

उन्होंने कहा कि सूर्या हांसदा एक संवेदनशील सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता थे, जो 400 अनाथ बच्चों की पढ़ाई की चिंता करते थे। उनके परिवार और जनता की मांग है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच केवल सीबीआई ही कर सकती है। हांसदा अवैध खनन, बांग्लादेशी घुसपैठ और धर्मांतरण जैसे मुद्दों का विरोध करते थे, इसी कारण सत्ता पक्ष के निशाने पर थे।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पुलिस की मुठभेड़ असली थी, तो गोली पेट में कैसे लगी जबकि उन्हें भागते हुए बताया गया था। उनकी गिरफ्तारी में गवाह और मेडिकल जांच की सामान्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

गोड्डा जिले की पुलिस ने 11 अगस्त को बोआरीजोर थाना क्षेत्र, धमनी पहाड़ के पास सूर्या हांसदा के एनकाउंटर में मारे जाने का दावा किया था। पुलिस के अनुसार, सूर्या पर 20 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे और वह कई गंभीर अपराधों में फरार था। मुठभेड़ के दौरान पुलिस ने उनके पास से हथियार भी बरामद किए थे।

भाजपा की जांच टीम में शामिल प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट संदिग्ध है और ऐसा लगता है कि पहले टॉर्चर से उनकी मौत हुई और बाद में गोली मारकर एनकाउंटर का रूप दिया गया। भाजपा की जांच समिति में अमर कुमार बाउरी, भानु प्रताप शाही, रणधीर सिंह, अमित मंडल, सुनील सोरेन और अनीता सोरेन भी शामिल थे।

Point of View

तो उसे उजागर किया जाना चाहिए। हमें एक ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता है जहां हर नागरिक को न्याय मिले।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

सूर्या हांसदा के एनकाउंटर का असली कारण क्या है?
बाबूलाल मरांडी के अनुसार, यह हत्या एक साजिश का परिणाम है, जो सत्तारूढ़ दल और पुलिस की मिलीभगत से हुई।
क्या सूर्या हांसदा पर सच में अपराध के आरोप थे?
सूर्या हांसदा के खिलाफ 24 मामले दर्ज थे, लेकिन अदालत ने उन्हें कभी दोषी नहीं ठहराया।
सीबीआई जांच क्यों जरूरी है?
सीबीआई जांच के माध्यम से इस मामले की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकती है।