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क्या विजयवाड़ा में 72 फीट ऊँची इको-फ्रेंडली डुंडी गणपति प्रतिमा बनी है आकर्षण का केंद्र?

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क्या विजयवाड़ा में 72 फीट ऊँची इको-फ्रेंडली डुंडी गणपति प्रतिमा बनी है आकर्षण का केंद्र?

सारांश

विजयवाड़ा में 72 फीट ऊँची इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा भक्तों का ध्यान आकर्षित कर रही है। यह प्रतिमा प्राकृतिक सामग्रियों से बनी है और भगवान गणपति को विशेष मुद्रा में दर्शाया गया है। यहाँ सुरक्षा और सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है।

मुख्य बातें

इको-फ्रेंडली सामग्री का उपयोग 72 फीट ऊँची गणेश प्रतिमा विशेष पूजा और हवन सुरक्षा के लिए व्यापक इंतज़ाम भक्तों के लिए सुविधाजनक दर्शन व्यवस्था

विजयवाड़ा, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। देश के विभिन्न हिस्सों में गणेशोत्सव की धूम मची हुई है। हर शहर और हर पंडाल अपने अनूठे थीम, परंपरा और भव्यता के साथ भगवान गणेश का स्वागत कर रहा है। इसी क्रम में, आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में स्थापित 72 फीट की गणेश प्रतिमा भक्तों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

यह प्रतिमा गणेश सेवा समिति द्वारा बनाई गई है। विशेष यह है कि यह मूर्ति पूरी तरह से इको-फ्रेंडली है। समिति के सदस्यों के अनुसार, इस विशाल मूर्ति के निर्माण में नारियल के रेशे, जूट, मिट्टी, भूसी और बोरे जैसे प्राकृतिक और सुरक्षित सामग्रियों का उपयोग किया गया है, जिससे पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों को कोई नुकसान न हो।

समिति का कहना है कि अब तक जहाँ भी 72 फीट ऊँची गणेश प्रतिमाएँ स्थापित की गईं, वे सभी खड़ी मुद्रा में थीं। लेकिन इस बार भगवान गणपति को सिंहासन पर विराजित मुद्रा में दर्शाया गया है। इस बदलाव के कारण मूर्ति की चौड़ाई पिछले साल की तुलना में लगभग 30 फीट बढ़ गई है।

इस भव्य प्रतिमा के निर्माण में लगभग 90 दिनों तक सैकड़ों कारीगरों ने दिन-रात मेहनत की। मूर्ति के दोनों ओर भगवान परमेश्वर (राजराजेश्वर स्वामी) और मां कनक परमेश्वरी की मूर्तियाँ भी स्थापित की गई हैं। बुधवार सुबह इस प्रतिमा की पहली पूजा विजयवाड़ा के सांसद केसिनेनी शिवनाथ और उनकी पत्नी ने की।

समिति ने बताया कि इसी मैदान में पहले एक बार पानी 5 फीट तक बढ़ गया था। उस समय भक्तों के सुरक्षित दर्शन सुनिश्चित करने के लिए एक फुट-ओवर ब्रिज की व्यवस्था की गई। राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने समिति को आश्वासन दिया कि ऐसी स्थिति फिर से नहीं होगी, और उन्होंने गुडीमेट्टा में एक रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया।

हर सुबह हवन और शाम को विशेष पूजाएँ आयोजित की जाएँगी। समिति का विश्वास है कि इस वर्ष कार्यसिद्धि महाशक्ति गणपति के दर्शन करने वाले सभी भक्तों की मनोकामनाएँ अवश्य पूर्ण होंगी।

भक्तों के लिए दर्शन की व्यवस्था में कोई कमी न हो, इसके लिए व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं। सुरक्षा के लिए पुलिस बल और निजी सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि सभी भक्त खुशी-खुशी भगवान डुंडी गणपति के दर्शन कर सकें।

एक स्थानीय नागरिक आर्यन ने कहा कि भगवान गणेश सभी की मनोकामनाएँ पूरी करें, यही कामना है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सभी अपने परिवार के साथ जरूर डुंडी गणपति आएं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इको-फ्रेंडली पहल के माध्यम से पर्यावरण की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी उठाया है। यह एक सकारात्मक संकेत है कि धार्मिक आयोजनों में अब पर्यावरणीय सतर्कता को प्राथमिकता दी जा रही है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डुंडी गणपति प्रतिमा कितनी ऊँची है?
डुंडी गणपति प्रतिमा की ऊँचाई 72 फीट है।
यह प्रतिमा किस सामग्री से बनी है?
यह प्रतिमा नारियल के रेशे, जूट, मिट्टी, भूसी और बोरे जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से बनी है।
क्या यहाँ सुरक्षा व्यवस्था है?
हाँ, सुरक्षा के लिए पुलिस बल और निजी सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।
प्रतिमा की पूजा कब की जाती है?
प्रतिमा की पूजा हर सुबह हवन और शाम को विशेष पूजाएँ होती हैं।
कौन-कौन से लोग यहाँ आ सकते हैं?
सभी भक्त, विशेष रूप से महिलाएँ, बुजुर्ग और बच्चे, यहाँ दर्शन कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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