हत्या के प्रयास का मामला कमजोर: मंत्री वीणा जॉर्ज के बयान ने कन्नूर केएसयू केस पलटा
सारांश
Key Takeaways
- कन्नूर रेलवे स्टेशन पर फरवरी 2025 में केएसयू के 5 कार्यकर्ताओं पर धारा 307 (हत्या का प्रयास) दर्ज की गई थी।
- स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने जांच टीम को दिए बयान में केवल धक्का-मुक्की की पुष्टि की, हथियार से हमले का कोई उल्लेख नहीं किया।
- सीसीटीवी फुटेज, चोट प्रमाण पत्र और पुलिस बयान — किसी में भी हत्या के प्रयास के साक्ष्य नहीं मिले।
- पांचों आरोपी दो सप्ताह से अधिक जेल में रहे, इसके बाद जमानत मिली।
- रेलवे पुलिस अब चार्जशीट से धारा 307 हटाकर कम गंभीर धाराओं के तहत कार्यवाही करने की तैयारी में है।
- विपक्ष ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध में गंभीर आपराधिक धाराओं के दुरुपयोग का उदाहरण बताया है।
तिरुवनंतपुरम, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज के खिलाफ कन्नूर रेलवे स्टेशन पर फरवरी 2025 के अंतिम सप्ताह में काले झंडे दिखाकर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े हत्या के प्रयास (धारा 307) के मामले में एक बड़ा उलटफेर सामने आया है। जांच टीम को दिए गए मंत्री के अपने दर्ज बयान ने ही अभियोजन पक्ष की सबसे अहम दलील को कमजोर कर दिया है, जिसके चलते रेलवे पुलिस अब चार्जशीट में धारा 307 हटाने की तैयारी में है।
क्या था पूरा मामला
केरल स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) के पांच कार्यकर्ताओं पर आरोप था कि उन्होंने कन्नूर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर मंत्री के काफिले को घेरकर हंगामा किया और मंत्री के गनमैन को किसी हथियार से गर्दन पर चोट पहुंचाई। इसी आधार पर पांचों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307 यानी हत्या के प्रयास का गंभीर मामला दर्ज किया गया था।
घटना के बाद मंत्री की यात्रा रद्द कर उन्हें तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया। बाद में उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज, परियारम में स्थानांतरित किया गया। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन सहित कई वरिष्ठ नेता उनका हाल जानने पहुंचे। उसी रात एफआईआर दर्ज हुई और अगले दिन आरोपियों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर रिमांड पर भेजा गया।
मंत्री के बयान ने पलटी बाजी
घटना के करीब दो महीने बाद जब जांच टीम ने वीणा जॉर्ज का बयान दर्ज किया — जो चुनावों के बाद संभव हो सका — तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान केवल धक्का-मुक्की और हाथापाई हुई थी। यह बयान उनके गनमैन के उस दावे को सीधे चुनौती देता है जिसमें हथियार से गर्दन पर चोट लगने की बात कही गई थी।
गौरतलब है कि जिला अस्पताल के चोट प्रमाण पत्र में भी किसी हथियार से लगी चोट का उल्लेख नहीं था। स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के बयान भी हत्या के प्रयास की पुष्टि नहीं करते। परियारम अस्पताल के मेडिकल बुलेटिन में सर्वाइकल स्पाइन में दर्द का जिक्र था, लेकिन किसी गंभीर हमले का कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला।
रेलवे पुलिस की अगली कार्रवाई
ठोस साक्ष्यों के अभाव में रेलवे पुलिस अब चार्जशीट दाखिल करते समय धारा 307 को हटाकर कम गंभीर धाराओं के तहत कार्यवाही करने की योजना बना रही है। पांचों केएसयू कार्यकर्ता पहले टाउन पुलिस की हिरासत में रहे और फिर रेलवे पुलिस को सौंपे गए। दो सप्ताह से अधिक जेल में रहने के बाद उन्हें जमानत मिली थी।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
यह घटनाक्रम विपक्षी दलों के उन आरोपों को बल देता है कि राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में सत्तारूढ़ दल के इशारे पर अत्यधिक गंभीर आपराधिक धाराएं लगाई जाती हैं। विरोध प्रदर्शन उस दिन और तीखा हो गया था जब कथित तौर पर पेरिंगोम में सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं ने यूथ लीग के नेता शाजिर इकबाल पर हमला किया था।
इस पूरे प्रकरण के बाद सोशल मीडिया पर वीणा जॉर्ज — जो पत्रकारिता से राजनीति में आई हैं — के खिलाफ ट्रोलिंग का व्यापक दौर भी चला। यह मामला केरल में छात्र राजनीति, पुलिस की स्वायत्तता और राजनीतिक प्रतिशोध के आरोपों पर बहस को नई ऊर्जा देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि धारा 307 हटाई जाती है तो यह केरल में राजनीतिक प्रदर्शनों के दौरान आपराधिक मामले दर्ज करने की प्रक्रिया पर न्यायिक और प्रशासनिक पुनर्विचार का आधार बन सकता है। आने वाले हफ्तों में रेलवे पुलिस की चार्जशीट और संभावित अदालती सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेगी।