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तेलंगाना आरटीसी ड्राइवर शंकर गौड़ की आत्मदाह से मौत, बीआरएस-भाजपा ने कांग्रेस सरकार को बताया जिम्मेदार

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तेलंगाना आरटीसी ड्राइवर शंकर गौड़ की आत्मदाह से मौत, बीआरएस-भाजपा ने कांग्रेस सरकार को बताया जिम्मेदार

सारांश

तेलंगाना में आरटीसी ड्राइवर शंकर गौड़ की आत्मदाह से मौत के बाद सियासी तूफान। बीआरएस नेता केटीआर और भाजपा ने कांग्रेस सरकार को 'हत्यारा' बताया। एक करोड़ मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग। एक दिन में तीन ड्राइवरों की आत्महत्या की कोशिश ने राज्य को हिलाया।

मुख्य बातें

आरटीसी ड्राइवर शंकर गौड़ ने 24 अप्रैल 2025 को वारंगल में आत्मदाह किया और हैदराबाद के अपोलो डीआरडीओ अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
बीआरएस नेता केटीआर ने इसे मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की 'सरकारी हत्या' बताया और एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की।
एक ही दिन में तीन आरटीसी ड्राइवरों ने आत्महत्या की कोशिश की, जिसे विपक्ष ने तेलंगाना के इतिहास का 'काला अध्याय' बताया।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार और तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष रामचंदर राव ने भी कांग्रेस सरकार पर हमला बोला।
पूर्व बीआरएस विधायक पेड्डी सुदर्शन रेड्डी समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनकी रिहाई की मांग विपक्ष ने की।
आरटीसी कर्मचारी ढाई साल से वेतन विसंगति और नियमितीकरण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

तेलंगाना में रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (आरटीसी) के ड्राइवर शंकर गौड़ की 24 अप्रैल 2025 को आत्मदाह के बाद मौत हो गई, जिससे राज्य की सियासत में भूचाल आ गया है। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस दुखद घटना को मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की कांग्रेस सरकार की नाकामी और 'हत्या' करार दिया है।

घटनाक्रम: कैसे हुई शंकर गौड़ की मौत

वारंगल जिले में आरटीसी कर्मचारियों के चल रहे आंदोलन के दौरान गुरुवार, 24 अप्रैल को ड्राइवर शंकर गौड़ ने खुद को आग लगा ली। गंभीर रूप से झुलसे शंकर गौड़ को तत्काल हैदराबाद के अपोलो डीआरडीओ अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शुक्रवार सुबह उनकी मौत हो गई।

यह घटना उस समय हुई जब आरटीसी कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन चला रहे थे। केटीआर के अनुसार, उसी दिन तीन आरटीसी ड्राइवरों ने आत्महत्या की कोशिश की, जो तेलंगाना के इतिहास का अब तक का सबसे काला अध्याय माना जा रहा है।

बीआरएस का आरोप: यह आत्महत्या नहीं, सरकारी हत्या है

बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव (केटीआर) ने 'एक्स' (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सरकार द्वारा की गई 'हत्या' है। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई साल से आरटीसी कर्मचारियों के साथ हो रहे अन्याय ने शंकर गौड़ को यह कदम उठाने पर मजबूर किया।

केटीआर ने अधिकारियों द्वारा शंकर गौड़ के पार्थिव शरीर को नरसंपेट आरटीसी डिपो ले जाकर श्रद्धांजलि देने की अनुमति न देने को 'अत्यंत निंदनीय' बताया। उन्होंने पूर्व बीआरएस विधायक पेड्डी सुदर्शन रेड्डी समेत गिरफ्तार अन्य लोगों की बिना शर्त रिहाई की मांग भी की।

बीआरएस नेता ने मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग सरकार से की। उन्होंने कहा कि आरटीसी को कमजोर करने की कोशिश बंद होनी चाहिए और सरकार को कर्मचारियों की जायज मांगें पूरी करनी चाहिए।

भाजपा का हमला: संवेदनहीन कांग्रेस सरकार पर न्यायपूर्ण संघर्ष

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने भी इस मौत को सरकार की 'हत्या' बताया और कहा कि पूरे तेलंगाना में शोक का माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों की मांगें पूरी करने की बजाय केवल कमेटियां बनाकर मामले को टाल रही है।

तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष रामचंदर राव ने हैदराबाद के मुशीराबाद में आरटीसी कर्मचारियों के प्रदर्शन में शामिल होकर उनका समर्थन किया। उन्होंने इस आंदोलन को 'संवेदनहीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ न्यायपूर्ण संघर्ष' बताया।

बंडी संजय ने कर्मचारियों से यह भी अपील की कि वे आत्महत्या जैसे कदम न उठाएं, क्योंकि इससे उनके परिवारों को भारी संकट झेलना पड़ता है। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों के साथ तत्काल संवाद स्थापित करने की मांग की।

गहरा संदर्भ: ढाई साल में क्यों नहीं सुलझा आरटीसी संकट?

गौरतलब है कि तेलंगाना में कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद से आरटीसी कर्मचारियों की मांगें लंबित हैं। वेतन विसंगति, नियमितीकरण और सेवा शर्तों को लेकर कर्मचारी लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने चुनावी वादे पूरे नहीं किए।

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब तेलंगाना में आरटीसी का निजीकरण और कर्मचारियों की छंटनी को लेकर भी चर्चा चल रही है। आलोचकों का कहना है कि सरकार की ओर से संवाद की कमी और मांगों की अनदेखी ने स्थिति को विस्फोटक बना दिया।

तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो अन्य राज्यों में भी सरकारी परिवहन कर्मचारियों के आंदोलन हुए हैं, लेकिन एक ही दिन में तीन कर्मचारियों द्वारा आत्महत्या की कोशिश असाधारण और चिंताजनक है। यह घटना आने वाले दिनों में तेलंगाना की राजनीति और 2028 के विधानसभा चुनावों पर भी असर डाल सकती है।

आगे की स्थिति पर सबकी नजर होगी — क्या मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी आरटीसी कर्मचारियों से वार्ता करेंगे, मुआवजे की घोषणा होगी, और क्या सरकार विपक्ष के दबाव में झुकेगी — यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक प्रणालीगत विफलता का प्रमाण है। कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने से पहले जो वादे किए थे, उन्हें पूरा न करके उसने कर्मचारियों को निराशा की उस खाई में धकेला जहां से वापसी मुश्किल हो जाती है। विडंबना यह है कि जो सरकार 'कर्मचारी हितैषी' होने का दावा करती है, उसके राज में एक ही दिन में तीन ड्राइवरों ने जान देने की कोशिश की — यह आंकड़ा खुद बोलता है। विपक्ष का राजनीतिक हमला जायज है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सरकार अब भी कमेटियों की आड़ में मामला टालेगी, या मृतक के परिवार और जीवित कर्मचारियों को न्याय देगी।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना में आरटीसी ड्राइवर शंकर गौड़ की मौत कैसे हुई?
वारंगल जिले में आरटीसी कर्मचारियों के आंदोलन के दौरान ड्राइवर शंकर गौड़ ने 24 अप्रैल को खुद को आग लगा ली। हैदराबाद के अपोलो डीआरडीओ अस्पताल में इलाज के दौरान शुक्रवार सुबह उनकी मौत हो गई।
बीआरएस ने आरटीसी ड्राइवर की मौत पर क्या कहा?
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटीआर ने इसे 'आत्महत्या नहीं, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सरकार की हत्या' बताया। उन्होंने मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग की।
तेलंगाना आरटीसी कर्मचारी किन मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं?
आरटीसी कर्मचारी वेतन विसंगति दूर करने, नियमितीकरण और बेहतर सेवा शर्तों की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि कांग्रेस सरकार ने चुनावी वादे पूरे नहीं किए।
भाजपा ने शंकर गौड़ की मौत पर क्या रुख अपनाया?
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने इसे सरकार की 'हत्या' बताया और कर्मचारियों से आत्महत्या न करने की अपील की। तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष रामचंदर राव ने मुशीराबाद में प्रदर्शन में शामिल होकर कर्मचारियों का समर्थन किया।
आरटीसी ड्राइवर की मौत के बाद तेलंगाना सरकार ने क्या कदम उठाए?
अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक मुआवजे या वार्ता की घोषणा नहीं हुई है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने मृतक के पार्थिव शरीर को नरसंपेट आरटीसी डिपो ले जाने की अनुमति भी नहीं दी।
राष्ट्र प्रेस
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