27 सितंबर 2026
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त्रिपुरा ग्राम समिति चुनाव 2026: 10 साल बाद सोमवार को 2,954 सीटों पर मतदान, 9,820 उम्मीदवार मैदान में

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त्रिपुरा ग्राम समिति चुनाव 2026: 10 साल बाद सोमवार को 2,954 सीटों पर मतदान, 9,820 उम्मीदवार मैदान में

सारांश

दस साल के लंबे इंतजार के बाद त्रिपुरा के आदिवासी स्वायत्त क्षेत्र में ग्राम समिति चुनाव सोमवार को होने जा रहे हैं। 2,954 सीटों पर 9,820 उम्मीदवार किस्मत आजमाएंगे। भाजपा-TMP-IPFT गठबंधन बनाम वाम मोर्चे की यह टक्कर TTAADC की भविष्य की दिशा तय करेगी।

मुख्य बातें

29 सितंबर 2026 को TTAADC के अंतर्गत 2,954 सीटों पर ग्राम समिति चुनाव; मतदान सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक।
कुल 4,597 सीटों में से TMP ने 1,557 और BJP ने 81 सीटें निर्विरोध जीतीं; शेष 2,954 सीटों पर मतदान।
मैदान में 9,820 उम्मीदवार ; 1,069 उम्मीदवारों ने नामांकन वापस लिया।
सुरक्षा के लिए 15,000 से अधिक केंद्रीय व राज्य बल तैनात, जिनमें CAPF की 74 कंपनियाँ शामिल।
TTAADC की स्थापना 1 अप्रैल 1985 को हुई थी; इसका अधिकार क्षेत्र 10,491 वर्ग किलोमीटर और 12.16 लाख से अधिक निवासियों पर है।
ये चुनाव 10 वर्षों के अंतराल के बाद हो रहे हैं और आदिवासी क्षेत्रों में जमीनी लोकतंत्र की बहाली का प्रतीक माने जा रहे हैं।

त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) के अंतर्गत ग्राम समिति चुनाव एक दशक के अंतराल के बाद सोमवार, 29 सितंबर 2026 को होने जा रहे हैं। सभी आठ जिलों के 44 ब्लॉकों की 2,954 सीटों पर सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। राज्य के आदिवासी बहुल इलाकों में स्थानीय शासन के लिए ये चुनाव राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

त्रिपुरा राज्य चुनाव आयोग (TSEC) ने शुरुआत में 587 ग्राम समितियों की 4,597 सीटों पर चुनाव की घोषणा की थी। हालाँकि बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन के बाद वास्तविक मतदान 2,954 सीटों तक सीमित रह गया। टिपरा मोथा पार्टी (TMP) ने 1,557 सीटें (33.87%) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 81 सीटें (1.76%) निर्विरोध जीत लीं।

नामांकन वापसी के बाद 9,820 उम्मीदवार मैदान में हैं — टीएमपी, भाजपा और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] सहित कई दलों के 1,069 उम्मीदवारों ने अपना पर्चा वापस लिया।

राजनीतिक दलों का समीकरण

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने दो आदिवासी सहयोगी दलों — टिपरा मोथा पार्टी (TMP) और इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT) — के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है। इनका मुकाबला भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) से है।

गौरतलब है कि 2021 से पूर्व शाही परिवार के सदस्य प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा की अगुवाई में टिपरा मोथा पार्टी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 30 सदस्यीय TTAADC का कामकाज संभाल रही है, जिसमें 28 चुने हुए और 2 नामांकित सदस्य होते हैं।

सुरक्षा व्यवस्था

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए 15,000 से अधिक केंद्रीय और राज्य सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। इनमें सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) की लगभग 74 कंपनियाँ (करीब 5,000 जवान) तथा त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (TSR) और त्रिपुरा पुलिस के 10,000 जवान शामिल हैं।

TSEC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लगभग 7,200 सरकारी कर्मचारियों वाली मतदान दलें दूर-दराज, पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में रवाना हो चुकी हैं। मतदान अभियान शनिवार दोपहर समाप्त हो गया।

TTAADC की पृष्ठभूमि

TTAADC की स्थापना 1 अप्रैल 1985 को भारतीय संविधान के 49वें संशोधन के बाद छठी अनुसूची के तहत हुई थी। इसका अधिकार क्षेत्र त्रिपुरा के 10,491 वर्ग किलोमीटर — यानी राज्य के लगभग दो-तिहाई भूभाग — पर है। यहाँ 12.16 लाख से अधिक लोग निवास करते हैं, जिनमें से लगभग 84 प्रतिशत आदिवासी समुदायों से हैं।

ग्राम समितियाँ TTAADC के तहत आने वाले इलाकों में ग्राम पंचायतों के समकक्ष इकाइयाँ हैं। यह पहली बार है जब 10 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद ये चुनाव हो रहे हैं, जो आदिवासी क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली का संकेत देते हैं।

आगे क्या होगा

मतगणना और परिणाम मतदान के बाद आने की उम्मीद है। इन चुनावों के नतीजे TTAADC में राजनीतिक शक्ति संतुलन और 2026 में संभावित परिषद चुनावों की दिशा पर असर डाल सकते हैं। आदिवासी क्षेत्रों में भाजपा-TMP-IPFT गठबंधन की पकड़ का भी इससे अंदाजा लगाया जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा ग्राम समिति चुनाव 2026 में कितनी सीटों पर मतदान होगा?
29 सितंबर 2026 को TTAADC के अंतर्गत सभी आठ जिलों के 44 ब्लॉकों की 2,954 सीटों पर मतदान होगा। कुल 4,597 में से 1,638 सीटें पहले ही निर्विरोध भरी जा चुकी हैं।
TTAADC क्या है और इसका महत्व क्यों है?
त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) 1 अप्रैल 1985 को संविधान की छठी अनुसूची के तहत स्थापित हुई थी। यह त्रिपुरा के 10,491 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 12.16 लाख से अधिक लोगों — जिनमें 84% आदिवासी हैं — के स्वशासन की संवैधानिक संस्था है।
इन चुनावों में कौन-कौन से दल आमने-सामने हैं?
BJP, टिपरा मोथा पार्टी (TMP) और IPFT का गठबंधन मुकाबले में है, जबकि विपक्ष में CPI(M) के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा और कांग्रेस हैं। TMP पहले से TTAADC की 30 सदस्यीय परिषद का संचालन कर रही है।
ग्राम समिति चुनावों के लिए क्या सुरक्षा व्यवस्था की गई है?
15,000 से अधिक केंद्रीय और राज्य सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं, जिनमें CAPF की 74 कंपनियाँ (करीब 5,000 जवान), त्रिपुरा स्टेट राइफल्स और त्रिपुरा पुलिस के 10,000 जवान शामिल हैं। करीब 7,200 सरकारी कर्मचारी दूरदराज के इलाकों में मतदान दलों में तैनात हैं।
ये चुनाव 10 साल बाद क्यों हो रहे हैं?
स्रोत सामग्री में इस देरी का सटीक कारण नहीं बताया गया है। हालाँकि अधिकारियों के अनुसार ये चुनाव एक दशक के अंतराल के बाद TTAADC क्षेत्र में स्थानीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली के लिए अहम माने जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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