क्या विश्व पुस्तक मेले में भारतीय सेना के शौर्य को बारीकी से प्रदर्शित किया गया?
सारांश
Key Takeaways
- पुस्तक मेला में भारतीय सेना के शौर्य का प्रदर्शन किया गया।
- कृषि से संबंधित समस्याओं पर चर्चा की गई।
- सीमावर्ती किसानों के मुद्दों को उठाया गया।
- साहित्य का प्रचार-प्रसार आवश्यक है।
- गृह मंत्री ने मांगों पर विचार का आश्वासन दिया।
नई दिल्ली, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मुलाकात की। इस अवसर पर, मुख्यमंत्री मान ने प्रगति मैदान में आयोजित 'नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026' में भाग लिया। सीएम मान ने पुस्तक मेले की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा कीं।
उन्होंने एक्स पर लिखा कि आज नई दिल्ली के प्रगति मैदान में नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा आयोजित 'नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026' में भाग लिया, जिसमें भारत सहित दुनिया भर के साहित्य की प्रदर्शनी देखने को मिली। इस विश्व पुस्तक मेले में भारतीय सेना के इतिहास और शौर्य को अत्यंत बारीकी से प्रदर्शित किया गया है। हमारे देश और राज्यों में ऐसे मेलों का आयोजन करना आवश्यक है ताकि समाज के हर वर्ग को देश के गौरवशाली इतिहास से अवगत कराया जा सके।
इससे पहले, उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के दौरान सीमावर्ती किसानों के मुद्दे को उठाया। तारबंदी के पार खेती करने वाले किसानों के लिए यह मांग रखी गई कि तार का दायरा बढ़ाया जाए ताकि किसान बिना किसी डर के खेती कर सकें। गृह मंत्री ने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे का जल्दी समाधान किया जाएगा। इस दौरान तार पार सीमावर्ती क्षेत्र, बीज बिल तथा अन्य कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।
उन्होंने बताया कि पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है, इसलिए संसद में बिना पंजाब से परामर्श किए बीज बिल ना लाए जाने का मुद्दा उठाया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि पंजाब में अतिरिक्त पानी नहीं है, इसलिए एसवाईएल के मुद्दे को समाप्त किया जाए। एफसीआई में जीएम के पद पर पंजाब कैडर के ही अधिकारी की नियुक्ति की मांग की गई है। इसके अलावा आरडीएफ के 8,500 करोड़ रुपए जारी करने, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति व भंडारण से जुड़े मामलों तथा तार पार सीमावर्ती क्षेत्र में किसानों को खेती के दौरान आ रही समस्याओं के शीघ्र समाधान की बात की गई। गृह मंत्री शाह ने सभी मांगों पर गंभीरता से विचार करने का भरोसा दिया।
उन्होंने कहा कि हमने मांग रखी है कि चंडीगढ़ में पंजाब की 60:40 हिस्सेदारी के अनुपात को बनाए रखा जाए।