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मां ज्वालामुखी मंदिर में आत्मदाह: झालावाड़ के रामदास की उपचार के दौरान मौत

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मां ज्वालामुखी मंदिर में आत्मदाह: झालावाड़ के रामदास की उपचार के दौरान मौत

सारांश

राजस्थान के झालावाड़ के रामदास 15 महीने से परिवार से बिछड़े थे — और अकेले मां ज्वालामुखी मंदिर पहुँचे। गुरुवार शाम उन्होंने गर्भगृह के बाहर खुद पर पेट्रोल डाला; 70% जलने के बाद उनकी मृत्यु हो गई। पुलिस और फोरेंसिक टीम जाँच में जुटी हैं।

मुख्य बातें

रामदास (40 वर्ष) , राजस्थान के झालावाड़ निवासी, ने 18 सितंबर 2026 की शाम मां ज्वालामुखी मंदिर , कांगड़ा में कथित तौर पर खुद को आग लगाई।
घटना शाम करीब 7 बजे मंदिर के गर्भगृह के बाहर हुई; शरीर का 70 प्रतिशत हिस्सा जला।
टांडा मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान रामदास की मृत्यु हुई।
देहरा एसपी संदीप धवल के नेतृत्व में पुलिस और फोरेंसिक टीम घटना की जाँच कर रही है।
रामदास करीब 15 महीने पहले पारिवारिक विवाद के बाद घर छोड़ चुके थे; उनकी पत्नी सलोनी और 12 वर्षीय पुत्र रुद्र झालावाड़ में हैं।

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित शक्तिपीठ मां ज्वालामुखी मंदिर में गुरुवार, 18 सितंबर 2026 की शाम एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब राजस्थान के झालावाड़ निवासी 40 वर्षीय रामदास ने कथित तौर पर खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। गंभीर रूप से झुलसे रामदास को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

घटनाक्रम: कैसे हुई यह दर्दनाक वारदात

पुलिस के अनुसार, रामदास ने शाम करीब 7 बजे मंदिर के गर्भगृह के बाहर स्वयं पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। इससे उनके शरीर का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा जल गया। मौके पर उपस्थित मंदिर कर्मचारियों और श्रद्धालुओं ने तत्काल पानी डालकर आग बुझाई।

रामदास को पहले ज्वालामुखी अस्पताल ले जाया गया और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बाद में टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया, जहाँ उनकी मृत्यु हो गई। 108 एम्बुलेंस कर्मचारियों के अनुसार, रामदास अस्पताल ले जाते समय रास्ते में होश में थे और उन्होंने अपनी पहचान खुद बताई। उन्होंने यह भी कहा कि वे अकेले पूजा करने आए थे, हालाँकि साफ बोलने में उन्हें कठिनाई हो रही थी।

पुलिस जाँच और फोरेंसिक टीम की कार्रवाई

देहरा के पुलिस अधीक्षक संदीप धवल ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मंदिर पहुँची और जाँच शुरू कर दी। फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल का दौरा किया और साक्ष्य एकत्र किए। पुलिस घटना के सभी पहलुओं की जाँच कर रही है, जिसमें रामदास के इस कदम के पीछे की परिस्थितियाँ और संभावित कारण शामिल हैं।

पारिवारिक पृष्ठभूमि: 15 महीने से लापता थे रामदास

रामदास के चाचा प्रह्लाद चंदेल ने बताया कि रामदास करीब 15 महीने पहले एक पारिवारिक विवाद के बाद घर छोड़कर चले गए थे। परिवार ने उन्हें अनेक स्थानों पर ढूंढने का प्रयास किया, किंतु उनका पता नहीं चल सका। उनके मोबाइल फोन पर संपर्क करने की कोशिशें भी विफल रहीं।

रामदास के पिता गजानंद का निधन करीब 10 वर्ष पहले हो चुका था। रामदास पहले कबाड़ का व्यापार करते थे और बाद में झालावाड़ की जेल रोड पर कपड़ों की दुकान चलाते थे। उनकी पत्नी सलोनी झालावाड़ नगर परिषद में सफाई कर्मचारी हैं। दंपति का 12 वर्षीय पुत्र रुद्र है, जबकि उनकी एक पुत्री का पहले ही निधन हो चुका था।

परिवार को सूचना, हिमाचल रवाना हुए स्वजन

कोतवाली पुलिस ने गुरुवार रात परिवार के सदस्यों को इस दुखद घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही परिजन हिमाचल प्रदेश के लिए रवाना हो गए। गौरतलब है कि रामदास अकेले तीर्थयात्रा पर आए थे, जो इस त्रासदी को और भी मर्मांतक बनाती है।

पुलिस फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रामदास ने यह कदम क्यों उठाया और पिछले 15 महीनों में वे कहाँ रहे। जाँच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

परिवार ढूंढता रहा — और इस दौरान कोई संस्थागत सहायता तंत्र सक्रिय नहीं हुआ। तीर्थस्थलों पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता और संकट-प्रतिक्रिया व्यवस्था की कमी एक बड़ा सवाल है जिसे नीति-निर्माता अक्सर नजरअंदाज करते हैं।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मां ज्वालामुखी मंदिर में क्या हुआ?
18 सितंबर 2026 की शाम राजस्थान के झालावाड़ निवासी 40 वर्षीय रामदास ने कांगड़ा के मां ज्वालामुखी मंदिर के गर्भगृह के बाहर कथित तौर पर खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। 70 प्रतिशत जलने के बाद उन्हें टांडा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया जहाँ उनकी मृत्यु हो गई।
रामदास कौन थे और वे मंदिर क्यों आए थे?
रामदास झालावाड़ में कपड़ों की दुकान चलाते थे और पहले कबाड़ का व्यापार करते थे। एम्बुलेंस कर्मचारियों के अनुसार उन्होंने बताया कि वे अकेले पूजा करने आए थे। वे करीब 15 महीने पहले एक पारिवारिक विवाद के बाद घर छोड़ चुके थे।
क्या पुलिस ने जाँच शुरू की है?
हाँ, देहरा के पुलिस अधीक्षक संदीप धवल ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस मंदिर पहुँची और जाँच शुरू की। फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल का दौरा कर साक्ष्य एकत्र किए हैं।
रामदास के परिवार को कब पता चला?
कोतवाली पुलिस ने गुरुवार रात परिवार को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद परिजन हिमाचल प्रदेश के लिए रवाना हो गए। रामदास की पत्नी सलोनी झालावाड़ नगर परिषद में सफाई कर्मचारी हैं और उनका 12 वर्षीय पुत्र रुद्र है।
रामदास पिछले 15 महीनों से कहाँ थे?
परिवार के अनुसार रामदास एक पारिवारिक विवाद के बाद घर छोड़ चुके थे और उनका कोई पता नहीं था। मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिशें भी नाकाम रहीं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस दौरान वे कहाँ रहे।
राष्ट्र प्रेस
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