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उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक पर सियासी संघर्ष: भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस की रणनीतियाँ

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उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक पर सियासी संघर्ष: भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस की रणनीतियाँ

सारांश

उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों में दलित वोट बैंक को साधने के लिए सभी प्रमुख राजनीतिक दल सक्रिय हैं। भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस ने अपनी-अपनी रणनीतियाँ तैयार की हैं। जानिए, किस दल ने क्या कदम उठाए हैं।

मुख्य बातें

सभी दल दलित वोट बैंक पर फोकस कर रहे हैं।
भाजपा ने अंबेडकर मूर्ति विकास योजना की शुरुआत की।
सपा ने बसपा से आए नेताओं को आगे किया।
कांग्रेस दलितों के उत्थान के लिए सक्रिय है।
बसपा अपने जाटव वोट बैंक को बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

लखनऊ, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए सभी राजनीतिक दलों ने दलित मतदाताओं को अपनी ओर खींचने के लिए अपनी योजनाएँ तैयार करना शुरू कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), और कांग्रेस सभी दल दलित वोटों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न रणनीतियों पर काम कर रहे हैं।

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सभी दल इस वर्ग पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। इस कारण अंबेडकर जयंती से पहले राजनीतिक दलों के बीच प्रतियोगिता देखने को मिल रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव में निराशाजनक परिणामों के बाद दलित वोट बैंक को सहेजने की पहल की थी, जिसका जिम्मा धर्मपाल सिंह, संगठन महामंत्री ने लिया।

धर्मपाल ने इस वर्ग के पेशेवरों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश की है। उन्होंने कई संगोष्ठियों का आयोजन किया और 45 जिलों में जाकर अनुसूचित जातियों के लिए चल रही योजनाओं के बारे में जानकारी दी। इसके फलस्वरूप, सरकार ने अंबेडकर मूर्ति विकास योजना की शुरुआत की है, जो राष्ट्रीय स्तर के समाज सुधारकों और सांस्कृतिक विभूतियों की मूर्तियों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस योजना के अंतर्गत, योगी सरकार बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के साथ-साथ अन्य महान व्यक्तियों की मूर्तियों का सौंदर्यीकरण करेगी। आगामी 14 अप्रैल को प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधि जनता को इस योजना के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे।

भाजपा के प्रवक्ता अवनीश त्यागी का कहना है कि भाजपा ने दलित वर्ग के उत्थान के लिए सबसे अधिक काम किया है। उनका आरोप है कि पूर्व सरकारों ने सिर्फ नारेबाजी की है। सपा ने दलितों का सबसे अधिक शोषण किया है। भाजपा सरकार का ध्यान दलित उत्थान और महापुरुषों को सम्मान देने पर केंद्रित है।

वहीं, समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित होकर दलित वर्ग पर विशेष ध्यान देने की रणनीति बनाई है। पार्टी ने बसपा से आए नेताओं को आगे लाकर दलित समाज में अपनी पैठ बनाने की कोशिश तेज कर दी है।

कांग्रेस भी दलित वोटों को आकृष्ट करने के लिए सक्रिय है। हाल ही में, पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को बुलाकर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। कांग्रेस के प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने कहा कि भाजपा सिर्फ चुनावी योजनाएं लाती है, जबकि कांग्रेस ने अपने शासन में प्रभावी योजनाएं बनाई हैं।

दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी अपने पारंपरिक जाटव वोट बैंक को सुरक्षित रखने पर जोर दे रही है और अन्य दलों को चेतावनी दे रही है। मायावती अब भी दलित राजनीति की एक प्रमुख हस्ती मानी जाती हैं।

राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों के लिए सभी दलों का ध्यान दलित वोट बैंक पर केंद्रित है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध और पूर्वांचल जैसे क्षेत्रों में दलित वोट कई सीटों की हार-जीत तय कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राजनीतिक समीकरणों को भी बदल सकता है। सभी दल अपने-अपने तरीके से इस वर्ग को रिझाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे यह साबित होता है कि दलित वोट बैंक भारतीय राजनीति में कितना महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक का महत्व क्या है?
उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक का महत्व इसलिए है क्योंकि यह कई सीटों पर चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है।
भाजपा ने दलितों के लिए क्या कदम उठाए हैं?
भाजपा ने अंबेडकर मूर्ति विकास योजना शुरू की है, जिसके अंतर्गत महापुरुषों की मूर्तियों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
सपा की रणनीति क्या है?
सपा ने दलित वोटरों के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए बसपा से आए नेताओं को आगे किया है।
कांग्रेस दलितों को रिझाने के लिए क्या कर रही है?
कांग्रेस ने पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार और अन्य कार्यक्रमों के जरिए दलित वोटों को साधने की कोशिश की है।
बसपा का ध्यान किस पर है?
बसपा अपने पारंपरिक जाटव वोट बैंक को सुरक्षित रखने पर जोर दे रही है।
राष्ट्र प्रेस
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