तस्लीमा अख्तर: मिडिल ईस्ट युद्ध को तुरंत रोकना जरूरी, निर्दोषों की हत्या से कुछ हासिल नहीं होगा

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तस्लीमा अख्तर: मिडिल ईस्ट युद्ध को तुरंत रोकना जरूरी, निर्दोषों की हत्या से कुछ हासिल नहीं होगा

सारांश

तस्लीमा अख्तर, मानवाधिकार कार्यकर्ता, ने मिडिल ईस्ट युद्ध को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अमेरिका का असली चेहरा अब सामने आ गया है और निर्दोष लोगों की हत्याओं का कोई लाभ नहीं है। युद्ध को रोकना आवश्यक है ताकि हम तीसरे विश्व युद्ध की ओर न बढ़ें।

मुख्य बातें

तस्लीमा अख्तर ने मिडिल ईस्ट युद्ध की तीखी आलोचना की।
उन्होंने कहा कि युद्ध को रोकना आवश्यक है।
अमेरिका का असली चेहरा अब सामने आ गया है।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की स्थिति चिंताजनक है।
निर्दोष लोगों की हत्याएं मानवता के खिलाफ हैं।

श्रीनगर, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मानवाधिकार कार्यकर्ता और 'कश्मीर में आतंक पीड़ितों के संघ' की अध्यक्ष तस्लीमा अख्तर ने मिडिल ईस्ट युद्ध के संदर्भ में कहा कि अमेरिका का असली चेहरा अब सबके सामने आ गया है। निर्दोष लोगों की जान लेकर क्या प्राप्त होगा? इस युद्ध को तुरंत रोकना आवश्यक है, अन्यथा हम तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं। इस समय पूरी दुनिया को एकजुट होने की आवश्यकता है।

61वें यूएनएचआरसी सत्र में तस्लीमा अख्तर ने पाकिस्तानपहलगाम आतंकी हमले पर अपने विचार साझा किए।

श्रीनगर में राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि इस बार हमारा भाषण 2025 में पहलगाम में हुई उस घटना पर केंद्रित था, जिसमें निहत्थे लोगों की हत्या की गई थी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) भारतीय जम्मू-कश्मीर का एक हिस्सा है। हमने हमेशा इस विषय पर चर्चा की है और आगे भी करेंगे। यदि आप भारतीय जम्मू और कश्मीर तथा पीओके के बीच का अंतर देखेंगे, तो आप पाएंगे कि वहां आम लोगों के बुनियादी अधिकार पूरी तरह से नदारद हैं। बोलने की स्वतंत्रता नहीं है। वहां सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन करने का अधिकार नहीं है। यहाँ, यदि कोई प्रदर्शन करता है, तो सरकार उनकी बात सुनती है।

पाकिस्तान को निशाना बनाते हुए तस्लीमा ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा फैलाए जा रहे झूठे प्रचार को देखिए। उनकी आईएसआई बेबुनियाद है और पूरी दुनिया समझती है कि पाकिस्तान कैसे आतंकवाद को बढ़ावा देता है और कश्मीर में निर्दोषों की हत्याएं कराता है। जम्मू-कश्मीर की आवाज उठाना हमारा बुनियादी अधिकार है। 1947 से अब तक जो कुछ भी हुआ है, हमने उसके बारे में बात की है। हमने पहलगाम हमले में 26 निर्दोष लोगों की हत्याओं पर भी चर्चा की। हमने पाकिस्तान और पीओके में लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों के मुद्दों पर भी बात की है।

तस्लीमा ने कहा कि हम हमेशा कहते आए हैं कि दुनिया भर के देशों ने धर्म, विशेष रूप से इस्लाम के नाम पर, गलत तरीके से दुरुपयोग किया है। कुछ स्थानों पर मानवता का नाश किया जा रहा है। उदाहरण के लिए, अस्पतालों पर हमले किए गए और अफगानिस्तान में लगभग 400 निर्दोष लोगों की हत्या की गई।

मिडिल ईस्ट युद्ध के संदर्भ में उन्होंने कहा कि इस समय पूरी दुनिया को एकजुट होने की आवश्यकता है। अब दुनिया को असलियत का पता चल गया है। अमेरिका खुद को एक 'महाशक्ति' के रूप में प्रस्तुत करता था, लेकिन उसका असली चेहरा अब सबके सामने है। मेरा मानना है कि युद्ध कोई समाधान नहीं है। ऐसा लगता है कि हालात तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं। इस युद्ध को रोकना चाहिए, ताकि निर्दोष लोगों की जानें न जाएं। मुझे समझ नहीं आता कि आप क्या हासिल करना चाहते हैं। क्या यह मानवता है?

तस्लीमा ने कहा कि सबसे पहले इससे कई देशों पर असर पड़ेगा। अगर आप देखें, तो पूरा मध्य-पूर्व इस समय अशांत है। अमेरिका ने ईरान के प्रति बहुत ही गलत नीति अपनाई है। वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति का जिस तरह से अपहरण किया गया, वह भी गलत था। ईरान ने सवाल किया कि अगर अमेरिका को युद्ध लड़ने का शौक है, तो उसने मुस्लिम देशों की एयरबेस क्यों ली?

भारत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां का तंत्र बहुत सुचारू तरीके से चल रहा है। यहां की राजनीति प्रभावी तरीके से काम कर रही है। हर कोई अपनी जिम्मेदारियों का पालन कर रहा है। सेना अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही है और सामाजिक कार्यकर्ता अपना योगदान दे रहे हैं। कोई किसी के कार्य में हस्तक्षेप नहीं कर रहा है। मेरा मानना है कि यह एक अच्छी स्थिति है, जबकि पाकिस्तान में अगर कोई मौलिक अधिकारों की बात करता है तो उसे जेल में डाल दिया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तस्लीमा अख्तर ने मिडिल ईस्ट युद्ध पर क्या कहा?
तस्लीमा अख्तर ने कहा कि युद्ध को तुरंत रोकना चाहिए और निर्दोषों की हत्याओं का कोई लाभ नहीं है।
क्या तस्लीमा अख्तर ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का जिक्र किया?
हाँ, उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और वहाँ के बुनियादी अधिकारों की कमी पर बात की।
तस्लीमा अख्तर का मानना है कि युद्ध का क्या समाधान है?
उनका मानना है कि युद्ध कोई समाधान नहीं है और इससे केवल निर्दोष लोगों की हत्याएं होंगी।
राष्ट्र प्रेस