उत्तराखंड की प्रीमियम लीची यूरोप पहुँची: देहरादून से इटली रवाना हुई पहली खेप, किसानों को घरेलू दाम से 25% अधिक मूल्य
सारांश
मुख्य बातें
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने गुरुवार, 19 जून 2025 को देहरादून से इटली के लिए उत्तराखंड की ताज़ी प्रीमियम लीची की पहली खेप के निर्यात में सफलतापूर्वक सहायता की। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि यह उपलब्धि उत्तराखंड के बागवानी उत्पादों के यूरोपीय बाज़ार में प्रवेश की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
खेप का विवरण और महत्त्व
पहली खेप में एक मीट्रिक टन ताज़ी लीची इटली भेजी गई है। मंत्रालय के अनुसार, यह निर्यात भारत के ताज़े फलों के लिए निर्यात गंतव्यों में विविधता लाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है और हिमालयी क्षेत्र के प्रीमियम उत्पादों को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का प्रयास है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार कृषि निर्यात को बढ़ावा देकर किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य पर ज़ोर दे रही है।
देहरादून लीची की विशेषताएँ
देहरादून की लीची अपनी विशिष्ट मिठास, आकर्षक लाल रंग, मनमोहक सुगंध और उत्कृष्ट गूदे के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जाती है। यह क्षेत्र रोज़ सेंटेड, कलकत्तिया और बेदाना जैसी प्रसिद्ध किस्मों के उत्पादन के लिए जाना जाता है। देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और उधम सिंह नगर जिलों की अनुकूल कृषि-जलवायु परिस्थितियाँ इस फल की उच्च गुणवत्ता में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।
किसानों की आय पर असर
मंत्रालय के मुताबिक, इस निर्यात पहल के परिणामस्वरूप उत्पादकों को घरेलू बाज़ार दरों की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत अधिक मूल्य प्राप्त हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पद्धतियों को अपनाने और निर्यात-उन्मुख बागवानी में किसानों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। गौरतलब है कि यह पहल उत्तराखंड के उन छोटे किसानों के लिए विशेष रूप से लाभकारी हो सकती है, जो अब तक केवल स्थानीय मंडियों पर निर्भर थे।
एपीडा की भूमिका और आगे की राह
एपीडा ने बाज़ार विकास पहलों, गुणवत्ता आश्वासन तंत्रों, अवसंरचनागत सहायता और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से इस निर्यात को संभव बनाया। मंत्रालय ने कहा कि एपीडा किसानों की उच्च मूल्य वाले अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँच बढ़ाने के उद्देश्य से भारत के कृषि-निर्यात एजेंडे को निरंतर आगे बढ़ाता रहेगा। यह सफलता भविष्य में उत्तराखंड के अन्य बागवानी उत्पादों — जैसे सेब, माल्टा और काफल — के यूरोपीय निर्यात की संभावनाओं का भी द्वार खोलती है।