मां ज्वालामुखी मंदिर में आत्मदाह: झालावाड़ के रामदास की उपचार के दौरान मौत
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित शक्तिपीठ मां ज्वालामुखी मंदिर में गुरुवार, 18 सितंबर 2026 की शाम एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब राजस्थान के झालावाड़ निवासी 40 वर्षीय रामदास ने कथित तौर पर खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। गंभीर रूप से झुलसे रामदास को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
घटनाक्रम: कैसे हुई यह दर्दनाक वारदात
पुलिस के अनुसार, रामदास ने शाम करीब 7 बजे मंदिर के गर्भगृह के बाहर स्वयं पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। इससे उनके शरीर का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा जल गया। मौके पर उपस्थित मंदिर कर्मचारियों और श्रद्धालुओं ने तत्काल पानी डालकर आग बुझाई।
रामदास को पहले ज्वालामुखी अस्पताल ले जाया गया और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बाद में टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया, जहाँ उनकी मृत्यु हो गई। 108 एम्बुलेंस कर्मचारियों के अनुसार, रामदास अस्पताल ले जाते समय रास्ते में होश में थे और उन्होंने अपनी पहचान खुद बताई। उन्होंने यह भी कहा कि वे अकेले पूजा करने आए थे, हालाँकि साफ बोलने में उन्हें कठिनाई हो रही थी।
पुलिस जाँच और फोरेंसिक टीम की कार्रवाई
देहरा के पुलिस अधीक्षक संदीप धवल ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मंदिर पहुँची और जाँच शुरू कर दी। फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल का दौरा किया और साक्ष्य एकत्र किए। पुलिस घटना के सभी पहलुओं की जाँच कर रही है, जिसमें रामदास के इस कदम के पीछे की परिस्थितियाँ और संभावित कारण शामिल हैं।
पारिवारिक पृष्ठभूमि: 15 महीने से लापता थे रामदास
रामदास के चाचा प्रह्लाद चंदेल ने बताया कि रामदास करीब 15 महीने पहले एक पारिवारिक विवाद के बाद घर छोड़कर चले गए थे। परिवार ने उन्हें अनेक स्थानों पर ढूंढने का प्रयास किया, किंतु उनका पता नहीं चल सका। उनके मोबाइल फोन पर संपर्क करने की कोशिशें भी विफल रहीं।
रामदास के पिता गजानंद का निधन करीब 10 वर्ष पहले हो चुका था। रामदास पहले कबाड़ का व्यापार करते थे और बाद में झालावाड़ की जेल रोड पर कपड़ों की दुकान चलाते थे। उनकी पत्नी सलोनी झालावाड़ नगर परिषद में सफाई कर्मचारी हैं। दंपति का 12 वर्षीय पुत्र रुद्र है, जबकि उनकी एक पुत्री का पहले ही निधन हो चुका था।
परिवार को सूचना, हिमाचल रवाना हुए स्वजन
कोतवाली पुलिस ने गुरुवार रात परिवार के सदस्यों को इस दुखद घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही परिजन हिमाचल प्रदेश के लिए रवाना हो गए। गौरतलब है कि रामदास अकेले तीर्थयात्रा पर आए थे, जो इस त्रासदी को और भी मर्मांतक बनाती है।
पुलिस फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रामदास ने यह कदम क्यों उठाया और पिछले 15 महीनों में वे कहाँ रहे। जाँच जारी है।