करुणानिधि की 103वीं जयंती: CM विजय की श्रद्धांजलि, स्टालिन ने मरीना स्मारक पर किया नमन
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 3 जून 2026 को पूर्व मुख्यमंत्री और DMK के दिग्गज नेता एम. करुणानिधि की 103वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। इसी अवसर पर DMK अध्यक्ष और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने चेन्नई के मरीना बीच स्थित करुणानिधि स्मारक पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम का नेतृत्व किया।
मुख्य घटनाक्रम
CM विजय ने अपने संदेश में करुणानिधि को एक बहुआयामी व्यक्तित्व बताया, जिनका योगदान केवल राजनीति तक सीमित नहीं था। उन्होंने कहा कि तमिल भाषा, साहित्य, सिनेमा, राजनीति और प्रशासन पर उनकी गहरी पकड़ थी, और लेखक, नाटककार, पटकथा लेखक तथा प्रशासक के रूप में दिया गया योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
राज्य स्वायत्तता पर विरासत
मुख्यमंत्री विजय ने जोर दिया कि राज्य स्वायत्तता और राज्यों के अधिकारों की रक्षा को लेकर करुणानिधि का दृष्टिकोण आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने सामाजिक न्याय और संघीय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जो प्रयास किए, उन्हें तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास के महत्वपूर्ण मील के पत्थर बताया गया। गौरतलब है कि यह श्रद्धांजलि ऐसे समय आई है जब केंद्र-राज्य संबंधों और संघीय ढाँचे पर बहस तमिलनाडु की राजनीति में फिर सक्रिय है।
स्टालिन का भावुक संदेश
एम.के. स्टालिन ने वरिष्ठ पार्टी नेताओं, सांसदों, विधायकों और पूर्व मंत्रियों के साथ दिवंगत द्रविड़ नेता को पुष्पांजलि अर्पित की। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में स्टालिन ने अपने पिता को ऐसा अथक नेता बताया जिन्होंने जीवन के अंतिम क्षणों तक तमिलनाडु और उसके लोगों के विकास के लिए लगातार काम किया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से करुणानिधि के संघर्ष, सामाजिक न्याय के प्रति समर्पण और जनसेवा की भावना से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
परिवार और पार्टी की भागीदारी
तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और DMK यूथ विंग के सचिव उदयनिधि स्टालिन ने भी चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय में अपने दादा को पुष्पांजलि अर्पित की। करुणानिधि की राजनीतिक यात्रा का स्मरण करते हुए नेताओं ने उनके योगदान को रेखांकित किया।
करुणानिधि की राजनीतिक विरासत
करुणानिधि पाँच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे और लगभग पाँच दशकों तक DMK का नेतृत्व किया। द्रविड़ आंदोलन के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल करुणानिधि को तमिल साहित्य और सिनेमा में असाधारण योगदान, जनकल्याणकारी योजनाओं तथा आधुनिक तमिलनाडु की राजनीतिक दिशा तय करने वाली भूमिका के लिए आज भी याद किया जाता है। आगामी वर्षों में उनकी विचारधारा द्रविड़ राजनीति का केंद्रीय संदर्भ बिंदु बनी रहेगी।