स्विस राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन 5 अक्टूबर को भारत दौरे पर, PM मोदी से होगी द्विपक्षीय वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 5 से 7 अक्टूबर 2026 तक भारत की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर आएंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह इस वर्ष उनका दूसरा भारत दौरा है और पहली औपचारिक राजकीय यात्रा होगी। व्यापार, निवेश, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में द्विपक्षीय वार्ता होने की उम्मीद है।
यात्रा की पृष्ठभूमि
राष्ट्रपति पार्मेलिन इससे पहले फरवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेने के लिए भारत आए थे। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत के राष्ट्रपति की स्विट्जरलैंड की आखिरी राजकीय यात्रा 2019 में हुई थी, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 और 2018 में स्विट्जरलैंड की आधिकारिक यात्राएँ की थीं। यह यात्रा दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय राजनयिक संवाद की निरंतरता को दर्शाती है।
मुख्य कार्यक्रम एवं बैठकें
5 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पार्मेलिन के बीच औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता होगी। दोनों नेता व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, गतिशीलता, संस्कृति तथा जनसंपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग की प्रगति की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रमों तथा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी सहयोग पर भी विचार-विमर्श होगा।
राष्ट्रपति पार्मेलिन भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी मुलाकात करेंगे। राष्ट्रपति मुर्मु उनके सम्मान में एक आधिकारिक भोज का आयोजन करेंगी। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर भी राष्ट्रपति पार्मेलिन से अलग से मुलाकात करेंगे। उनके साथ वरिष्ठ अधिकारियों और कारोबारियों का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आएगा।
इंडिया-ईएफटीए प्रॉस्पेरिटी समिट
इस दौरे का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि राष्ट्रपति पार्मेलिन 7 अक्टूबर 2026 को दूसरे इंडिया-ईएफटीए प्रॉस्पेरिटी समिट में हिस्सा लेंगे। यह समिट भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के लागू होने की पहली सालगिरह के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। गौरतलब है कि ईएफटीए देशों में स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापार एवं निवेश साझेदार है।
भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों का महत्व
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और स्विट्जरलैंड के बीच दीर्घकालिक और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत अपनी वैश्विक आर्थिक साझेदारियों को विस्तार देने पर जोर दे रहा है। राष्ट्रपति पार्मेलिन की इस यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों को नई गति मिलने और परस्पर हित के नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की अपेक्षा है। आगे दोनों देशों के बीच नियमित उच्च स्तरीय संवाद की यह परंपरा और सुदृढ़ होने की उम्मीद है।