5 अगस्त 2026
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धराली आपदा के एक साल बाद उत्तरकाशी में पुनर्निर्माण की नई रफ्तार, ₹5 लाख तक की सहायता वितरित

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धराली आपदा के एक साल बाद उत्तरकाशी में पुनर्निर्माण की नई रफ्तार, ₹5 लाख तक की सहायता वितरित

सारांश

धराली-हर्षिल आपदा के एक साल बाद उत्तरकाशी में राहत और पुनर्निर्माण की तस्वीर बदल रही है — मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख, 115 बेघर परिवारों को ₹5.75 करोड़ और होटल व्यवसायियों को ₹6.83 करोड़ से अधिक की सहायता वितरित। लेकिन कुछ परियोजनाएं अभी भी प्रगति पर हैं।

मुख्य बातें

धराली-हर्षिल आपदा के एक वर्ष बाद उत्तरकाशी में राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों ने नई गति पकड़ी है।
आपदा में मृतकों के आश्रितों को एसडीआरएफ और मुख्यमंत्री राहत कोष से कुल ₹5 लाख प्रति परिवार की सहायता दी गई; 19 लापता व्यक्तियों को मृत घोषित कर सहायता प्रदान की गई।
पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त 115 भवनों के स्वामियों को कुल ₹5.75 करोड़ की आवास सहायता वितरित।
होटल स्वामियों को ₹6.83 करोड़ से अधिक तथा बागवानों को ₹1.15 करोड़ से अधिक की सहायता सीधे खातों में भेजी गई।
सिंचाई विभाग ने ₹3.85 करोड़ के 15 सुरक्षात्मक कार्य स्वीकृत किए; लोक निर्माण विभाग ने ₹88.25 लाख के सभी सड़क कार्य पूरे किए।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने स्थायी पुनर्वास और नियमित समीक्षा का संकल्प दोहराया।

उत्तरकाशी के धराली-हर्षिल क्षेत्र में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के ठीक एक वर्ष बाद राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के कार्यों ने उल्लेखनीय गति पकड़ी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन और जिला प्रशासन के समन्वित प्रयासों से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता, आवास, आजीविका पुनरुद्धार और आधारभूत सुविधाओं की बहाली का लाभ निरंतर पहुँचाया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार, राहत कार्यों के साथ-साथ भविष्य में आपदा जोखिम कम करने के लिए सुरक्षात्मक परियोजनाओं पर भी तेज़ी से काम जारी है।

मृतकों के आश्रितों और घायलों को सहायता

आपदा में जान गँवाने वालों के आश्रितों को एसडीआरएफ मानकों के तहत ₹4 लाख तथा मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹1 लाख — यानी कुल ₹5 लाख — की सहायता प्रदान की गई है। शासन की गाइडलाइन के अनुसार, 19 लापता व्यक्तियों को मृत घोषित कर उनके आश्रितों को भी आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। इसके अतिरिक्त 18 घायलों को निर्धारित मानकों के अनुसार राहत राशि उपलब्ध कराई गई।

आवास और किराया सहायता

पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त 115 आवासीय भवनों के स्वामियों को ₹5-5 लाख की दर से कुल ₹5.75 करोड़ की सहायता वितरित की गई। आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त भवनों और अन्य प्रभावित परिवारों को भी नियमानुसार राहत राशि दी गई। बेघर हुए 115 परिवारों को छह माह तक प्रति माह ₹4,000 की किराया सहायता भी प्रदान की गई।

स्थानीय अर्थव्यवस्था और बागवानी क्षेत्र का पुनरुद्धार

धराली और हर्षिल क्षेत्र के होटल व दुकान संचालकों को मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता दी गई। अब तक होटल स्वामियों को ₹6.83 करोड़ से अधिक की सहायता वितरित की जा चुकी है और शेष प्रकरणों में स्वीकृति व भुगतान की प्रक्रिया जारी है। उद्यान विभाग ने बागवानी क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए ₹2.34 करोड़ की योजनाएं संचालित कीं, जिनके तहत 256.83 मीट्रिक टन सेब का उपार्जन कर ₹1.15 करोड़ से अधिक की राशि सीधे बागवानों के खातों में भेजी गई।

कृषि विभाग ने ₹40.92 लाख की लागत से 274 किसानों को कृषि यंत्र और कृषि निवेश सामग्री शत-प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराई। सूक्ष्म सिंचाई के लिए जियो-लाइन टैंक और स्प्रिंकलर सिस्टम भी स्थापित किए गए। पशुपालन विभाग ने आपदा में मृत 235 पशुओं की क्षतिपूर्ति के लिए 13 पशुपालकों को ₹10.94 लाख की सहायता दी।

अवसंरचना और सुरक्षात्मक कार्य

सिंचाई विभाग ने भागीरथी, खीर गाड़ और तेल गाड़ नदियों में चैनलाइजेशन, मलबा हटाने, तट सुरक्षा, सुरक्षात्मक दीवार और वायर क्रेटिंग सहित ₹3.85 करोड़ की लागत से 15 सुरक्षात्मक कार्य स्वीकृत किए हैं, जिनमें से अधिकांश पूरे हो चुके हैं। लोक निर्माण विभाग, भटवाड़ी ने धराली पुल, हर्षिल मोटर मार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग संपर्क और वैकल्पिक मार्गों के सुधार सहित ₹88.25 लाख के सभी स्वीकृत कार्य पूरे कर लिए हैं, जिससे क्षेत्र में आवागमन सामान्य हो गया है।

यूरेडा, वन विभाग, विद्युत, पर्यटन, शिक्षा, खाद्य आपूर्ति और ग्राम्य विकास सहित अन्य विभागों ने सोलर स्ट्रीट लाइट, ट्रैकिंग मार्ग, स्मार्ट स्कूल, सुरक्षा दीवारें और पंचायत चौक विकास से जुड़े कई कार्य पूरे किए हैं, जबकि कुछ परियोजनाएं अभी प्रगति पर हैं।

जिला प्रशासन का संकल्प

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों का सुरक्षित और स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि सभी विभागों के समन्वय से पुनर्निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा की जा रही है और प्रत्येक पात्र परिवार तक सहायता पहुँचाने के प्रयास जारी हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून-जनित आपदाओं की पुनरावृत्ति की आशंका बनी रहती है और दीर्घकालिक सुरक्षात्मक उपाय अनिवार्य हो जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि बेघर हुए परिवार अब तक स्थायी आवास में लौटे हैं या नहीं — यह जानकारी आधिकारिक बयान में अनुपस्थित है। पहाड़ी आपदाओं में राहत वितरण और दीर्घकालिक पुनर्वास के बीच का अंतर अक्सर सुर्खियों में नहीं आता। गौरतलब है कि 'प्रगति पर' बताई गई परियोजनाओं की संख्या और समयसीमा स्पष्ट नहीं की गई, जो जवाबदेही की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। मानसून की पुनरावृत्ति के बीच सुरक्षात्मक कार्यों की गुणवत्ता और स्थायित्व की स्वतंत्र जाँच ज़रूरी होगी।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धराली-हर्षिल आपदा के पीड़ितों को कितनी आर्थिक सहायता मिली?
आपदा में मृतकों के आश्रितों को एसडीआरएफ मानकों के तहत ₹4 लाख और मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹1 लाख — कुल ₹5 लाख — की सहायता प्रदान की गई। 19 लापता व्यक्तियों को मृत घोषित कर उनके परिजनों को भी यही सहायता दी गई और 18 घायलों को निर्धारित मानकों के अनुसार राहत राशि उपलब्ध कराई गई।
उत्तरकाशी में क्षतिग्रस्त मकानों के लिए क्या सहायता दी गई?
पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त 115 आवासीय भवनों के स्वामियों को ₹5-5 लाख की दर से कुल ₹5.75 करोड़ की सहायता वितरित की गई। बेघर हुए 115 परिवारों को छह माह तक प्रति माह ₹4,000 की किराया सहायता भी दी गई।
धराली-हर्षिल के होटल और व्यापार संचालकों को क्या मिला?
स्थानीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए होटल स्वामियों को मुख्यमंत्री राहत कोष से अब तक ₹6.83 करोड़ से अधिक की सहायता वितरित की जा चुकी है। शेष प्रकरणों में स्वीकृति और भुगतान की प्रक्रिया जारी बताई गई है।
आपदा के बाद क्षेत्र में सड़क और नदी सुरक्षा के क्या कार्य हुए?
लोक निर्माण विभाग ने धराली पुल, हर्षिल मोटर मार्ग और वैकल्पिक मार्गों सहित ₹88.25 लाख के सभी स्वीकृत सड़क कार्य पूरे कर लिए हैं। सिंचाई विभाग ने भागीरथी, खीर गाड़ और तेल गाड़ में ₹3.85 करोड़ की लागत से 15 सुरक्षात्मक कार्य स्वीकृत किए हैं, जिनमें से अधिकांश पूरे हो चुके हैं।
उत्तरकाशी आपदा पुनर्वास में कृषि और बागवानी क्षेत्र के लिए क्या किया गया?
उद्यान विभाग ने ₹2.34 करोड़ की योजनाओं के तहत 256.83 मीट्रिक टन सेब का उपार्जन कर ₹1.15 करोड़ से अधिक सीधे बागवानों के खातों में भेजे। कृषि विभाग ने ₹40.92 लाख की लागत से 274 किसानों को कृषि यंत्र और सामग्री शत-प्रतिशत अनुदान पर दी, और पशुपालन विभाग ने 13 पशुपालकों को ₹10.94 लाख की सहायता प्रदान की।
राष्ट्र प्रेस
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