9 अक्टूबर 2026
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यूपी राज्यसभा चुनाव 2026: BJP के 8 और सपा के 2 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित, बसपा का सफाया

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यूपी राज्यसभा चुनाव 2026: BJP के 8 और सपा के 2 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित, बसपा का सफाया

सारांश

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर BJP ने 8 और सपा ने 2 सीटें निर्विरोध जीतीं। सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह है कि बसपा का उच्च सदन से प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो गया — 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यूपी की राजनीति में शक्ति-संतुलन एक नई करवट ले चुका है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर 9 अक्टूबर 2026 को निर्विरोध निर्वाचन घोषित; 16 अक्टूबर का मतदान रद्द।
BJP के आठ उम्मीदवार जीते — जिनमें मंत्री धर्मपाल सिंह और OBC मोर्चा अध्यक्ष प्रकाश पाल शामिल।
सपा के राम गोपाल यादव दोबारा निर्वाचित; उद्योगपति धनराज परिमल नथवानी पहली बार राज्यसभा पहुंचे।
सपा की राज्यसभा में कुल संख्या बढ़कर पाँच हुई।
बसपा का उत्तर प्रदेश से राज्यसभा प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त।
नवनिर्वाचित सदस्य 25 नवंबर 2026 को कार्यकाल पूरा होने के बाद पदभार ग्रहण करेंगे।

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनावी तस्वीर 9 अक्टूबर 2026 को पूरी तरह स्पष्ट हो गई, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आठ और समाजवादी पार्टी (सपा) के दो उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। नामांकन जाँच में दो निर्दलीय प्रत्याशियों के पर्चे रद्द होने और नाम वापसी की समयसीमा तक कोई अन्य उम्मीदवार मैदान में न रहने से 16 अक्टूबर को प्रस्तावित मतदान की आवश्यकता स्वतः समाप्त हो गई।

निर्वाचन की औपचारिकताएं और प्रमाणपत्र वितरण

निर्वाचन अधिकारी अजीत कुमार वर्मा ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को लखनऊ स्थित विधानसभा परिसर में निर्विरोध निर्वाचन की औपचारिकताएं पूरी कीं और नवनिर्वाचित सदस्यों को प्रमाणपत्र जारी किए। BJP के अधिकांश उम्मीदवार स्वयं उपस्थित होकर प्रमाणपत्र प्राप्त किए। राधाकांत ओझा की ओर से उनके प्रतिनिधि और राम गोपाल यादव की ओर से पूर्व एमएलसी राकेश यादव ने प्रमाणपत्र ग्रहण किया।

BJP के नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य

BJP की ओर से उच्च सदन में जगह बनाने वालों में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह, प्रदेश OBC मोर्चा अध्यक्ष प्रकाश पाल, श्रुति गंगवार, विद्यासागर सोनकर, प्रियंका सिंह रावत, राधाकांत ओझा, गोपी कृष्ण पांडेय और राम प्रताप सिंह चौहान शामिल हैं। नवनिर्वाचित सांसद प्रकाश पाल ने कहा कि वह पिछले 36 वर्षों से पार्टी में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते आए हैं और अब सदन में प्रदेश व देश की जनता से जुड़े मुद्दे उठाएंगे।

प्रियंका सिंह रावत ने कहा कि एक सामान्य कार्यकर्ता को पार्टी ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है, और यह BJP की कार्यकर्ता-आधारित व्यवस्था का प्रमाण है। उन्होंने 2027 में उत्तर प्रदेश में BJP की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने का विश्वास जताया। प्रकाश पाल ने BJP की आठ सीटों पर जीत को आगामी विधानसभा चुनाव का संकेत बताते हुए दावा किया कि 2027 के चुनाव में BJP 80 प्रतिशत सीटें जीतेगी।

सपा के नवनिर्वाचित सदस्य और बदला समीकरण

सपा की ओर से वरिष्ठ नेता एवं राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव दोबारा निर्वाचित हुए, जबकि उद्योगपति धनराज परिमल नथवानी पहली बार राज्यसभा पहुंचे हैं। इन दोनों के निर्वाचन से उच्च सदन में सपा की कुल संख्या बढ़कर पाँच हो गई है। पार्टी के मौजूदा अन्य सदस्यों में जावेद अली, रामजी लाल सुमन और जया बच्चन शामिल हैं।

नथवानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के प्रति आभार जताते हुए कहा कि वह उत्तर प्रदेश के सर्वांगीण विकास, आधुनिक बुनियादी ढाँचे तथा युवाओं के उज्ज्वल भविष्य से जुड़े दृष्टिकोण को संसद में आगे बढ़ाने के लिए समर्पित रहेंगे।

बसपा का प्रतिनिधित्व समाप्त

इस चुनाव का सबसे उल्लेखनीय राजनीतिक परिणाम यह रहा कि उत्तर प्रदेश से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का राज्यसभा प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो गया। पहले इन 10 सीटों में BJP के पास आठ, सपा के पास एक और बसपा के पास एक सीट थी। गौरतलब है कि बसपा, जो कभी दलित राजनीति की सबसे बड़ी आवाज़ मानी जाती थी, अब उत्तर प्रदेश की इकलौती राज्यसभा उपस्थिति भी खो चुकी है — यह पार्टी के विधायी प्रतिनिधित्व में आ रही गिरावट का स्पष्ट संकेत है।

आगे क्या

वर्तमान सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को पूरा होगा, जिसके बाद ये नवनिर्वाचित सदस्य औपचारिक रूप से उच्च सदन में अपनी भूमिका ग्रहण करेंगे। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के नए राजनीतिक समीकरण — BJP गठबंधन की 8 और सपा की 2 सीटें — केंद्र सरकार की विधायी स्थिति को और मजबूत करते हैं। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले यह परिणाम BJP और सपा दोनों के लिए राज्य में अपनी-अपनी ताक़त को रेखांकित करने का अवसर बन गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक वैचारिक धारा के विधायी क्षय का प्रतीक है — जो पार्टी कभी दलित राजनीति की सबसे बुलंद संसदीय आवाज़ थी, आज उच्च सदन में शून्य पर है। BJP का आठ सीटें बनाए रखना विधायी बहुमत की दृष्टि से अपेक्षित था, लेकिन असली कहानी यह है कि सपा ने एक से दो सीटों पर छलांग लगाई और नथवानी जैसे व्यापारिक चेहरे को राज्यसभा भेजकर अपनी गठबंधन-क्षमता का संकेत दिया। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यह परिणाम राज्य में तीन-ध्रुवीय राजनीति की समाप्ति और दो-ध्रुवीय मुकाबले की शुरुआत को पुख्ता करता है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव 2026 में कितनी सीटें थीं और किसने जीतीं?
यूपी में राज्यसभा की कुल 10 सीटों पर चुनाव था। BJP के 8 और सपा के 2 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए। दो निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चे नामांकन जाँच में रद्द हो गए, जिससे 16 अक्टूबर को प्रस्तावित मतदान की जरूरत नहीं रही।
BJP के कौन-से आठ उम्मीदवार राज्यसभा पहुंचे?
BJP की ओर से धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल, श्रुति गंगवार, विद्यासागर सोनकर, प्रियंका सिंह रावत, राधाकांत ओझा, गोपी कृष्ण पांडेय और राम प्रताप सिंह चौहान निर्वाचित हुए। धर्मपाल सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं, जबकि प्रकाश पाल प्रदेश OBC मोर्चा के अध्यक्ष हैं।
सपा के किन दो उम्मीदवारों को राज्यसभा में जगह मिली?
सपा के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव दोबारा निर्वाचित हुए और उद्योगपति धनराज परिमल नथवानी पहली बार राज्यसभा पहुंचे। इन दोनों के आने से उच्च सदन में सपा की कुल सदस्य संख्या बढ़कर पाँच हो गई है।
बसपा का उत्तर प्रदेश से राज्यसभा प्रतिनिधित्व कैसे समाप्त हुआ?
इन 10 सीटों में पहले बसपा के पास एक सीट थी, जो अब BJP के खाते में चली गई। बसपा इस बार कोई उम्मीदवार उतारने की स्थिति में नहीं रही, जिससे उत्तर प्रदेश से उसका राज्यसभा प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो गया।
नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य कब से पदभार ग्रहण करेंगे?
वर्तमान सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को पूरा होगा। उसके बाद ये नवनिर्वाचित सदस्य औपचारिक रूप से राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। निर्वाचन अधिकारी ने 9 अक्टूबर 2026 को ही प्रमाणपत्र जारी कर दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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