तेजस्वी यादव ने मंगल पांडेय पर कसा तंज, बिहार का स्वास्थ्य विभाग 'अमंगल दोष' से ग्रसित
सारांश
Key Takeaways
- तेजस्वी यादव का स्वास्थ्य विभाग पर कड़ा हमला
- 'अमंगल दोष' से प्रभावित स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति
- बिना डॉक्टर और दवा के अस्पतालों की स्थिति
- सरकार की भ्रष्टाचार पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता
- महागठबंधन के सकारात्मक कार्यों को दरकिनार करना
पटना, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने बुधवार को राज्य के स्वास्थ्य विभाग पर कड़ा हमला बोलते हुए स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि 'अमंगल दोष' से प्रभावित बिहार का स्वास्थ्य विभाग एक नरक में तब्दील हो चुका है।
राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने एक बयान में कहा कि बिहार के अस्पतालों में कहीं डॉक्टर नहीं हैं, कहीं रूई नहीं है- अगर रूई है तो सुई नहीं है, कहीं दवा नहीं है, कहीं बेड नहीं हैं और अब तो हालत यह है कि अस्पताल में मरीज के लिए व्हील चेयर भी उपलब्ध नहीं है। मजबूरी में मरीज को कभी साइकिल, कभी चारपाई, कभी स्कूटर पर ले जाना पड़ता है।
उन्होंने आगे कहा, "अमंगल सरकार में पूरे बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था बिगड़इलाज की व्यवस्था नहीं है, तो इसे अस्पताल कहा ही क्यों जाए?"
उन्होंने स्पष्ट रूप से सवाल उठाया कि केवल ईंट-गारे का ढांचा खड़ा कर उसे मेडिकल कॉलेज और अस्पताल कह देने से स्वास्थ्य सेवा, सुविधा और व्यवस्था मजबूत नहीं होती। ये भवन इसलिए बनते हैं ताकि इसमें मोटा कमिशन खा सकें, अन्यथा बिना चिकित्सकों, नर्सों, ड्रेसर, लैब टेक्निशियन आदि की भर्ती के, अस्पतालों के ये भवन कबूतर के घर ही रहेंगे।
तेजस्वी ने कहा कि एनडीए सरकार को शायद गरीबों का यह दर्द दिखाई नहीं देता, क्योंकि इन्हें केवल कुर्सी से मतलब है, भ्रष्टाचार से मतलब है, बिहार से नहीं। बिहार के सरकारी अस्पताल अब मरीजों के लिए रेफरल प्वाइंट बन गए हैं, जहां से मरीजों को निजी अस्पतालों में भेज दिया जाता है।
महागठबंधन की सरकार का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जब हम स्वास्थ्य मंत्री थे, तब हमने 17 महीनों में स्वास्थ्य विभाग में जो सकारात्मक काम किए थे, उन सभी को इन भ्रष्ट लोगों ने नजरअंदाज कर फिर से दलालों और मेडिकल माफियाओं को बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था सौंप दिया है।