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क्या उत्तराखंड की मंत्री के पति के बयान पर एआईएमआईएम ने मोर्चा खोला, भाजपा की चुप्पी पर सवाल उठाए?

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क्या उत्तराखंड की मंत्री के पति के बयान पर एआईएमआईएम ने मोर्चा खोला, भाजपा की चुप्पी पर सवाल उठाए?

सारांश

उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्य के पति द्वारा महिलाओं के खिलाफ की गई विवादास्पद टिप्पणी ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। एआईएमआईएम ने इसकी निंदा की है और भाजपा की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। क्या यह विवाद राजनीतिक माहौल को और गरमा देगा?

मुख्य बातें

महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक बयान राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया कानूनी कार्रवाई की मांग महिला आयोग का संज्ञान भाजपा की चुप्पी पर सवाल

पटना, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड की महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू द्वारा महिलाओं के प्रति की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की है और भाजपा के नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।

एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन ने उत्तराखंड में भाजपा की मंत्री रेखा आर्य के पति द्वारा बिहार की महिलाओं के लिए दिए गए आपत्तिजनक बयान की कड़ी निंदा की है कि बिहार में 20–25 हजार रुपये में लड़कियाँ उपलब्ध हो जाती हैं। उन्होंने इसे महिलाओं और बिहार की अस्मिता का अपमान बताते हुए कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

आदिल हसन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस तरह की मानसिकता वाले लोग बिहार आएंगे, तो जनता उन्हें जूते की माला पहनाकर विरोध दर्ज कराएगी। इसके अलावा उन्होंने बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी पर भी निशाना साधते हुए बिहार में बढ़ती मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर भाजपा की चुप्पी को कठघरे में खड़ा किया।

हाल ही में मधुबनी में हुई लिंचिंग की घटना का उल्लेख करते हुए आदिल हसन ने राष्ट्रीय जनता दल अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अली अशरफ फातमी से भी इस मुद्दे पर स्पष्ट और मुखर रुख अपनाने की मांग की।

बता दें कि इस बयान को लेकर बिहार में विपक्षी दल के नेता भाजपा पर आक्रामक हैं। बिहार में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की है। बिहार राज्य महिला आयोग ने भी मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इस टिप्पणी को बेहद संवेदनशील और महिला विरोधी बताते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

आयोग ने कहा कि बिहार की लड़कियों को एक निश्चित राशि में उपलब्ध बताने वाली टिप्पणी राज्य की महिलाओं की गरिमा, आत्मसम्मान और प्रतिष्ठा पर सीधा हमला है। इस मामले को लेकर राजद महिला प्रकोष्ठ ने शनिवार को पटना में मार्च निकाला था।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह राजनीतिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का भी प्रश्न है। सभी राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर एकजुटता से खड़ा होना चाहिए, ताकि समाज में महिलाओं की स्थिति को मजबूत किया जा सके।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गिरधारी लाल साहू का विवादास्पद बयान क्या था?
गिरधारी लाल साहू ने कहा था कि बिहार में 20-25 हजार रुपये में लड़कियाँ उपलब्ध हो जाती हैं, जिसे महिलाओं के प्रति अपमानजनक माना गया है।
एआईएमआईएम ने इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
एआईएमआईएम ने इस बयान की कड़ी निंदा की है और भाजपा के नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।
बिहार राज्य महिला आयोग ने इस मामले में क्या कदम उठाया?
बिहार राज्य महिला आयोग ने इस टिप्पणी को महिला विरोधी बताते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
क्या इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने कोई प्रतिक्रिया दी है?
हाँ, बिहार में विपक्षी दलों ने इस बयान की कड़ी निंदा की है और भाजपा पर आक्रामक रुख अपनाया है।
क्या इस मामले में कोई कार्रवाई हुई है?
अभी तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, लेकिन महिला आयोग ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया है।
राष्ट्र प्रेस
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