5 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत-स्विट्जरलैंड के बीच 5 ऐतिहासिक समझौते, माइग्रेशन से लेकर स्टार्टअप तक नई साझेदारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत-स्विट्जरलैंड के बीच 5 ऐतिहासिक समझौते, माइग्रेशन से लेकर स्टार्टअप तक नई साझेदारी

सारांश

स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन की भारत यात्रा महज़ शिष्टाचार भेंट नहीं थी — इसने दोनों देशों के रिश्तों को व्यापार से आगे ले जाने की ठोस नींव रखी। माइग्रेशन, 300 युवा पेशेवरों के सालाना आदान-प्रदान, परिवहन तकनीक, विज्ञान और स्टार्टअप — पाँच मोर्चों पर हुई यह साझेदारी भारत-स्विस संबंधों का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन की 5 से 7 अक्टूबर 2026 की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच 5 प्रमुख समझौते हुए।
माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप (MMP) के तहत 5 वर्ष के मल्टीपल-एंट्री वीज़ा और छात्रों के लिए 1 वर्ष के नवीकरणीय परमिट का प्रावधान।
यंग प्रोफेशनल्स स्कीम (YPS) के अंतर्गत प्रत्येक देश से हर साल 300 युवा दूसरे देश में काम कर सकेंगे, संख्या 500 तक बढ़ाई जा सकती है।
सड़क परिवहन मंत्रालय और स्विस संस्था के बीच EV, रोपवे और सुरंग तकनीक पर सहयोग समझौता।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन के बीच संयुक्त अनुसंधान के लिए लेटर ऑफ इंटेंट।
ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के साथ स्टार्टअप और इनोवेशन सहयोग के लिए AIT India कार्यक्रम आगे बढ़ेगा।

स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन की 5 से 7 अक्टूबर 2026 तक की भारत यात्रा के दौरान भारत और स्विट्जरलैंड ने पाँच महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति जताई, जो माइग्रेशन, युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान, परिवहन तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और स्टार्टअप सहयोग जैसे विविध क्षेत्रों को समेटते हैं। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति परमेलिन के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद विदेश मंत्रालय (MEA) ने आधिकारिक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की। यह साझेदारी दोनों देशों के पारंपरिक व्यापारिक संबंधों को एक व्यापक और बहुआयामी रूप देने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप: सुरक्षित आवाजाही का ढाँचा

दोनों देशों के बीच हुए सबसे महत्वपूर्ण समझौतों में माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप (MMP) शामिल है। इस समझौते का लक्ष्य दोनों देशों के बीच सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से लोगों की आवाजाही को प्रोत्साहित करना तथा अनियमित प्रवासन, मानव शोषण और मानव तस्करी को रोकना है।

समझौते के तहत पाँच वर्ष तक की अवधि के लिए मल्टीपल-एंट्री वीज़ा की सुविधा दी जाएगी, जिसमें प्रत्येक यात्रा में छह महीने तक रहने की अनुमति होगी। इसके अलावा छात्रों के लिए एक वर्ष की नवीकरणीय परमिट व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

यंग प्रोफेशनल्स स्कीम: हर साल 300 युवाओं का आदान-प्रदान

दोनों देशों ने यंग प्रोफेशनल्स स्कीम (YPS) पर भी सहमति जताई है। इस योजना के तहत प्रत्येक देश से हर साल 300 युवा पेशेवर दूसरे देश में सीमित अवधि के लिए कार्य कर सकेंगे। आवश्यकता और आपसी सहमति के आधार पर यह संख्या 500 तक बढ़ाई जा सकती है।

इस योजना का उद्देश्य युवाओं को अपने पेशेवर क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव हासिल करने के साथ-साथ भाषाई और सांस्कृतिक कौशल विकसित करने का अवसर देना है। राष्ट्रीयता और निवास की स्थिति के सत्यापन के लिए 30 से 90 दिनों की समयसीमा निर्धारित की गई है।

परिवहन तकनीक और टिकाऊ बुनियादी ढाँचा

परिवहन क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और स्विट्जरलैंड के फेडरल डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स, एजुकेशन एंड रिसर्च के बीच एक समझौते पर सहमति बनी है। इसके तहत इलेक्ट्रिक वाहनों, रोपवे, सर्कुलर इकोनॉमी, सुरंगों और परिवहन के अन्य क्षेत्रों में नई तकनीकों के विकास पर मिलकर काम किया जाएगा।

गौरतलब है कि स्विट्जरलैंड सुरंग और पर्वतीय परिवहन तकनीक में विश्व में अग्रणी माना जाता है, और यह साझेदारी भारत की पहाड़ी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी योजनाओं के लिए विशेष महत्व रखती है।

वैज्ञानिक अनुसंधान और स्टार्टअप: दीर्घकालिक नींव

वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन के बीच लेटर ऑफ इंटेंट पर सहमति बनी है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के शोधकर्ताओं के बीच संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएँ विकसित करना और साझा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में दीर्घकालिक ढाँचा तैयार करना है।

स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच इनोवेशन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और एंटरप्रेन्योरशिप पर एक इम्प्लीमेंटेशन अरेंजमेंट तय हुआ है। इसके तहत इंडो-स्विस एकेडमिया-इंडस्ट्री ट्रेनिंग (AIT India) कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाएगा, जिसमें संयुक्त कार्यशालाएँ, क्षमता निर्माण और नेटवर्किंग शामिल होगी।

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के देशों में स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापार और निवेश साझेदार है। दोनों देशों ने एक नए फ्लैगशिप अनुसंधान सहयोग कार्यक्रम की शुरुआत का भी ऐलान किया है, जिसका उद्घाटन सत्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया जाएगा।

विश्लेषकों के अनुसार ये समझौते संकेत देते हैं कि भारत-स्विट्जरलैंड संबंध अब पारंपरिक व्यापारिक सीमाओं से आगे बढ़कर लोगों, तकनीक, अनुसंधान और नवाचार को जोड़ने वाली व्यापक रणनीतिक साझेदारी का रूप ले रहे हैं। आने वाले महीनों में इन समझौतों के क्रियान्वयन की रूपरेखा तय होने पर दोनों देशों के युवाओं और उद्योग जगत को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन है — भारत के द्विपक्षीय समझौतों का इतिहास बताता है कि लेटर ऑफ इंटेंट और इम्प्लीमेंटेशन अरेंजमेंट अक्सर वर्षों तक कागज़ पर ही रहते हैं। यंग प्रोफेशनल्स स्कीम की 300 सीटें उत्साहजनक हैं, पर वीज़ा प्रक्रिया की व्यावहारिक जटिलताएँ अक्सर ऐसी योजनाओं की रफ्तार थाम देती हैं। माइग्रेशन पार्टनरशिप में अनियमित प्रवासन रोकने का प्रावधान स्वागत योग्य है, किंतु सत्यापन की 30 से 90 दिन की समयसीमा बताती है कि ज़मीनी तंत्र अभी बनना बाकी है। EFTA देशों के साथ भारत का व्यापार-निवेश ढाँचा पहले से मज़बूत है — अब देखना यह होगा कि ये लोक-केंद्रित और तकनीक-केंद्रित समझौते उस आर्थिक आधार को वास्तविक जन-स्तरीय लाभ में तब्दील कर पाते हैं या नहीं।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और स्विट्जरलैंड के बीच कौन-कौन से 5 समझौते हुए हैं?
5 अक्टूबर 2026 को स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन की भारत यात्रा के दौरान पाँच प्रमुख समझौते हुए: माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप (MMP), यंग प्रोफेशनल्स स्कीम (YPS), परिवहन तकनीक सहयोग, वैज्ञानिक अनुसंधान हेतु लेटर ऑफ इंटेंट, और स्टार्टअप-इनोवेशन के लिए इम्प्लीमेंटेशन अरेंजमेंट।
माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप (MMP) से भारतीय नागरिकों को क्या फायदा होगा?
इस समझौते के तहत भारतीय नागरिकों को स्विट्जरलैंड के लिए पाँच साल तक के मल्टीपल-एंट्री वीज़ा मिल सकेंगे, जिसमें प्रत्येक यात्रा में छह महीने रहने की अनुमति होगी। छात्रों के लिए एक वर्ष के नवीकरणीय परमिट का भी प्रावधान है।
यंग प्रोफेशनल्स स्कीम (YPS) क्या है और इसमें कितनी सीटें हैं?
यंग प्रोफेशनल्स स्कीम के तहत प्रत्येक देश से हर साल 300 युवा पेशेवर दूसरे देश में सीमित अवधि के लिए काम कर सकेंगे। ज़रूरत और आपसी सहमति के आधार पर यह संख्या 500 तक बढ़ाई जा सकती है। राष्ट्रीयता सत्यापन के लिए 30 से 90 दिनों की समयसीमा निर्धारित की गई है।
भारत-स्विट्जरलैंड के बीच परिवहन तकनीक समझौते में क्या शामिल है?
यह समझौता भारत के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और स्विट्जरलैंड के फेडरल डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स, एजुकेशन एंड रिसर्च के बीच हुआ है। इसके तहत इलेक्ट्रिक वाहनों, रोपवे, सुरंगों, सर्कुलर इकोनॉमी और परिवहन के अन्य क्षेत्रों में नई तकनीकों और टिकाऊ बुनियादी ढाँचे के विकास पर मिलकर काम किया जाएगा।
भारत-स्विट्जरलैंड के बीच स्टार्टअप और विज्ञान सहयोग कैसे आगे बढ़ेगा?
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन के बीच संयुक्त अनुसंधान के लिए लेटर ऑफ इंटेंट तय हुआ है। स्टार्टअप के लिए ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के साथ AIT India कार्यक्रम के तहत संयुक्त कार्यशालाएँ, क्षमता निर्माण और नेटवर्किंग की व्यवस्था होगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 3 घंटे पहले
  3. 3 घंटे पहले
  4. 6 घंटे पहले
  5. 7 घंटे पहले
  6. 4 दिन पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले