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यूपीआई लेनदेन सितंबर में 23% उछला, ₹29.37 लाख करोड़ की रिकॉर्ड वैल्यू; 'नो यूपीआई डे' वापस

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यूपीआई लेनदेन सितंबर में 23% उछला, ₹29.37 लाख करोड़ की रिकॉर्ड वैल्यू; 'नो यूपीआई डे' वापस

सारांश

सितंबर 2026 में UPI लेनदेन 23% उछलकर 24.07 अरब पर पहुँचा और मूल्य ₹29.37 लाख करोड़ रहा। साथ ही व्यापारियों ने वित्त मंत्री सीतारमण से मुलाकात के बाद 'नो यूपीआई डे' का आह्वान वापस लिया — MDR विवाद अभी सुलझा नहीं है।

मुख्य बातें

NPCI के अनुसार सितंबर 2026 में UPI लेनदेन की संख्या 23% बढ़कर 24.07 अरब हुई।
UPI का कुल लेनदेन मूल्य 18% उछलकर ₹29.37 लाख करोड़ पर पहुँचा; प्रतिदिन औसतन 80.2 करोड़ लेनदेन।
IMPS के जरिए फंड ट्रांसफर 18% बढ़कर ₹7.06 लाख करोड़ रहा।
व्यापारी संगठनों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिलकर 2 अक्टूबर को प्रस्तावित 'नो यूपीआई डे' वापस लिया।
₹2,000 से अधिक के P2M लेनदेन पर 0.4% MDR प्रस्तावित; 96% से अधिक मर्चेंट लेनदेन इसके दायरे से बाहर।
सभी P2P लेनदेन और ₹1 लाख तक मासिक प्राप्तियों वाले व्यापारियों के लिए UPI निःशुल्क बना रहेगा।

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के 1 अक्टूबर 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के लेनदेन की संख्या सालाना आधार पर 23 प्रतिशत बढ़कर 24.07 अरब हो गई। लेनदेन का कुल मूल्य भी 18 प्रतिशत उछलकर ₹29.37 लाख करोड़ पर पहुँच गया, जो डिजिटल भुगतान की बढ़ती स्वीकार्यता का संकेत है।

सितंबर के मुख्य आंकड़े

NPCI के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में प्रतिदिन औसतन 80.2 करोड़ UPI लेनदेन हुए। इन लेनदेनों का औसत दैनिक मूल्य ₹97,913 करोड़ रहा — जो देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था की गहराई को उजागर करता है।

तुलनात्मक रूप से, अगस्त 2026 में UPI लेनदेन की संख्या सालाना आधार पर 22 प्रतिशत बढ़कर 24.51 अरब रही थी और लेनदेन मूल्य 20 प्रतिशत बढ़कर ₹29.82 लाख करोड़ था। यानी संख्या में सितंबर कुछ पीछे रहा, लेकिन वृद्धि दर में तेज़ी बनी रही।

IMPS के आंकड़े भी मज़बूत

NPCI के आंकड़ों के अनुसार, तत्काल भुगतान सेवा (IMPS) के जरिए सितंबर में फंड ट्रांसफर की राशि सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़कर ₹7.06 लाख करोड़ हो गई। IMPS के ज़रिए प्रतिदिन औसतन 1.18 करोड़ लेनदेन हुए और औसत दैनिक लेनदेन राशि ₹23,530 करोड़ रही।

'नो यूपीआई डे' का आह्वान वापस, व्यापारियों की बैठक

इसी बीच, प्रमुख व्यापारी संगठनों ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ नई दिल्ली में बैठक के बाद 2 अक्टूबर को प्रस्तावित 'नो यूपीआई डे' का अपना आह्वान वापस ले लिया है।

विभिन्न राज्यों के करीब 20 व्यापारिक प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री से मिलकर ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराईं। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चांदनी चौक से सांसद और कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने किया।

व्यापारियों का तर्क है कि यह शुल्क छोटे और मध्यम कारोबारों पर आर्थिक बोझ डाल सकता है और डिजिटल भुगतान अपनाने की रफ्तार को धीमा कर सकता है।

MDR का दायरा और आम जनता पर असर

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ₹2,000 तक के लेनदेन कुल मर्चेंट UPI लेनदेन की संख्या के 96 प्रतिशत से अधिक हैं, जिन पर MDR शून्य बना रहेगा और उन पर कोई GST भी नहीं लगेगा। जिन व्यापारियों की मासिक UPI प्राप्तियाँ ₹1 लाख तक हैं, उन्हें MDR का भुगतान नहीं करना होगा।

व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) लेनदेन पर नए ढाँचे का कोई असर नहीं पड़ेगा — राशि चाहे कितनी भी हो, सभी P2P लेनदेन के लिए UPI पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। यह स्पष्टीकरण आम उपभोक्ताओं की बड़ी चिंता को दूर करता है।

आगे की राह

गौरतलब है कि यूपीआई ने पिछले कुछ वर्षों में निरंतर दो अंकों की वृद्धि दर्ज की है और यह भारत के वित्तीय समावेशन की रीढ़ बन चुका है। MDR विवाद का अंतिम समाधान अभी बाकी है, और व्यापारी संगठनों तथा सरकार के बीच अगले दौर की बातचीत इस नीति की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कहानी MDR विवाद में छिपी है। सरकार का यह तर्क कि केवल 4% मर्चेंट लेनदेन शुल्क के दायरे में आएंगे, संख्यात्मक रूप से सही हो सकता है, परंतु छोटे व्यापारियों की आशंका यह है कि एक बार MDR का सिद्धांत स्थापित हो गया तो सीमा धीरे-धीरे नीचे खिसक सकती है — जो वैश्विक स्तर पर एक जाना-पहचाना पैटर्न है। 'नो यूपीआई डे' का वापस लिया जाना वित्त मंत्रालय की सक्रियता दर्शाता है, लेकिन यह मूल प्रश्न का उत्तर नहीं है। जब तक MDR नीति पर अंतिम निर्णय नहीं होता, डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र पर अनिश्चितता का साया बना रहेगा।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सितंबर 2026 में UPI लेनदेन कितना बढ़ा?
NPCI के आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2026 में UPI लेनदेन की संख्या सालाना आधार पर 23% बढ़कर 24.07 अरब हो गई और कुल मूल्य 18% बढ़कर ₹29.37 लाख करोड़ पर पहुँचा। प्रतिदिन औसतन 80.2 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए।
'नो यूपीआई डे' क्या था और इसे क्यों वापस लिया गया?
व्यापारी संगठनों ने ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.4% MDR शुल्क के प्रस्ताव के विरोध में 2 अक्टूबर को 'नो यूपीआई डे' मनाने का आह्वान किया था। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बैठक के बाद व्यापारियों ने यह आह्वान वापस ले लिया।
MDR शुल्क किन लेनदेनों पर लागू होगा?
प्रस्तावित MDR केवल ₹2,000 से अधिक के P2M (व्यक्ति-से-व्यापारी) लेनदेन पर लागू होगा। ₹2,000 तक के सभी लेनदेन और सभी P2P (व्यक्ति-से-व्यक्ति) लेनदेन पर MDR शून्य रहेगा। जिन व्यापारियों की मासिक UPI प्राप्तियाँ ₹1 लाख तक हैं, उन्हें भी MDR नहीं देना होगा।
IMPS के जरिए सितंबर में कितना फंड ट्रांसफर हुआ?
NPCI के अनुसार सितंबर 2026 में IMPS के जरिए फंड ट्रांसफर सालाना आधार पर 18% बढ़कर ₹7.06 लाख करोड़ हो गया। प्रतिदिन औसतन 1.18 करोड़ लेनदेन हुए और औसत दैनिक लेनदेन राशि ₹23,530 करोड़ रही।
क्या आम यूजर के P2P UPI भुगतान पर कोई शुल्क लगेगा?
नहीं। सरकार के अनुसार नए MDR ढाँचे का व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) लेनदेन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। राशि चाहे कितनी भी हो, सभी P2P UPI भुगतान पूरी तरह निःशुल्क बने रहेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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