WEF सर्वेक्षण: 98% अर्थशास्त्रियों को भारत की GDP में मजबूत वृद्धि की उम्मीद, FY27 अनुमान 6.7%
सारांश
मुख्य बातें
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के ताज़ा चीफ इकोनॉमिस्ट आउटलुक में सर्वेक्षण में शामिल 98 प्रतिशत मुख्य अर्थशास्त्रियों ने अगले 12 महीनों में भारत की अर्थव्यवस्था में मध्यम या उससे बेहतर वृद्धि का अनुमान जताया है। इनमें से 74 प्रतिशत ने मजबूत या बहुत मजबूत वृद्धि की संभावना व्यक्त की, जो मई में मात्र 52 प्रतिशत थी — यह उल्लेखनीय उछाल भारत की आर्थिक प्रतिरोधक क्षमता को रेखांकित करता है। WEF के अनुसार, भारत की विकास संभावनाएं इस आउटलुक में शामिल सभी प्रमुख क्षेत्रों में सबसे मजबूत बनी हुई हैं।
वृद्धि दर का अनुमान और घरेलू माँग
WEF ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान अगस्त में संशोधित कर 6.7 प्रतिशत कर दिया, जो इससे पहले के अनुमान से अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया: 'मजबूत घरेलू माँग से विकास को समर्थन मिलने की उम्मीद है, हालांकि ऊँची ऊर्जा कीमतें अब भी विकास के परिदृश्य पर दबाव डाल रही हैं।' गौरतलब है कि ऊर्जा मूल्यों में उतार-चढ़ाव एक वैश्विक जोखिम बना हुआ है, जिसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर अधिक पड़ता है।
महंगाई की स्थिति
मई के बाद से महंगाई को लेकर अर्थशास्त्रियों की चिंताओं में नरमी आई है। अगले 12 महीनों में 55 प्रतिशत मुख्य अर्थशास्त्रियों को मध्यम महंगाई और 45 प्रतिशत को ऊँची महंगाई की आशंका है। मई में 61 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने ऊँची या बहुत ऊँची महंगाई की संभावना जताई थी, जो अब घटकर अल्पमत में आ गई है।
आँकड़ों के अनुसार, अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई सालाना आधार पर बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई। यह भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर है, लेकिन निर्धारित 2-6 प्रतिशत के दायरे में बनी हुई है।
मौद्रिक और राजकोषीय नीति का परिदृश्य
सर्वेक्षण में 67 प्रतिशत उत्तरदाताओं को मौद्रिक नीति में कोई बदलाव नहीं होने की उम्मीद है, जबकि 24 प्रतिशत ने नीति के और सख्त होने की आशंका जताई। उल्लेखनीय है कि अगस्त में नीतिगत दर 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखी गई थी और मौद्रिक नीति का रुख तटस्थ था।
राजकोषीय मोर्चे पर, 72 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने राजकोषीय नीति में स्थिरता बने रहने का अनुमान जताया, जबकि 22 प्रतिशत ने नीति में ढील की संभावना व्यक्त की। रिपोर्ट में कहा गया, 'मजबूत आर्थिक वृद्धि और निर्धारित सीमा के भीतर बनी महंगाई, नीतिगत स्थिरता को लेकर जताई गई उम्मीदों के अनुरूप है।'
शेयर बाज़ार और रोज़गार परिदृश्य
हालांकि, शेयर बाज़ार का प्रदर्शन समग्र आर्थिक तस्वीर से मेल नहीं खाता। इस साल की शुरुआत से 19 अगस्त तक निफ्टी 50 में 7.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो घरेलू निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
रोज़गार के मोर्चे पर 70 प्रतिशत मुख्य अर्थशास्त्रियों को अगले 12 महीनों में बेरोज़गारी दर में कोई खास बदलाव नहीं होने का अनुमान है; 17 प्रतिशत ने बेरोज़गारी बढ़ने और 13 प्रतिशत ने घटने की संभावना जताई। आँकड़ों के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में बेरोज़गारी दर जुलाई के 5.1 प्रतिशत से घटकर अगस्त में 5 प्रतिशत पर आ गई, जबकि श्रम बल भागीदारी दर 55.4 प्रतिशत से बढ़कर 55.6 प्रतिशत हो गई।
आगे की राह
WEF के सर्वेक्षण के निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत का आर्थिक बुनियादी ढाँचा मज़बूत बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, रोज़गार सृजन की गति को बनाए रखना और ऊर्जा मूल्यों के दबाव को प्रबंधित करना आने वाले महीनों की सबसे बड़ी चुनौती होगी। यदि घरेलू माँग की रफ़्तार बरकरार रही, तो FY2026-27 का 6.7 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य हासिल करना भारत के लिए संभव दिखता है।