तिरुप्पुर-इरोड के जंगलों में जलकुंड भरे गए, 58 स्थानों पर वन्यजीवों को राहत

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तिरुप्पुर-इरोड के जंगलों में जलकुंड भरे गए, 58 स्थानों पर वन्यजीवों को राहत

सारांश

तमिलनाडु में 41°C की भीषण गर्मी ने तिरुप्पुर और इरोड के जंगलों में प्राकृतिक जल स्रोत सुखा दिए हैं। वन विभाग ने 58 स्थानों पर जलकुंड भरकर और 200 किमी अग्निरोधक रेखाएँ बनाकर हाथियों और हिरणों को जंगल से बाहर भटकने से रोकने की कोशिश की है — यह मानव-वन्यजीव संघर्ष को टालने की आपातकालीन जंग है।

Key Takeaways

  • तिरुप्पुर और इरोड के वन क्षेत्रों में 58 स्थानों पर आपातकालीन जल आपूर्ति शुरू की गई है।
  • इरोड में तापमान 41°C और तिरुप्पुर में 38.5°C दर्ज, जो राज्य के उच्चतम तापमानों में से एक।
  • तिरुप्पुर में 40 बोरवेल स्थापित, जिनमें 20 सौर ऊर्जा से संचालित; प्रत्येक की क्षमता 15,000–30,000 लीटर
  • थंथाई पेरियार वन्यजीव अभ्यारण्य में 18 स्थानों पर जल आपूर्ति, जिनमें 6 सौर बोरवेल से।
  • जंगल की आग रोकने के लिए 200 किलोमीटर से अधिक अग्निरोधक रेखाएँ स्थापित।
  • वन कर्मियों और स्थानीय पहाड़ी निवासियों की विशेष टीमें निगरानी में तैनात।

तमिलनाडु के तिरुप्पुर और इरोड जिलों में भीषण गर्मी के कारण वन क्षेत्रों में जल संकट गहरा गया है, जिसके चलते वन विभाग ने 58 स्थानों पर पानी के कुंडों को भरकर वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए आपातकालीन प्रयास तेज कर दिए हैं। इरोड में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस और तिरुप्पुर में 38.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाने से प्राकृतिक जल स्रोत सूख गए हैं, जिससे हाथी और हिरण जैसे जानवरों के जंगल की सीमाओं से बाहर निकलने का खतरा बढ़ गया था।

मुख्य घटनाक्रम

वन अधिकारियों के अनुसार, तिरुप्पुर के वन क्षेत्रों में 40 स्थानों पर बोरवेल स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 20 सौर ऊर्जा से संचालित हैं। इन बोरवेलों की जल भंडारण क्षमता 15,000 से 30,000 लीटर तक है। जहाँ सुविधा उपलब्ध है, वहाँ इन्हें प्रतिदिन भरा जाता है, जबकि अन्य स्थानों पर टैंकर ट्रकों के माध्यम से साप्ताहिक जल आपूर्ति की जाती है।

इरोड वन प्रभाग में, थंथाई पेरियार वन्यजीव अभ्यारण्य के भीतर 18 स्थानों पर जल आपूर्ति की जा रही है। इनमें से 6 स्थानों पर सौर ऊर्जा से चलने वाले बोरवेल से पानी दिया जा रहा है, जबकि कुछ चयनित जलाशयों के लिए पाइपलाइन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष से बचाव

इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वन्यजीव पानी की तलाश में जंगल की सीमाओं से बाहर न निकलें, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष का जोखिम कम हो सके। अधिकारियों ने बताया कि थिरुमूर्ति और अमरावती बांधों जैसे प्रमुख जल स्रोतों की उपलब्धता के बावजूद वन क्षेत्रों के भीतरी हिस्सों में पानी की गंभीर कमी बनी हुई है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष समय पर हुई वर्षा से पर्याप्त हरियाली और जल की उपलब्धता सुनिश्चित हुई थी, लेकिन इस मौसम में लगातार सूखा पड़ा हुआ है।

निगरानी और गश्त

स्थिति पर बारीकी से नज़र रखने के लिए वन क्षेत्रों में विशेष टीमें गठित की गई हैं, जिनमें वन कर्मियों के साथ-साथ स्थानीय पहाड़ी निवासी भी शामिल हैं। गश्त तेज कर दी गई है और आधुनिक निगरानी विधियों का उपयोग करके वन क्षेत्रों के किनारों पर वन्यजीवों की गतिविधियों पर नज़र रखी जा रही है।

आग से बचाव के उपाय

अधिकारियों ने सैकड़ों हेक्टेयर में फैली आक्रामक वनस्पति को साफ किया है और गर्मियों के चरम महीनों के दौरान जंगल की आग के जोखिम को कम करने के लिए 200 किलोमीटर से अधिक लंबी अग्निरोधक रेखाएँ स्थापित की हैं। चेक डैम, रिसने वाले तालाब, कुएँ और धाराएँ भी वन्यजीवों को सहारा देती रहती हैं, हालाँकि अधिकारियों के अनुसार बारिश फिर से शुरू होने तक ये पूरक उपाय महत्वपूर्ण बने रहेंगे।

आगे की राह

वन विभाग के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि मानसून आने तक यह आपातकालीन जल आपूर्ति अभियान जारी रहेगा। यह स्थिति जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती गर्मी और वन क्षेत्रों में जल प्रबंधन की दीर्घकालिक चुनौती की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है।

Point of View

लेकिन यह उस बड़े सवाल को उजागर करता है कि दक्षिण भारत के जंगलों में जल प्रबंधन की दीर्घकालिक योजना क्यों नहीं बन पाई। हर गर्मी में टैंकर और बोरवेल से काम चलाना एक स्थायी समाधान नहीं है — यह जलवायु अनुकूलन की विफलता का संकेत है। थंथाई पेरियार जैसे अभ्यारण्यों में मानसून-पूर्व जल संग्रहण ढाँचे को मजबूत करना और चेक डैम नेटवर्क का विस्तार करना वह दीर्घकालिक निवेश है जो मानव-वन्यजीव संघर्ष को वास्तव में कम कर सकता है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

तिरुप्पुर और इरोड के जंगलों में जलकुंड क्यों भरे जा रहे हैं?
भीषण गर्मी के कारण इन जिलों के वन क्षेत्रों में प्राकृतिक जल स्रोत सूख गए हैं, जिससे हाथी और हिरण जैसे वन्यजीव पानी की तलाश में जंगल से बाहर निकलने लगे थे। मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए वन विभाग ने 58 स्थानों पर जलकुंड भरने का अभियान शुरू किया है।
इरोड और तिरुप्पुर में इस समय कितना तापमान दर्ज किया गया है?
इरोड में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है, जो राज्य में दर्ज उच्चतम तापमानों में से एक है। तिरुप्पुर में तापमान 38.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है।
थंथाई पेरियार वन्यजीव अभ्यारण्य में क्या व्यवस्था की गई है?
थंथाई पेरियार वन्यजीव अभ्यारण्य में 18 स्थानों पर जल आपूर्ति की जा रही है, जिनमें से 6 स्थानों पर सौर ऊर्जा से चलने वाले बोरवेल लगाए गए हैं। कुछ चयनित जलाशयों के लिए पाइपलाइन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
वन विभाग जंगल की आग से बचाव के लिए क्या कर रहा है?
अधिकारियों ने सैकड़ों हेक्टेयर में फैली आक्रामक वनस्पति को साफ किया है और 200 किलोमीटर से अधिक लंबी अग्निरोधक रेखाएँ स्थापित की हैं। गर्मियों के चरम महीनों में जंगल की आग का जोखिम कम करने के लिए गश्त भी तेज कर दी गई है।
यह संकट पिछले साल की तुलना में अलग क्यों है?
अधिकारियों के अनुसार, पिछले वर्ष समय पर हुई वर्षा ने पर्याप्त हरियाली और जल की उपलब्धता सुनिश्चित की थी। इस मौसम में लगातार सूखा पड़ा हुआ है, जिसके कारण आपातकालीन उपाय करने की नौबत आई है।
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