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त्रिपुरा ग्राम समिति चुनाव 28 सितंबर को, 10 साल बाद भाजपा-सीपीआई(एम) आमने-सामने

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त्रिपुरा ग्राम समिति चुनाव 28 सितंबर को, 10 साल बाद भाजपा-सीपीआई(एम) आमने-सामने

सारांश

10 साल के लंबे इंतजार के बाद त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम समिति चुनावों की तारीख तय हो गई है। 28 सितंबर को 587 समितियों की 2,634 सीटों पर मतदान होगा। भाजपा ने केंद्रीय नेतृत्व उतारा, सीपीआई(एम) और कांग्रेस भी मैदान में — यह चुनाव टीटीएएडीसी की राजनीति का नया अध्याय लिखेंगे।

मुख्य बातें

त्रिपुरा में टीटीएएडीसी के तहत 587 ग्राम समितियों की 2,634 सीटों पर 28 सितंबर 2026 को मतदान होगा — 10 वर्षों के अंतराल के बाद।
नामांकन की अंतिम तिथि 8 सितंबर , उम्मीदवारी वापसी 11 सितंबर और मतगणना 5 अक्टूबर को।
भाजपा के चार केंद्रीय नेता — बीएल संतोष , संबित पात्रा , राजीव बब्बर , राजदीप रॉय — अगरतला पहुँचकर रणनीति बना चुके हैं।
सीपीआई(एम) नेता जितेंद्र चौधरी ने चुनाव घोषणा का स्वागत किया; कांग्रेस भी तैयारी में जुटी।
टीटीएएडीसी त्रिपुरा के 10,491 वर्ग किमी क्षेत्र और 12.16 लाख से अधिक लोगों — जिनमें 84% आदिवासी — का प्रतिनिधित्व करती है।
टिपरा मोथा पार्टी के प्रमुख प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा ने कहा कि चुनाव सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कराए जाएंगे।

त्रिपुरा राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) द्वारा चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही अगरतला में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। टीटीएएडीसी क्षेत्र के बाहर की 587 ग्राम समितियों की 2,634 सीटों पर 28 सितंबर 2026 को मतदान होगा — यह चुनाव पूरे 10 वर्षों के अंतराल के बाद हो रहे हैं। कुल 4,597 सीटों में से इन्हीं सीटों के लिए अभी मतदान निर्धारित है।

मुख्य चुनाव कार्यक्रम

त्रिपुरा राज्य चुनाव आयुक्त प्रदीप कुमार चक्रवर्ती के अनुसार नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 सितंबर निर्धारित है। नामांकन पत्रों की जाँच 9 सितंबर को होगी, जबकि उम्मीदवारी वापस लेने की अंतिम तारीख 11 सितंबर है। मतगणना 5 अक्टूबर को होगी। राज्य चुनाव अधिकारियों ने टीटीएएडीसी क्षेत्रों में विलेज कमेटी चुनावों के लिए कानूनी अधिसूचना भी जारी कर दी है।

भाजपा की तैयारी

सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चुनावी रणनीति को धार देने के लिए केंद्रीय नेतृत्व को मैदान में उतार दिया है। राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष, नॉर्थ-ईस्ट कोऑर्डिनेटर संबित पात्रा, को-कोऑर्डिनेटर राजीव बब्बर और ऑब्जर्वर राजदीप रॉय मंगलवार को अगरतला पहुँचे। इन चारों नेताओं ने मुख्यमंत्री माणिक साहा, राज्य भाजपा अध्यक्ष अभिषेक देबरॉय और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ कई दौर की बैठकें कर चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

मुख्य विपक्षी दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई(एम) भी विभिन्न जिलों में बैठकें कर अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे रही है। विपक्ष के नेता और सीपीआई(एम) के राज्य सचिव जितेंद्र चौधरी ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी पार्टी इन महत्वपूर्ण चुनावों में पूरी तरह भाग लेने के लिए तैयार है। कांग्रेस ने भी स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी के लिए कई बैठकें की हैं।

टिपरा मोथा और सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ

भाजपा की सहयोगी आदिवासी पार्टी टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) के प्रमुख प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा ने वीडियो संदेश में कहा, 'सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद, शीर्ष अदालत ने एसईसी को ये अहम चुनाव कराने का निर्देश दिया।' गौरतलब है कि 2021 से टीटीएएडीसी का कामकाज पूर्व शाही परिवार के सदस्य देबबर्मा की अगुवाई में टीएमपी संभाल रही है। 12 अप्रैल 2026 के टीटीएएडीसी चुनावों में टीएमपी ने 28 चुनी हुई सीटों में से 24 पर जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा को केवल 4 सीटें मिली थीं।

टीटीएएडीसी का महत्व

यह परिषद त्रिपुरा के कुल 10,491 वर्ग किलोमीटर भौगोलिक क्षेत्र के लगभग दो-तिहाई हिस्से का प्रशासन संभालती है, जहाँ 12.16 लाख से अधिक लोग निवास करते हैं — जिनमें से लगभग 84 प्रतिशत आदिवासी समुदायों से हैं। त्रिपुरा की 60 सदस्यीय विधानसभा के बाद टीटीएएडीसी को राज्य की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक और राजनीतिक संस्था माना जाता है। राज्य के पुलिस महानिदेशक जीएस राव ने आश्वस्त किया है कि चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। इन चुनावों के नतीजे त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरणों को नए सिरे से परिभाषित कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

राज्य की चुनावी जवाबदेही पर सवाल उठाता है। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व उतारना इस बात का संकेत है कि पार्टी टीटीएएडीसी में अप्रैल 2026 की हार के बाद आदिवासी क्षेत्रों में ज़मीन वापस पाने की कोशिश में है। टिपरा मोथा की बढ़ती ताकत और आदिवासी मतदाताओं की प्राथमिकताएँ इन चुनावों को महज स्थानीय नहीं, बल्कि 2028 के विधानसभा चुनावों का पूर्वाभ्यास बनाती हैं।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा ग्राम समिति चुनाव 2026 कब होंगे?
त्रिपुरा में टीटीएएडीसी के तहत ग्राम समिति चुनाव 28 सितंबर 2026 को होंगे। मतगणना 5 अक्टूबर को निर्धारित है।
इन चुनावों में कितनी सीटों पर मतदान होगा?
टीटीएएडीसी क्षेत्र के बाहर की 587 ग्राम समितियों की 2,634 सीटों पर मतदान होगा। कुल 4,597 सीटों में से इन्हीं के लिए अभी चुनाव कार्यक्रम घोषित किया गया है।
ये चुनाव 10 साल बाद क्यों हो रहे हैं?
टिपरा मोथा पार्टी के प्रमुख प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद शीर्ष अदालत ने राज्य चुनाव आयोग को ये चुनाव कराने का निर्देश दिया। पिछला चुनाव लगभग 10 वर्ष पहले हुआ था।
टीटीएएडीसी क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) राज्य के 10,491 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के लगभग दो-तिहाई हिस्से का प्रशासन संभालती है, जहाँ 12.16 लाख से अधिक लोग रहते हैं — जिनमें 84 प्रतिशत आदिवासी हैं। यह त्रिपुरा विधानसभा के बाद राज्य की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था मानी जाती है।
अप्रैल 2026 के टीटीएएडीसी चुनावों में किसे जीत मिली थी?
12 अप्रैल 2026 के टीटीएएडीसी चुनावों में टिपरा मोथा पार्टी ने 28 चुनी हुई सीटों में से 24 पर जीत हासिल की थी। भाजपा को केवल 4 सीटें मिली थीं।
राष्ट्र प्रेस
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