उत्तराखंड में भैरवनाथ का अद्भुत मंदिर: जहां न्याय की याचिका पर मिलता है त्वरित न्याय
सारांश
Key Takeaways
- चिताई गोलू देवता मंदिर में भक्त न्याय की याचिकाएं डालते हैं।
- गोलू देवता को न्याय का देवता माना जाता है।
- मंदिर में लटकी हजारों घंटियां भक्तों की इच्छाओं का प्रतीक हैं।
- गोलू देवता के अद्भुत अनुभव भक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
- यह मंदिर अल्मोड़ा से ८-१० किलोमीटर दूर है।
अल्मोड़ा, १३ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत एक ऐसा देश है, जहां अनेक भव्य मंदिर और उनसे जुड़ी अद्भुत कहानियां हैं। ये केवल ईंट-पत्थरों से बने देवालय नहीं, बल्कि भक्तों की आस्था और विश्वास का प्रतीक भी हैं। ऐसा ही एक मंदिर है भैरवनाथ का, जो उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित है, जहां लोग न्याय की तलाश में आते हैं। इसे न्याय के देवता का मंदिर भी कहा जाता है।
यह मंदिर चिताई गोलू देवता मंदिर के नाम से जाना जाता है, जिसे भगवान शिव के अवतार भैरवनाथ या गौर भैरव के रूप में पूजा जाता है। यहां भक्त लिखित याचिकाएं डालते हैं और मान्यता है कि गोलू देवता त्वरित न्याय देते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। मंदिर की पहचान वहां लटकी हुई हजारों तांबे की घंटियों से होती है। जब किसी भक्त की इच्छा पूरी होती है, तो वह मंदिर में घंटी चढ़ाता है, इसी कारण आज वहां हजारों घंटियां लटकी हुई हैं। कई भक्त अदालती मामलों की याचिकाएं भी मंदिर में डालते हैं।
किंवदंती के अनुसार, एक किसान का नाम राम सिंह था, जो अल्मोड़ा के पास के गांव में रहते थे। उनके भाई के साथ जमीन के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था। अदालत में सालों गुज़र गए, लेकिन कोई न्याय नहीं मिला। फिर एक दिन किसी ने उन्हें चिताई गोलू देवता मंदिर के बारे में बताया। राम सिंह ने विश्वास के साथ मंदिर पहुंचकर अपनी समस्या लिखकर याचिका डाल दी और न्याय की याचना की।
कुछ महीनों बाद आश्चर्यजनक रूप से उनके भाई ने खुद बुलाकर समझौता कर लिया और जमीन का सही बंटवारा हो गया। राम सिंह मानते हैं कि गोलू देवता ने ही उनके पक्ष में त्वरित न्याय दिलाया। इच्छा पूरी होने पर उन्होंने मंदिर में एक बड़ी घंटी चढ़ाई, और यह परंपरा आज भी जारी है।
बातें करते हुए, किंवदंतियों में गोलू देवता को गौर भैरव के रूप में भगवान शिव का अवतार माना जाता है। कुमाऊं क्षेत्र में इन्हें न्याय का देवता कहा जाता है। लोक कथा के अनुसार श्री कल्याण सिंह बिष्ट का जन्म कत्युडा गांव में हुआ था। वे बहुत छोटी उम्र में शक्तिशाली हो गए और क्षेत्र के सभी दुष्टों का नाश कर लोगों की रक्षा करने लगे। लेकिन एक षड्यंत्र में उनके निकट रिश्तेदार ने कुल्हाड़ी से उनका सिर काट दिया। उनका शरीर डाना गोलू गैराड़ में गिरा और सिर कपड़खान में। यहां गोलू देवता सफेद कपड़े और सफेद पगड़ी में विराजमान हैं। उनके भाई कलवा भैरव के रूप में पूजे जाते हैं। पास में देवी शक्ति का मंदिर भी है।
कुमाऊं के कई गांवों में गोलू देवता को कुल देवता या इष्ट देवता के रूप में पूजा जाता है। चिताई के अलावा गैराड़, चंपावत, और घोड़ाखाल में भी उनके प्रसिद्ध मंदिर हैं।
चिताई गोलू देवता मंदिर अल्मोड़ा शहर से मात्र ८-१० किलोमीटर दूर जागेश्वर धाम रोड पर स्थित है। अल्मोड़ा से टैक्सी, बस या निजी वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है। गैराड़ गोलू मंदिर बिनसर वन्यजीव अभ्यारण्य के मुख्य द्वार से करीब २ किलोमीटर और अल्मोड़ा से लगभग १५ किलोमीटर दूर है। पूरे क्षेत्र का सड़क नेटवर्क अच्छा है। दिल्ली या अन्य शहरों से टैक्सी लेकर सीधे पहुंचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है, जो अल्मोड़ा से करीब ११० किलोमीटर दूर है।
काठगोदाम से दिल्ली, लखनऊ और देहरादून के लिए ट्रेनें उपलब्ध हैं। स्टेशन से अल्मोड़ा तक टैक्सी या बस ली जा सकती है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर में है, जो अल्मोड़ा से लगभग १२७ किलोमीटर दूर है। पंतनगर से अल्मोड़ा पहुंचकर आगे टैक्सी से मंदिर तक जाया जा सकता है।