उत्तरकाशी: मलबे में दबे प्राचीन कल्पकेदार मंदिर को बचाने के लिए धराली के ग्रामीणों ने शुरू की खुदाई
सारांश
मुख्य बातें
उत्तरकाशी जिले के धराली में 5 अगस्त 2025 को खीर गंगा में आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे के प्रवाह में पूरी तरह दब गए प्राचीन कल्पकेदार मंदिर को पुनः बाहर निकालने की दिशा में स्थानीय ग्रामीणों ने ठोस पहल की है। शारदीय नवरात्र के पहले दिन रविवार को मंदिर समिति और ग्रामीणों ने धार्मिक अनुष्ठान के साथ खुदाई कार्य शुरू करवाया, जो धराली की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को बचाने का प्रयास माना जा रहा है।
खुदाई का शुभारंभ और धार्मिक अनुष्ठान
प्राचीन कल्पकेदार मंदिर समिति और धराली के ग्रामीणों ने क्षेत्र के आराध्य सोमेश्वर देवता की डोली की उपस्थिति में हवन-पूजन और भूमि पूजन संपन्न किया। इसके पश्चात मंदिर को मलबे से बाहर निकालने के लिए खुदाई का कार्य विधिवत आरंभ करवाया गया। समिति अध्यक्ष राजेश पंवार और सचिव संजय पंवार के अनुसार, आपदा की पहली बरसी यानी 5 अगस्त 2026 को ग्रामीणों ने सोमेश्वर देवता से खुदाई की अनुमति माँगी थी, और नवरात्र के शुभ अवसर पर देवडोली की उपस्थिति में यह कार्य शुरू किया गया।
मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, धराली क्षेत्र में कभी लगभग 240 मंदिरों का समूह हुआ करता था, जिनमें कल्पकेदार मंदिर का स्थान सर्वोच्च था। भगवान शिव को समर्पित यह प्राचीन मंदिर चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक पड़ाव रहा है। इससे जुड़ी पौराणिक कथाएं, ऐतिहासिक मान्यताएं और पीढ़ियों से चली आ रही जनश्रुतियाँ क्षेत्र के सामाजिक जीवन की अभिन्न पहचान रही हैं। हिमालयी शिव उपासना की यह परंपरा धराली की सांस्कृतिक आत्मा से जुड़ी है।
आपदा और उसके बाद की स्थिति
5 अगस्त 2025 को खीर गंगा में आई भीषण बाढ़ ने धराली में व्यापक तबाही मचाई थी। इस आपदा में भारी मात्रा में मलबा आने से कल्पकेदार मंदिर पूरी तरह दब गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर को पहले भी कई बार मलबे से नुकसान पहुँचा था, लेकिन हर बार ग्रामीणों के सामूहिक प्रयासों से इसे बाहर निकाला जाता रहा। इस बार मलबे की अत्यधिक मोटाई के कारण खुदाई कार्य असाधारण रूप से चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
सरकार का आश्वासन, लेकिन कार्रवाई नहीं
मंदिर समिति पदाधिकारियों के अनुसार, उत्तराखंड सरकार की ओर से पहले मंदिर को मलबे से बाहर निकालने का आश्वासन दिया गया था, किंतु उनके अनुसार अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी। इसी कारण ग्रामीणों ने अपने स्तर पर पहल करते हुए खुदाई शुरू करने का निर्णय लिया। एक्सकेवेटर मशीन से प्रतिदिन लगभग आठ घंटे खुदाई किए जाने की योजना है, जिस पर प्रतिदिन करीब ₹40 हजार खर्च होने का अनुमान है।
सामुदायिक भागीदारी और आगे की उम्मीद
मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष विपेंद्र पंवार, ग्राम प्रधान अजय नेगी, युवक मंगल दल के अध्यक्ष शुभम पंवार सहित महिला मंगल दल और कीर्तन मंडली के सदस्य इस पहल में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि व्यवस्थित खुदाई के दौरान मंदिर की मूल संरचना, प्रवेश द्वार, शिवलिंग अथवा स्थापत्य से जुड़े अन्य अवशेष सामने आ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अवशेषों का सुरक्षित निष्कर्षण सुनिश्चित करने के लिए पुरातत्व विशेषज्ञों की निगरानी भी आवश्यक होगी।
यह पहल धराली के इतिहास और धार्मिक विरासत को संजोने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है — अब सभी की निगाहें खुदाई के आगे बढ़ने और मंदिर के अवशेषों के सामने आने पर टिकी हैं।