क्या त्रिपुरा के विपक्ष के नेता ने एंजेल चकमा के परिवार के लिए सरकारी नौकरी की मांग की?

Click to start listening
क्या त्रिपुरा के विपक्ष के नेता ने एंजेल चकमा के परिवार के लिए सरकारी नौकरी की मांग की?

सारांश

क्या त्रिपुरा के नेता ने एंजल चकमा के परिवार के लिए नौकरी की मांग की? जानिए इस घटना का पूरा सच और उससे संबंधित सभी अपडेट।

Key Takeaways

  • जितेंद्र चौधरी ने एंजल चकमा के परिवार के लिए सरकारी नौकरी की मांग की।
  • उत्तराखंड पुलिस ने मामले में देरी की।
  • परिवार को विभिन्न स्रोतों से वित्तीय सहायता मिली है।
  • एंजल चकमा की हत्या ने पूरे पूर्वोत्तर में आक्रोश फैलाया है।
  • भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए सख्त सजा की मांग की गई है।

अगरतला, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। त्रिपुरा विधानसभा में विपक्ष के नेता और सीपीआई-एम पोलितब्यूरो के सदस्य जितेंद्र चौधरी ने रविवार को देहरादून में बर्बर तरीके से हमले के बाद जान गंवाने वाले एंजल चकमा के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की।

जितेंद्र चौधरी ने शनिवार को त्रिपुरा के उनाकोटी जिले के मचमारा में एंजल चकमा के घर का दौरा किया और उत्तराखंड पुलिस की जांच पर कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मामले में पुलिस ने दोषियों को पकड़ने और मामला दर्ज करने में देरी की।

चौधरी ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस ने हत्या का मामला समय पर दर्ज नहीं किया और जांच में ढिलाई बरती। देहरादून पुलिस ने शुरुआत में मामले को साधारण धाराओं के तहत दर्ज किया, जबकि एंजल चकमा पर एक समूह ने चाकू से हमला किया और उस दौरान नस्लीय गालियां भी दी गईं।

विपक्ष नेता ने एंजल के पिता, बीएसएफ जवान तरुण प्रसाद चकमा के हवाले से कहा कि यदि समय पर सही इलाज मिलता, तो 24 वर्षीय एंजल चकमा की जान बचाई जा सकती थी।

जितेंद्र चौधरी ने त्रिपुरा सरकार से अपील की कि वह इस मामले को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पास उठाए और एंजल चकमा के परिवार के एक सदस्य के लिए सरकारी नौकरी की व्यवस्था करने की मांग करें।

इस बीच, देहरादून पुलिस ने हत्या में शामिल पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उत्तराखंड सरकार ने परिवार को 4.12 लाख रुपए की सहायता दी है, जबकि त्रिपुरा सरकार ने 5 लाख रुपए और त्रिपुरा ट्राइबल एरिया ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल ने 3 लाख रुपए की सहायता प्रदान की है।

24 वर्षीय एंजल चकमा एमबीए का अंतिम वर्ष का छात्र था। 9 दिसंबर को देहरादून में एक नस्लीय समूह ने उस पर हमला किया था। अस्पताल में 18 दिन संघर्ष करने के बाद 26 दिसंबर को उनकी मौत हो गई।

इस घटना ने पूरे पूर्वोत्तर के आठ राज्यों में भारी आक्रोश पैदा किया है। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता, जैसे भाजपा, कांग्रेस, टिपरा मोथा पार्टी और वाम दल, ने अपराधियों को कड़ी सजा देने की मांग की है। कई संगठनों ने अगरतला और अन्य जगहों पर कैंडल मार्च, मशाल रैली और विरोध प्रदर्शन किए।

उत्तराखंड के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य तरुण विजय ने भी शुक्रवार को उनाकोटी जिले में चकमा परिवार से मुलाकात की और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए दोषियों को उदाहरणात्मक सजा दी जानी चाहिए।

विजय ने यह भी प्रस्तावित किया कि एंजल चकमा के छोटे भाई माइकल चकमा को त्रिपुरा में सरकारी नौकरी दी जाए, ताकि परिवार की आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने उत्तराखंड पुलिस में विशेष पूर्वोत्तर सेल बनाने का सुझाव भी दिया, जो नस्लीय उत्पीड़न और भेदभाव के मामलों को देख सके।

Point of View

बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है।
NationPress
05/01/2026

Frequently Asked Questions

एंजल चकमा कौन थे?
एंजल चकमा 24 वर्षीय एमबीए छात्र थे, जिनकी हत्या 9 दिसंबर को देहरादून में एक नस्लीय समूह द्वारा की गई।
क्या सरकार ने एंजल चकमा के परिवार को सहायता दी है?
हाँ, उत्तराखंड सरकार ने परिवार को 4.12 लाख रुपए की सहायता दी है, जबकि त्रिपुरा सरकार ने 5 लाख रुपए और त्रिपुरा ट्राइबल एरिया ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल ने 3 लाख रुपए की सहायता प्रदान की है।
इस घटना के बाद क्या कदम उठाए गए हैं?
पुलिस ने हत्या में शामिल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है और विपक्ष के नेता ने सरकारी नौकरी की मांग की है।
Nation Press