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निजामाबाद: पुलिस थाने में खुद को आग लगाने वाले होटल व्यापारी पोलासा सुधाकर की मौत, परिवार ने लगाया उत्पीड़न का आरोप

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निजामाबाद: पुलिस थाने में खुद को आग लगाने वाले होटल व्यापारी पोलासा सुधाकर की मौत, परिवार ने लगाया उत्पीड़न का आरोप

सारांश

तेलंगाना के निजामाबाद में एक छोटे होटल मालिक की पुलिस थाने में खुद को आग लगाने के बाद मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि बार-बार की पुलिसिया कार्रवाई और उत्पीड़न ने उन्हें इस कदम पर मजबूर किया। पुलिस ने इनकार किया है। व्यापारी बंद और राजनीतिक हलचल ने मामले को गंभीर मोड़ दे दिया है।

मुख्य बातें

पोलासा सुधाकर (60) , निजामाबाद के भीमगल में होटल व्यापारी, ने सोमवार को पुलिस थाने के परिसर में खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगाई।
सुधाकर करीब 90 प्रतिशत जल गए थे; मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को निजी अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
परिवार का आरोप: होटल से जुड़े मामले में पुलिस ने तीन बार जुर्माना लगाया और बार-बार थाने बुलाया।
साई चैतन्य ने पुलिस उत्पीड़न के आरोपों से साफ इनकार किया।
बीआरएस नेता वेमुला प्रशांत रेड्डी को हैदराबाद में नजरबंद किया गया; भीमगल के व्यापारियों ने मंगलवार को बंद रखा।

तेलंगाना के निजामाबाद जिले में भीमगल पुलिस थाने के परिसर में कथित तौर पर खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगाने वाले होटल व्यापारी पोलासा सुधाकर (60) की मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। सुधाकर करीब 90 प्रतिशत जल गए थे और सोमवार से अस्पताल में भर्ती थे।

घटनाक्रम: कैसे हुई पूरी घटना

सुधाकर निजामाबाद के भीमगल बस स्टैंड पर एक छोटा होटल चलाते थे। परिवार के अनुसार, होटल से जुड़े एक मामले को लेकर पुलिस की बार-बार की कार्रवाई और कथित उत्पीड़न से तंग आकर उन्होंने सोमवार को भीमगल पुलिस थाने के परिसर में खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तत्काल आग बुझाई और सुधाकर को अस्पताल पहुँचाया, लेकिन मंगलवार सुबह उनकी मौत हो गई।

होटल पर दर्ज था मामूली मामला, सुधाकर ने उठाए सवाल

बताया गया है कि सुधाकर के होटल पर देर रात तक संचालन और रात 10 बजे के बाद प्रतिष्ठान के बाहर टेबल लगाने को लेकर एक मामूली मामला दर्ज किया गया था। कथित तौर पर सुधाकर ने पुलिस से यह सवाल उठाया था कि जब अन्य प्रतिष्ठान भी देर रात तक खुले रहते हैं, तो केवल उनके खिलाफ ही कार्रवाई क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा था कि इसी छोटे होटल से उनका पूरा परिवार चलता है।

सुधाकर को कथित तौर पर तीन बार जुर्माना लगाया गया था और पुलिस ने उन्हें थाने बुलाकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने और जुर्माना भरने के लिए अदालत में पेश होने को कहा था।

पुलिस का पक्ष और वैकल्पिक आरोप

निजामाबाद के पुलिस आयुक्त पी. साई चैतन्य ने पुलिस उत्पीड़न के कारण सुधाकर की मौत होने के आरोपों से स्पष्ट इनकार किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस की कोई गलती नहीं थी। पुलिस ने एक अलग पहलू सामने रखते हुए बताया कि सुधाकर की चाय की दुकान के सामने स्थित एक किराना दुकान का मालिक कथित तौर पर इस बात से नाराज था कि सुधाकर उससे सिगरेट नहीं खरीदते थे। आरोप है कि उस किराना दुकानदार ने सुधाकर को धमकाने के लिए दो लोगों को भेजा था।

परिवार और व्यापारियों का विरोध-प्रदर्शन

सुधाकर की मौत की खबर फैलते ही उनके परिजन और रिश्तेदार भीमगल पुलिस थाने के बाहर जमा हो गए और न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। परिवार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कराने और किसी भी अनियमितता के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इसके अलावा, भीमगल के कारोबारियों ने भी विरोधस्वरूप मंगलवार को बंद रखा।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के नेता और पूर्व मंत्री वेमुला प्रशांत रेड्डी को हैदराबाद में उस समय नजरबंद कर दिया गया जब वह सुधाकर के परिवार से मिलने के लिए निजामाबाद रवाना होने की तैयारी में थे। प्रशांत रेड्डी ने सुधाकर की मौत के लिए पुलिस के कथित उत्पीड़न को जिम्मेदार ठहराया। यह घटना ऐसे समय में आई है जब तेलंगाना में पुलिस-नागरिक संबंधों को लेकर पहले से ही बहस चल रही है। अब जाँच का दायरा और दिशा तय करना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जवाबदेही तंत्र अक्सर कमज़ोर साबित हुआ है। बीआरएस नेता की नजरबंदी यह भी संकेत देती है कि सरकार इसे राजनीतिक रंग देने से बचना चाहती है — जो खुद एक जवाबदेही का सवाल खड़ा करता है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पोलासा सुधाकर कौन थे और उन्होंने खुद को आग क्यों लगाई?
पोलासा सुधाकर (60) तेलंगाना के निजामाबाद जिले के भीमगल बस स्टैंड पर एक छोटा होटल चलाते थे। परिवार का आरोप है कि होटल संचालन से जुड़े एक मामले में पुलिस की बार-बार की कार्रवाई और कथित उत्पीड़न से तंग आकर उन्होंने सोमवार को भीमगल पुलिस थाने के परिसर में खुद को आग लगा ली।
पुलिस ने सुधाकर पर क्या कार्रवाई की थी?
पुलिस के अनुसार, सुधाकर के होटल पर देर रात तक संचालन और रात 10 बजे के बाद बाहर टेबल लगाने को लेकर मामूली मामला दर्ज किया गया था। कथित तौर पर उन पर तीन बार जुर्माना लगाया गया और थाने बुलाकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने तथा अदालत में पेश होने को कहा गया था।
निजामाबाद पुलिस का इस मामले में क्या कहना है?
निजामाबाद के पुलिस आयुक्त पी. साई चैतन्य ने पुलिस उत्पीड़न के कारण सुधाकर की मौत के आरोपों से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस की कोई गलती नहीं थी। पुलिस ने यह भी बताया कि सुधाकर को एक किराना दुकानदार ने कथित रूप से धमकाने के लिए दो लोगों को भेजा था।
इस घटना के बाद क्या राजनीतिक हलचल हुई?
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के नेता और पूर्व मंत्री वेमुला प्रशांत रेड्डी को हैदराबाद में उस समय नजरबंद कर दिया गया जब वह सुधाकर के परिवार से मिलने के लिए निजामाबाद रवाना होने की तैयारी में थे। उन्होंने सुधाकर की मौत के लिए पुलिस के कथित उत्पीड़न को जिम्मेदार ठहराया।
भीमगल में कारोबारियों ने क्या कदम उठाया?
सुधाकर की मौत के विरोध में भीमगल के कारोबारियों ने मंगलवार को बंद रखा। व्यापारियों ने घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। सुधाकर के परिजन और रिश्तेदार भी भीमगल पुलिस थाने के बाहर एकत्र होकर न्याय की माँग करते रहे।
राष्ट्र प्रेस
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