उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने एम्स रायपुर दीक्षांत समारोह में दिए स्वर्ण पदक, नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ की तारीफ
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने 2 सितंबर 2026 को रायपुर के एक दिवसीय दौरे के दौरान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह में मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक और प्रमाण-पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ के नक्सलवाद से मुक्त होकर शांति और विकास की राह पर बढ़ने की सराहना की।
दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति का संबोधन
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने छात्रों को संबोधित करते हुए एम्स रायपुर को बदलाव का प्रतीक बताया। उन्होंने संस्थान की एडवांस्ड हेल्थकेयर, रिसर्च और अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख किया, जिनमें राज्य का पहला स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट विशेष रूप से उल्लेखनीय है। गौरतलब है कि एम्स रायपुर की आधारशिला मई 2009 में रखी गई थी और यह संस्थान 2012 में कार्यशील हुआ।
नक्सलवाद से शांति की ओर — छत्तीसगढ़ की सराहना
उपराष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने नक्सलवाद, डर और अभाव के माहौल से निकलकर शांति, तरक्की और अवसरों की ओर उल्लेखनीय यात्रा तय की है। उन्होंने रेखांकित किया कि जिन इलाकों में कभी हिंसा का बोलबाला था, वहाँ आज सड़कें, स्कूल, अस्पताल, कनेक्टिविटी और निवेश देखने को मिल रहे हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब राज्य सरकार नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ा रही है।
समारोह में उपस्थित प्रमुख हस्तियाँ
इस दीक्षांत समारोह में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका, केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल, छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल, एम्स रायपुर के प्रेसिडेंट प्रो. (डॉ.) संजीव हांडा और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल उपस्थित रहे।
सुरक्षा व्यवस्था और मरीजों पर असर
उपराष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए रायपुर में सरोना रिंग रोड से टाटीबंध चौक तक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई। रिंग रोड नंबर एक पर जगह-जगह बैरीकेट्स लगाए गए और चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा। एम्स ओपीडी में आने वाले मरीजों के लिए प्रवेश मार्ग अस्थायी रूप से बदले गए — गेट नंबर एक से एंट्री और गेट नंबर तीन से ओपीडी की पहुँच निर्धारित की गई। वीआईपी मूवमेंट के कारण गेट नंबर चार और गेट नंबर पाँच बंद रखे गए, जिससे मरीजों को रजिस्ट्रेशन काउंटर तक पहुँचने के लिए अतिरिक्त दूरी पैदल तय करनी पड़ी।
एम्स रायपुर की पृष्ठभूमि
एम्स रायपुर की स्थापना 2012 में हुई थी और यह मध्य भारत में उन्नत चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। तीसरा दीक्षांत समारोह संस्थान की बढ़ती अकादमिक और चिकित्सा उत्कृष्टता का प्रमाण है। आगामी वर्षों में संस्थान के और विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है।