भारत-स्विट्जरलैंड के बीच 5 ऐतिहासिक समझौते, माइग्रेशन से लेकर स्टार्टअप तक नई साझेदारी
सारांश
मुख्य बातें
स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन की 5 से 7 अक्टूबर 2026 तक की भारत यात्रा के दौरान भारत और स्विट्जरलैंड ने पाँच महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति जताई, जो माइग्रेशन, युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान, परिवहन तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और स्टार्टअप सहयोग जैसे विविध क्षेत्रों को समेटते हैं। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति परमेलिन के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद विदेश मंत्रालय (MEA) ने आधिकारिक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की। यह साझेदारी दोनों देशों के पारंपरिक व्यापारिक संबंधों को एक व्यापक और बहुआयामी रूप देने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप: सुरक्षित आवाजाही का ढाँचा
दोनों देशों के बीच हुए सबसे महत्वपूर्ण समझौतों में माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप (MMP) शामिल है। इस समझौते का लक्ष्य दोनों देशों के बीच सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से लोगों की आवाजाही को प्रोत्साहित करना तथा अनियमित प्रवासन, मानव शोषण और मानव तस्करी को रोकना है।
समझौते के तहत पाँच वर्ष तक की अवधि के लिए मल्टीपल-एंट्री वीज़ा की सुविधा दी जाएगी, जिसमें प्रत्येक यात्रा में छह महीने तक रहने की अनुमति होगी। इसके अलावा छात्रों के लिए एक वर्ष की नवीकरणीय परमिट व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
यंग प्रोफेशनल्स स्कीम: हर साल 300 युवाओं का आदान-प्रदान
दोनों देशों ने यंग प्रोफेशनल्स स्कीम (YPS) पर भी सहमति जताई है। इस योजना के तहत प्रत्येक देश से हर साल 300 युवा पेशेवर दूसरे देश में सीमित अवधि के लिए कार्य कर सकेंगे। आवश्यकता और आपसी सहमति के आधार पर यह संख्या 500 तक बढ़ाई जा सकती है।
इस योजना का उद्देश्य युवाओं को अपने पेशेवर क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव हासिल करने के साथ-साथ भाषाई और सांस्कृतिक कौशल विकसित करने का अवसर देना है। राष्ट्रीयता और निवास की स्थिति के सत्यापन के लिए 30 से 90 दिनों की समयसीमा निर्धारित की गई है।
परिवहन तकनीक और टिकाऊ बुनियादी ढाँचा
परिवहन क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और स्विट्जरलैंड के फेडरल डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स, एजुकेशन एंड रिसर्च के बीच एक समझौते पर सहमति बनी है। इसके तहत इलेक्ट्रिक वाहनों, रोपवे, सर्कुलर इकोनॉमी, सुरंगों और परिवहन के अन्य क्षेत्रों में नई तकनीकों के विकास पर मिलकर काम किया जाएगा।
गौरतलब है कि स्विट्जरलैंड सुरंग और पर्वतीय परिवहन तकनीक में विश्व में अग्रणी माना जाता है, और यह साझेदारी भारत की पहाड़ी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी योजनाओं के लिए विशेष महत्व रखती है।
वैज्ञानिक अनुसंधान और स्टार्टअप: दीर्घकालिक नींव
वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन के बीच लेटर ऑफ इंटेंट पर सहमति बनी है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के शोधकर्ताओं के बीच संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएँ विकसित करना और साझा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में दीर्घकालिक ढाँचा तैयार करना है।
स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच इनोवेशन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और एंटरप्रेन्योरशिप पर एक इम्प्लीमेंटेशन अरेंजमेंट तय हुआ है। इसके तहत इंडो-स्विस एकेडमिया-इंडस्ट्री ट्रेनिंग (AIT India) कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाएगा, जिसमें संयुक्त कार्यशालाएँ, क्षमता निर्माण और नेटवर्किंग शामिल होगी।
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के देशों में स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापार और निवेश साझेदार है। दोनों देशों ने एक नए फ्लैगशिप अनुसंधान सहयोग कार्यक्रम की शुरुआत का भी ऐलान किया है, जिसका उद्घाटन सत्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया जाएगा।
विश्लेषकों के अनुसार ये समझौते संकेत देते हैं कि भारत-स्विट्जरलैंड संबंध अब पारंपरिक व्यापारिक सीमाओं से आगे बढ़कर लोगों, तकनीक, अनुसंधान और नवाचार को जोड़ने वाली व्यापक रणनीतिक साझेदारी का रूप ले रहे हैं। आने वाले महीनों में इन समझौतों के क्रियान्वयन की रूपरेखा तय होने पर दोनों देशों के युवाओं और उद्योग जगत को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।