6 अक्टूबर 2026
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उदयनिधि स्टालिन का तमिलनाडु सरकार पर प्रहार, नर्सों पर लाठीचार्ज को बताया 'बर्बरता'

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उदयनिधि स्टालिन का तमिलनाडु सरकार पर प्रहार, नर्सों पर लाठीचार्ज को बताया 'बर्बरता'

सारांश

तमिलनाडु में नर्सों पर पुलिस लाठीचार्ज के बाद विपक्षी नेता उदयनिधि स्टालिन ने सरकार को 'डमी सीएम की सरकार' कहकर घेरा। बिजली काटने और बच्चों पर हमले के आरोप लगाते हुए उन्होंने याद दिलाया कि इन्हीं नेताओं ने विपक्ष में रहते हुए नर्सों के नियमितीकरण का वादा किया था।

मुख्य बातें

उदयनिधि स्टालिन ने 6 अक्टूबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर तमिलनाडु सरकार की कड़ी निंदा की।
नर्सों पर पुलिस लाठीचार्ज को उन्होंने 'अंधाधुंध और बर्बर हमला' बताया।
आरोप: प्रदर्शन स्थल पर बिजली काटी गई , धमकियाँ दी गईं और बच्चों पर भी हमला किया गया।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप — विपक्ष में रहते हुए पहले दिन नर्सों को नियमित करने का वादा किया था।
तमिलनाडु इंटरमीडिएट हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन के बैनर तले हजारों नर्सें वेतन विसंगति और स्थायीकरण की माँग को लेकर हड़ताल पर हैं।
उदयनिधि स्टालिन ने माँग की कि सरकार दमन रोके, वार्ता बुलाए और माँगें पूरी करे।

तमिलनाडु में प्रदर्शनकारी नर्सों पर पुलिस लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष के नेता और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) यूथ विंग सचिव उदयनिधि स्टालिन ने 6 अक्टूबर 2026 को राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करके सरकार की कड़ी निंदा की और इसे 'अंधाधुंध एवं बर्बर हमला' करार दिया। नर्सें नौकरी के नियमितीकरण और समान काम के लिए समान वेतन की माँग को लेकर तमिलनाडु इंटरमीडिएट हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन के बैनर तले बड़ी संख्या में हड़ताल पर हैं।

उदयनिधि का सरकार पर सीधा निशाना

उदयनिधि स्टालिन ने सरकार को 'डमी सीएम की सरकार' कहते हुए लिखा, 'मैं इस सरकार द्वारा पुलिस बलों को तैनात करके प्रदर्शनकारी नर्सों के खिलाफ अंधाधुंध और बर्बर हमला करने की कड़ी निंदा करता हूँ। नर्सें नौकरी को नियमित करने और समान काम के लिए समान वेतन की माँग कर रही हैं।'

उन्होंने याद दिलाया कि विपक्ष में रहते हुए इन्हीं शासकों ने वादा किया था कि सत्ता में आते ही पहले दिन नर्सों को नियमित कर देंगे, लेकिन आज वही नर्सों के प्रदर्शन पर पुलिस की बर्बरता करा रहे हैं।

आरोप: बिजली काटी, धमकियाँ दी गईं

उदयनिधि स्टालिन ने गंभीर आरोप लगाए कि सरकार ने प्रदर्शन स्थल पर नर्सों को तंग जगहों में बंद किया, बिजली की आपूर्ति काटी और 'तुम्हें अपनी जान प्यारी है या नहीं?' जैसे सवालों से डराने की कोशिश की। उनका कहना था कि अपशब्द कहने वाली टीमों से नर्सों और उनके संघर्ष को नीचा दिखाना 'अभद्रता की पराकाष्ठा' है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी नर्सों के साथ उनके छोटे-छोटे बच्चों पर भी हमला किया गया। इस पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने पूछा, 'बच्चों पर यह हमला क्या है, इसे मामा लाठीचार्ज योजना कहा जाए?'

मुख्यमंत्री पर तंज

उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, 'मुख्यमंत्री के हाथ जो एक डमी उम्मीदवार के नकली आँसू पोंछने के लिए आगे बढ़ते हैं, वे जान बचाने वाली नर्सों के असली आँसू पोंछने से क्यों इनकार करते हैं?' यह टिप्पणी सत्तारूढ़ दल की कथित दोहरी नीति पर एक तीखा कटाक्ष मानी जा रही है।

गौरतलब है कि सत्तारूढ़ दल ने विपक्ष में रहते हुए नर्सों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था और सत्ता में आने पर तत्काल समाधान का वादा किया था। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु के स्वास्थ्य क्षेत्र में संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा वर्षों से लंबित है।

नर्सों की प्रमुख माँगें

तमिलनाडु इंटरमीडिएट हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन के बैनर तले हजारों नर्सें हड़ताल पर हैं। उनकी मुख्य माँगों में वेतन संबंधी विसंगतियों का समाधान, संविदा एवं अनुबंध पर काम कर रही नर्सों को स्थायी करना और नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है। समान काम के लिए समान वेतन की माँग भी इस आंदोलन का केंद्रीय मुद्दा है।

विपक्ष की माँग और आगे का रास्ता

उदयनिधि स्टालिन ने सरकार से तीन स्पष्ट माँगें रखीं — नर्सों के खिलाफ दमन तुरंत बंद किया जाए, उन्हें वार्ता के लिए आमंत्रित किया जाए और उनकी माँगों को पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला तमिलनाडु में स्वास्थ्यकर्मियों के अधिकारों और सरकारी वादों की जवाबदेही के व्यापक सवाल को उठाता है। आने वाले दिनों में इस मामले के और अधिक राजनीतिक रंग लेने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब विपक्ष में किए वादे सत्ता में आते ही उलट जाते हैं। तमिलनाडु में स्वास्थ्य क्षेत्र के संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण वर्षों से अटका है, और इस बार लाठीचार्ज तथा बच्चों पर हमले के आरोपों ने मामले को मानवाधिकार के स्तर पर पहुँचा दिया है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर केवल राजनीतिक बयान तक सिमट जाती है, जबकि असली सवाल यह है कि संविदा स्वास्थ्यकर्मियों की दशकों पुरानी माँगें किस नीतिगत कारण से लंबित रहती हैं। जब तक ठोस नीतिगत प्रतिबद्धता नहीं आती, यह विवाद अगले चुनाव तक राजनीतिक तलवार बना रहेगा।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में नर्सों पर लाठीचार्ज क्यों हुआ?
तमिलनाडु इंटरमीडिएट हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन के बैनर तले हजारों नर्सें वेतन विसंगतियों के समाधान, संविदा नर्सों के स्थायीकरण और समान काम के लिए समान वेतन की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रही थीं। इसी प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसकी विपक्ष ने कड़ी निंदा की है।
उदयनिधि स्टालिन ने सरकार को 'डमी सीएम की सरकार' क्यों कहा?
उदयनिधि स्टालिन ने सत्तारूढ़ दल की वादाखिलाफी पर निशाना साधते हुए यह टिप्पणी की। उनका आरोप है कि इन्हीं नेताओं ने विपक्ष में रहते हुए वादा किया था कि सत्ता में आते ही पहले दिन नर्सों को नियमित करेंगे, लेकिन सत्ता में आने के बाद वही नर्सों पर पुलिस बल का इस्तेमाल करा रहे हैं।
नर्सों की प्रमुख माँगें क्या हैं?
नर्सों की माँगों में संविदा एवं अनुबंध आधार पर कार्यरत नर्सों को स्थायी किया जाना, वेतन संबंधी विसंगतियों का समाधान और समान काम के लिए समान वेतन शामिल हैं। नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उनकी प्रमुख माँगों में है।
उदयनिधि स्टालिन ने सरकार से क्या माँगें रखीं?
उदयनिधि स्टालिन ने तीन माँगें रखीं — नर्सों के खिलाफ दमन तत्काल बंद किया जाए, उन्हें वार्ता के लिए आमंत्रित किया जाए और उनकी माँगों को पूरा करने के लिए ज़रूरी कदम उठाए जाएँ।
क्या तमिलनाडु में नर्सों की हड़ताल पहले भी हुई है?
तमिलनाडु में स्वास्थ्य क्षेत्र के संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और वेतन विसंगतियों का मामला वर्षों से लंबित है। यह पहली बार नहीं है कि नर्सों ने इन माँगों को लेकर आंदोलन किया है, लेकिन इस बार लाठीचार्ज और कथित तौर पर बच्चों पर हमले के आरोपों ने मामले को अधिक गंभीर मोड़ दे दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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