7 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

उत्तराखंड मदरसा बोर्ड भंग: जदयू नेता बलियावी बोले — अल्पसंख्यक समुदाय में गहरी निराशा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
उत्तराखंड मदरसा बोर्ड भंग: जदयू नेता बलियावी बोले — अल्पसंख्यक समुदाय में गहरी निराशा

सारांश

NDA सहयोगी जदयू के नेता गुलाम रसूल बलियावी ने उत्तराखंड मदरसा बोर्ड भंग किए जाने को संविधान-विरोधी करार दिया। उन्होंने साफ कहा — अल्पसंख्यक समुदाय में खुशी नहीं, निराशा है। गठबंधन धर्म के बावजूद यह बयान BJP शासित राज्य की नीति पर सीधा सवाल है।

मुख्य बातें

जदयू नेता गुलाम रसूल बलियावी ने 7 जुलाई को पटना में उत्तराखंड मदरसा बोर्ड भंग किए जाने को 'पूरी तरह गलत' बताया।
बलियावी के अनुसार, मदरसा बोर्ड भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है और इसे भंग करना किसी भी लिहाज से उचित नहीं।
उन्होंने कहा कि इस फैसले से अल्पसंख्यक समुदाय में खुशी नहीं बल्कि गहरी निराशा है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मदरसा शिक्षा को सामान्य शिक्षा के समकक्ष लाने के लिए उल्लेखनीय कदम उठाए — ऐसा बलियावी ने रेखांकित किया।
जदयू, BJP के नेतृत्व वाले NDA का सहयोगी है, जिससे यह बयान राजनीतिक रूप से विशेष महत्त्व रखता है।

जनता दल यूनाइटेड (जदयू) नेता गुलाम रसूल बलियावी ने उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को भंग किए जाने के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। पटना में मंगलवार, 7 जुलाई को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह निर्णय संविधान-प्रदत्त अधिकारों के विरुद्ध है और अल्पसंख्यक समुदाय में खुशी नहीं, बल्कि निराशा का माहौल है।

बलियावी का मुख्य तर्क

बलियावी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म के अनुसार जीवन जीने, उसका प्रचार-प्रसार करने और परंपराओं का निर्वहन करने का पूरा अधिकार देता है। उनके अनुसार, 'मदरसा बोर्ड को भंग करने की जगह अगर बहुसंख्यक समुदाय के लोगों को नौकरी दे दी होती, तो वो उनके लिए फायदेमंद होता।'

उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग यह मान रहे हैं कि इस फैसले से अल्पसंख्यक समुदाय प्रसन्न होगा, 'वो उनकी गलतफहमी है।' उनके मुताबिक, मदरसा बोर्ड का गठन धार्मिक शिक्षा के दायरे को व्यापक बनाने के उद्देश्य से किया गया था और इसे भंग करना किसी भी लिहाज से उचित नहीं है।

नीतीश कुमार के प्रयासों का उल्लेख

बलियावी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में मदरसा शिक्षा को सुदृढ़ करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने मदरसा बोर्ड के दायरे को विस्तार देने और मदरसों में दी जाने वाली तालीम को सामान्य शिक्षा के समकक्ष लाने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि वहाँ से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को रोज़गार के अवसर मिल सकें।

राष्ट्रीय संदर्भ और व्यापक असर

बलियावी ने कहा कि उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड को भंग किए जाने की घटना को 'पूरा देश देख रहा है।' यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में मदरसा शिक्षा की प्रासंगिकता और उसके विनियमन को लेकर बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय भी मदरसा शिक्षा से जुड़े विभिन्न मामलों पर विचार कर चुका है।

जदयू नेता ने यह भी रेखांकित किया कि ऐसी स्थिति को 'किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।' उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब जदयू, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सहयोगी है — जो इस बयान को राजनीतिक रूप से और भी महत्त्वपूर्ण बनाती है।

आगे की स्थिति

फिलहाल उत्तराखंड सरकार की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अल्पसंख्यक समुदाय के संगठनों और विपक्षी दलों की ओर से इस फैसले के विरोध में और आवाज़ें उठने की संभावना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को क्यों भंग किया गया?
उत्तराखंड सरकार ने मदरसा बोर्ड को भंग करने का फैसला लिया, हालाँकि इस निर्णय के विस्तृत कारण सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किए गए हैं। जदयू नेता बलियावी सहित कई नेताओं ने इस फैसले को संविधान-विरोधी बताते हुए विरोध जताया है।
जदयू नेता गुलाम रसूल बलियावी ने क्या कहा?
बलियावी ने 7 जुलाई को पटना में कहा कि मदरसा बोर्ड को भंग करना 'पूरी तरह गलत' है और यह संविधान-प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले से अल्पसंख्यक समुदाय में खुशी नहीं, बल्कि निराशा है।
क्या जदयू NDA का हिस्सा होने के बावजूद BJP की नीति का विरोध कर सकती है?
जदयू, BJP के नेतृत्व वाले NDA का सहयोगी दल है, लेकिन गठबंधन में रहते हुए भी दल अपने नेताओं के माध्यम से असहमति व्यक्त करते रहे हैं। बलियावी का यह बयान इसी प्रवृत्ति का हिस्सा है, जो अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच जदयू की स्थिति को रेखांकित करता है।
नीतीश कुमार ने मदरसा शिक्षा के लिए क्या किया था?
बलियावी के अनुसार, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मदरसा बोर्ड के दायरे को विस्तार देने और मदरसों की तालीम को सामान्य शिक्षा के समकक्ष बनाने के लिए कई कदम उठाए, जिससे मदरसा छात्रों को रोज़गार के अवसर मिल सकें।
इस फैसले का अल्पसंख्यक समुदाय पर क्या असर पड़ेगा?
बलियावी के मुताबिक, मदरसा बोर्ड भंग होने से अल्पसंख्यक समुदाय में निराशा का माहौल है। धार्मिक शिक्षा के संस्थागत ढाँचे पर इसका सीधा असर पड़ेगा और समुदाय के छात्रों के शैक्षिक अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले