भारत-स्विट्जरलैंड शिखर वार्ता: इनोवेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी साझेदारी के तीन स्तंभ — PM मोदी
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय परमेलिन के बीच 5 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई। बैठक के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि इनोवेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी दोनों देशों की साझेदारी के मजबूत स्तंभ हैं। राष्ट्रपति परमेलिन भारत की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर हैं।
ऐतिहासिक व्यापार समझौते का संदर्भ
मोदी ने परमेलिन का स्वागत करते हुए भारत-यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) समझौते का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'सबसे पहले मैं भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना करता हूँ। पिछले वर्ष उनके समर्थन से हमने भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) देशों के बीच एक ऐतिहासिक ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट लागू किया।' प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह यूरोप के किसी भी आर्थिक समूह के साथ भारत का पहला मुक्त व्यापार समझौता है।
गौरतलब है कि EFTA में स्विट्जरलैंड के अतिरिक्त नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन भी शामिल हैं, जिससे यह समझौता भारत के लिए यूरोपीय बाज़ार में प्रवेश का एक महत्वपूर्ण द्वार बनता है।
रक्षा और परमाणु ऊर्जा में सहयोग
मोदी ने बैठक में हुई रक्षा और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र की चर्चाओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'आज हमने मिलिट्री एक्सचेंज और डिफेंस प्रोडक्शन व सहयोग की नई संभावनाओं की पहचान की। न्यूक्लियर एनर्जी में सहयोग को और प्रगाढ़ करने पर भी सहमति बनी है।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने और स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कई देशों के साथ परमाणु साझेदारी का विस्तार कर रहा है।
निर्यात और निवेश को बढ़ावा
दोनों नेताओं की मौजूदगी में भारत और स्विस परिसंघ के बीच एमओयू का आदान-प्रदान हुआ। मोदी ने कहा कि भारतीय निर्यात के लिए स्विट्जरलैंड में बाज़ार पहुँच बढ़ाने और निवेश को सुगम बनाने हेतु कई अहम निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा, 'इससे भारत के एग्रीकल्चर, फार्मा, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग गुड्स का स्विट्जरलैंड में निर्यात बढ़ेगा।'
इसके साथ ही मोदी ने कहा कि बायोटेक, लाइफ साइंसेज, बैंकिंग, इंश्योरेंस, फूड प्रोसेसिंग और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में नए स्विस निवेश को आकर्षित करने पर ध्यान दिया जाएगा। यह भारत की 'मेक इन इंडिया' और उच्च-मूल्य सेवा क्षेत्र के विकास की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
सदियों पुरानी मित्रता का उल्लेख
प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि 19वीं सदी में स्वामी विवेकानंद ने स्विट्जरलैंड में हिमालय की झलक देखी थी, और महात्मा गांधी ने भी वहाँ समय बिताया और वहाँ के लोगों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि इन ऐतिहासिक यात्राओं की स्मृतियाँ आज भी दोनों देशों की मित्रता में गूँजती हैं।
आगे की राह
राष्ट्रपति परमेलिन की यह राजकीय यात्रा भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को व्यापार, रक्षा और प्रौद्योगिकी के मोर्चों पर नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। एमओयू और नीतिगत सहमतियों के क्रियान्वयन पर दोनों देशों की नज़र रहेगी, और यह देखना होगा कि निर्यात व निवेश के वादे किस गति से ज़मीन पर उतरते हैं।