क्या स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विवाद पर अखिलेश का तंज सही है?

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क्या स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विवाद पर अखिलेश का तंज सही है?

सारांश

प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में हुए विवाद पर अखिलेश यादव ने भाजपा पर तंज कसा है। क्या यह विवाद समाज में और भी तूल पकड़ेगा?

Key Takeaways

  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का विवाद बढ़ता जा रहा है।
  • अखिलेश यादव ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
  • धार्मिक परंपराओं का सम्मान करना आवश्यक है।

लखनऊ, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के स्नान को लेकर ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विवाद पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीखा प्रहार किया।

उन्होंने कहा कि भाजपा के जाने से संस्कारों की रक्षा हो सकेगी। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने बसंत पंचमी की शुभकामनाएं देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भाजपा के खिलाफ लिखा कि न किसी को ‘स्नान’ से रोका जाए और न ही ‘दान’ से। सदियों से जो परंपरा चली आ रही है, उसे सनातनी-सरिता को नहीं रोकना चाहिए। भाजपा के जाने से संस्कारों की रक्षा संभव है।

इससे पहले, उन्होंने यह भी लिखा था कि सच्चे सनातनी भाजपा द्वारा जगद्गुरु शंकराचार्य जी और उनके अनुयायियों के प्रति अपमानजनक व्यवहार से अत्यंत दुखी हैं और अब वे मुखर होते जा रहे हैं। जैसे-जैसे आम लोगों के समर्थन में वीडियो इंटरनेट पर बढ़ रहे हैं, ऐसा लगता है कि भाजपा की धर्म-विरोधी गतिविधियों के खिलाफ जन आक्रोश बढ़ रहा है। न्यूज चैनल पर जिस तरह से पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य जी से बात की गई, वह भी अशोभनीय था। हमारे देश में धर्म के प्रति सम्मान रखने वालों के सामने हाथ जोड़े जाते हैं, उन्हें नहीं रोका जाता।

ज्ञात रहे कि प्रयाग में चल रहे माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या स्नान को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। स्नान व्यवस्था को लेकर उत्पन्न तनाव ने धार्मिक, प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। मौनी अमावस्या के अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए निकले थे, लेकिन मेला प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया।

इस दौरान शंकराचार्य के समर्थकों और मौके पर तैनात पुलिस के बीच कहासुनी बढ़ गई, जो बाद में धक्का-मुक्की में बदल गई। घटना से आक्रोशित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मौके पर ही धरना प्रारंभ कर दिया। उन्होंने प्रशासन पर धार्मिक परंपराओं की अनदेखी और संत समाज का अपमान करने का आरोप लगाया। इसके बाद से ही यह मामला लगातार गरमाया हुआ है।

Point of View

जहाँ सभी धर्मों और आस्थाओं का सम्मान किया जाए।
NationPress
23/01/2026

Frequently Asked Questions

माघ मेले में क्या विवाद हुआ?
माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान के लिए रोका गया, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ।
अखिलेश यादव ने इस पर क्या कहा?
अखिलेश यादव ने भाजपा पर तंज करते हुए कहा कि न किसी को स्नान से रोका जाए और न दान से।
यह विवाद क्यों महत्वपूर्ण है?
यह विवाद धार्मिक परंपराओं और राजनीतिक दृष्टिकोणों के बीच संतुलन बनाने का एक प्रयास है।
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