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तमिलनाडु के 38 जिलों में सालाना पुस्तक मेले, सरकार ने ₹8.45 करोड़ जारी किए

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तमिलनाडु के 38 जिलों में सालाना पुस्तक मेले, सरकार ने ₹8.45 करोड़ जारी किए

सारांश

तमिलनाडु ने 2022-23 में शुरू की गई जिला पुस्तक मेला पहल को अब स्थायी वार्षिक ढाँचे में बदल दिया है — ₹8.45 करोड़ के साथ सभी 38 जिलों में हर साल मेले होंगे। यह शहरी केंद्रों से परे पाठकों और प्रकाशकों दोनों के लिए एक बड़ा विस्तार है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु सरकार ने 2026-27 से सभी 38 जिलों में वार्षिक पुस्तक मेलों के लिए ₹8.45 करोड़ स्वीकृत किए।
स्कूल शिक्षा विभाग ने 9 अक्टूबर 2026 के सरकारी आदेश से इस व्यय को मंजूरी दी।
नई राशि, 2022-23 में मंजूर ₹4.965 करोड़ से ₹3.485 करोड़ अधिक है।
जिलों को ए ( ₹17.5 लाख ), बी ( ₹14 लाख ) और सी ( ₹12 लाख ) श्रेणियों में बाँटकर अनुदान दिया जाता है।
पहल 2022-23 से चल रही है और 2023-24 व 2024-25 में भी जारी रही; अब इसे स्थायी वार्षिक ढाँचा दिया गया।

तमिलनाडु सरकार ने 2026-27 से राज्य के सभी 38 जिलों में हर वर्ष पुस्तक मेले आयोजित करने की स्थायी व्यवस्था की है और इसके लिए ₹8.45 करोड़ की राशि स्वीकृत की है। स्कूल शिक्षा विभाग ने 9 अक्टूबर 2026 के सरकारी आदेश के माध्यम से इस व्यय को मंजूरी दी, जो 2026-27 के संशोधित अनुमानों से ली जाएगी।

मुख्य घटनाक्रम

यह राशि 2022-23 में इसी पहल के शुभारंभ के समय स्वीकृत ₹4.965 करोड़ से ₹3.485 करोड़ अधिक है। तब जिलों को तीन श्रेणियों में बाँटकर अलग-अलग अनुदान दिया जाता था — ए-श्रेणी के जिलों को ₹17.5 लाख, बी-श्रेणी को ₹14 लाख और सी-श्रेणी को ₹12 लाख प्रति मेला।

ताज़ा आदेश इस श्रेणीबद्ध ढाँचे को आगे बढ़ाते हुए उसे वार्षिक और राज्यव्यापी रूप देता है, जिससे पहल अब परियोजना-आधारित नहीं, बल्कि संस्थागत बन जाती है।

पहल की पृष्ठभूमि

तमिलनाडु ने जिला पुस्तक मेला कार्यक्रम 2022-23 में शुरू किया था और 2023-24 तथा 2024-25 में भी अतिरिक्त वित्तपोषण के ज़रिये इसे जारी रखा गया। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य डिजिटल माध्यमों के बढ़ते चलन के बीच मुद्रित पुस्तकों की संस्कृति को संरक्षित करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। गौरतलब है कि तमिलनाडु का पुस्तक प्रकाशन उद्योग देश के सबसे सक्रिय क्षेत्रीय प्रकाशन केंद्रों में गिना जाता है।

आम जनता पर असर

अब तक बड़े शहरी केंद्रों — मुख्यतः चेन्नई — में केंद्रित पुस्तक मेले अब सुदूर जिलों तक पहुँचेंगे। इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी पाठकों, विशेष रूप से छात्रों को, अपने समुदाय के नज़दीक पुस्तकें देखने और खरीदने का अवसर मिलेगा। प्रकाशकों को भी महानगरीय बाज़ारों से परे अपने पाठकों तक सीधे पहुँचने का मंच मिलेगा।

राज्य के 38 जिलों में एक साथ आयोजित इन मेलों से साहित्यिक गतिविधियों की भौगोलिक पहुँच उल्लेखनीय रूप से विस्तृत होगी।

वित्तीय ढाँचा

₹8.45 करोड़ की यह स्वीकृति 2026-27 के संशोधित बजट से ली जाएगी। वार्षिक आधार पर बजट प्रावधान किए जाने से यह पहल अब नीतिगत निरंतरता की श्रेणी में आ जाती है, जहाँ हर वर्ष नए सिरे से स्वीकृति लेने की ज़रूरत नहीं होगी।

क्या होगा आगे

सरकारी आदेश के अनुसार, मेले चालू वित्त वर्ष 2026-27 में ही आयोजित किए जाएँगे। स्थायी वार्षिक ढाँचे से जिला-स्तरीय साहित्यिक कार्यक्रमों को नियमितता मिलेगी और भविष्य में बजट नियोजन भी सुव्यवस्थित होगा। इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोजन की गुणवत्ता और पाठकों की भागीदारी कितनी प्रभावी रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ताकि खर्च और प्रभाव के बीच संबंध स्थापित हो सके। ₹8.45 करोड़ की यह राशि 38 जिलों में बंटने पर प्रति जिला औसतन ₹22 लाख से कुछ अधिक बनती है, जो बड़े आयोजनों के लिए सीमित हो सकती है। यदि भागीदारी डेटा और पाठक-संख्या पारदर्शी तरीके से सामने आए, तभी यह पहल अपने घोषित उद्देश्य — पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा — की कसौटी पर खरी उतरेगी।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में 38 जिलों के पुस्तक मेलों के लिए कितनी राशि मंजूर की गई है?
तमिलनाडु सरकार ने 2026-27 से सभी 38 जिलों में वार्षिक पुस्तक मेले आयोजित करने के लिए ₹8.45 करोड़ स्वीकृत किए हैं। यह राशि 9 अक्टूबर 2026 के स्कूल शिक्षा विभाग के सरकारी आदेश के माध्यम से जारी की गई है।
तमिलनाडु की जिला पुस्तक मेला पहल कब शुरू हुई थी?
यह पहल 2022-23 में शुरू हुई थी, जब राज्य सरकार ने ₹4.965 करोड़ मंजूर करके जिला-स्तरीय मेले आयोजित किए थे। इसके बाद 2023-24 और 2024-25 में भी अतिरिक्त वित्तपोषण से यह कार्यक्रम जारी रहा।
जिलों को पुस्तक मेले के लिए कितना अनुदान मिलता है?
जिलों को तीन श्रेणियों के आधार पर अनुदान मिलता है — ए-श्रेणी को ₹17.5 लाख, बी-श्रेणी को ₹14 लाख और सी-श्रेणी को ₹12 लाख प्रति मेला। यह व्यवस्था 2022-23 से चली आ रही है और ताज़ा आदेश में भी इसी ढाँचे को बनाए रखा गया है।
इन पुस्तक मेलों से आम लोगों को क्या फायदा होगा?
38 जिलों में मेले आयोजित होने से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के पाठक और छात्र अपने नजदीक पुस्तकें देख और खरीद सकेंगे। बड़े शहरी केंद्रों तक जाने में असमर्थ पाठकों को सीधे अपने जिले में यह अवसर मिलेगा, साथ ही प्रकाशकों को भी विस्तृत पाठक वर्ग तक पहुँचने का मंच मिलेगा।
नई राशि पहले की तुलना में कितनी अधिक है?
नई स्वीकृत राशि ₹8.45 करोड़, पहल के शुभारंभ के समय 2022-23 में मंजूर ₹4.965 करोड़ से ₹3.485 करोड़ अधिक है। यह वृद्धि राज्य के सभी 38 जिलों में एक साथ मेले आयोजित करने की बढ़ी हुई आवश्यकता को दर्शाती है।
राष्ट्र प्रेस
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