त्रिपुरा ग्राम समिति चुनाव: टिपरा मोथा ने 34% सीटें निर्विरोध जीतीं, 28 सितंबर को मतदान
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों में 28 सितंबर को होने वाले ग्राम समिति चुनावों से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) ने कुल 4,597 सीटों में से 1,557 सीटें (33.87 प्रतिशत) निर्विरोध अपने नाम कर ली हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) को भी 81 सीटों (1.76 प्रतिशत) पर बिना मुकाबले जीत मिली है। त्रिपुरा राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, 10 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद हो रहे इन चुनावों में यह निर्विरोध जीत सत्तारूढ़ गठबंधन को मतदान से पहले ही उल्लेखनीय बढ़त दे रही है।
मुख्य चुनावी आँकड़े
त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (टीटीएएडीसी) क्षेत्र के अंतर्गत कुल 587 ग्राम समितियों की 4,597 सीटों के लिए ये चुनाव आयोजित किए जा रहे हैं। नामांकन वापसी की अंतिम तिथि बीतने के बाद 1,069 उम्मीदवारों ने अपना नाम वापस ले लिया — इनमें टिपरा मोथा, भाजपा और माकपा (सीपीआई-एम) समेत कई दलों के प्रत्याशी शामिल हैं। बड़ी संख्या में निर्विरोध निर्वाचन के बाद अब राज्य के आठ जिलों के 52 में से 44 ब्लॉकों की 2,954 सीटों पर ही वास्तविक मतदान होगा।
मैदान में कौन-कौन
चुनाव मैदान में अब कुल 9,820 उम्मीदवार शेष हैं। इनमें सर्वाधिक 4,279 उम्मीदवार टिपरा मोथा पार्टी के हैं, जबकि सीपीआई(एम) के 2,151, भाजपा के 1,853, कांग्रेस के 425, इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के 356, 753 निर्दलीय एवं अन्य दलों के उम्मीदवार तथा सीपीआई के 3 प्रत्याशी चुनावी दौड़ में बने हुए हैं। सत्तारूढ़ भाजपा अपने दोनों आदिवासी सहयोगी दलों — टिपरा मोथा और आईपीएफटी — के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है, जबकि विपक्ष में सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा और कांग्रेस हैं।
हिंसा और तनाव की रिपोर्ट
चुनाव से पहले राज्य के विभिन्न जिलों से हिंसा और तनाव की ख़बरें सामने आई हैं। आईपीएफटी के वरिष्ठ नेता और मंत्री शुक्ला चरण नोतिया ने आरोप लगाया कि 8 सितंबर को खोवाई जिले के हेजामारा इलाके में उनकी पार्टी के महासचिव स्वपन देबबर्मा पर कथित तौर पर 'क्रूर हमला' किया गया। नोतिया ने अपने बयान में कहा कि जब देबबर्मा खोवाई गाँव जा रहे थे, तब टिपरा मोथा के कथित समर्थकों ने उन पर हमला कर मारपीट की।
नोतिया ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भाजपा, आईपीएफटी और टिपरा मोथा एक ही चुनावी गठबंधन का हिस्सा हैं, इसलिए इस तरह की घटनाएँ गठबंधन की एकता को गंभीर नुकसान पहुँचाती हैं। उन्होंने राज्यभर में राजनीतिक हिंसा रोकने की अपील करते हुए सभी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से शांति बनाए रखने का आह्वान किया।
विपक्ष के आरोप
सीपीआई(एम) और कांग्रेस ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं कि अनेक सीटों पर उनके उम्मीदवार कथित हमलों, धमकियों और बाधाओं के चलते नामांकन दाखिल नहीं कर पाए। वाम मोर्चा के संयोजक और पूर्व मंत्री माणिक डे ने कहा कि उनकी पार्टी ने निर्वाचन आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराकर उचित कार्रवाई की माँग की है, लेकिन अब तक हिंसा रोकने के लिए कोई ठोस कदम नज़र नहीं आया है। गौरतलब है कि टीटीएएडीसी क्षेत्र की ग्राम समितियाँ गैर-टीटीएएडीसी क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों के समकक्ष होती हैं, और इनके चुनाव स्थानीय आदिवासी शासन-व्यवस्था में निर्णायक भूमिका रखते हैं।
आगे क्या होगा
चुनाव-पूर्व आरोप-प्रत्यारोपों और हिंसा की रिपोर्टों के बीच अब सबकी निगाहें 28 सितंबर को होने वाले मतदान पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि क्या निर्वाचन आयोग शेष सीटों पर शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करा पाता है, और क्या सत्तारूढ़ गठबंधन की निर्विरोध जीतों का लाभ उसे वास्तविक मतदान में भी मिलता है।