क्या अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला किया?
सारांश
Key Takeaways
- अमेरिका ने वेनेजुएला पर एक सीमित ऑपरेशन किया।
- राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया गया।
- हमला पूर्व नियोजित था, जिससे कोई बड़ा विरोध नहीं हुआ।
- यह घटना एक बार फिर से अमेरिका की राजनीतिक रणनीति को दर्शाती है।
- वेनेजुएला के पास सैन्य उपकरण हैं, लेकिन उन्होंने उनका उपयोग नहीं किया।
नई दिल्ली, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वैश्विक उथल-पुथल के बीच अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा किया है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया गया है। इस दौरान राजनीतिक नेताओं और विदेशी मामलों के जानकारों की प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं।
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिका द्वारा पकड़े जाने के बाद, रिटायर्ड विंग कमांडर प्रफुल्ल बख्शी ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा, "कहीं पर भी कोई बड़ा विरोध नहीं दिखा, जिससे यह साफ होता है कि यह एक पूर्व नियोजित ऑपरेशन था। अमेरिका के पास वेनेजुएला के काराकास में पहले से ही समर्थक मौजूद थे, जो अपहरण को आसान बनाने में मदद कर रहे थे। एंटोनियो के खिलाफ आरोप यह था कि वह एक लोकप्रिय नेता नहीं थे, बल्कि उन्होंने धोखाधड़ी से चुनाव जीता था।"
प्रफुल्ल बख्शी ने आगे कहा, "अमेरिका ने क्या किया? उन्होंने एक सीमित ऑपरेशन किया। हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया। जब भी कोई हमला होता है, तो हेलीकॉप्टर का उपयोग उन जगहों पर नहीं किया जाता जहां एयर डिफेंस अलर्ट हो। लेकिन यह आश्चर्यजनक है कि वेनेजुएला के एयर डिफेंस, इंटरसेप्टर, फाइटर, उनके पास सभी उपकरण हैं। फिर भी, उन्होंने अमेरिकी हमलों के खिलाफ उनका उपयोग नहीं किया।"
उन्होंने यह भी कहा, "अमेरिका ने वेनेजुएला के सैन्य ठिकानों पर हमले किए और उन्होंने उनके राष्ट्रपति एंटोनियो और उनकी पत्नी को भी किडनैप कर लिया। आरोप यह था कि वे कथित तौर पर ड्रग्स के धंधे में शामिल थे, लेकिन सही जानकारी कभी पूरी तरह से सामने नहीं आती।"
रिटायर्ड कैप्टन अनिल गौर ने कहा, "अमेरिका ने वही किया है जो वह दूसरे विश्व युद्ध के बाद से करता आ रहा है। यह लगभग एक सत्ता परिवर्तन है। अगर मैं गलत नहीं हूं, तो यह 70वां या 71वां देश है जहां सत्ता परिवर्तन हुआ है। वेनेजुएला से पहले बांग्लादेश और उससे पहले यूक्रेन था।"
रिटायर्ड कर्नल डीएस चीमा ने कहा कि अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति को पकड़ना एक रणनीतिक और संसाधन-आधारित मकसद को दर्शाता है। वेनेजुएला सैन्य रूप से अमेरिका का सामना नहीं कर सकता।
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा, "मारिया ने वेनेजुएला में लोकतंत्र के लिए बहुत मेहनत की और लड़ाई लड़ी, इसलिए उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला। जिस संघर्ष के लिए उन्होंने वहां लड़ाई लड़ी, वही लड़ाई राहुल गांधी भारत में लड़ रहे हैं।"
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, "हां, लेकिन हम वेनेजुएला से ज्यादा तेल नहीं खरीद रहे हैं, इसलिए मुझे नहीं लगता कि इसका हम पर बहुत ज्यादा असर पड़ेगा। हालांकि, ये सब ट्रंप प्रशासन के तहत हो रहे नए घटनाक्रमों का हिस्सा हैं, जिनके बारे में बाकी दुनिया को पता होना चाहिए, उन पर प्रतिक्रिया देनी चाहिए, और अगर जरूरत हो तो कोई दूसरा समाधान निकालना चाहिए, जिसके लिए हम अभी 2 अप्रैल की डेडलाइन के लिए कोशिश कर रहे हैं।"