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पश्चिम बंगाल में उद्योग और रोजगार पर BJP का बड़ा प्लान, मंत्री मौमिता बिस्वास ने ममता पर लगाए गंभीर आरोप

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पश्चिम बंगाल में उद्योग और रोजगार पर BJP का बड़ा प्लान, मंत्री मौमिता बिस्वास ने ममता पर लगाए गंभीर आरोप

सारांश

पश्चिम बंगाल में BJP मंत्री मौमिता बिस्वास ने ममता सरकार पर उद्योगों को साजिशन विफल करने का आरोप लगाया। नई सरकार ने जूट मिल पुनरुद्धार, छोटे विदेशी प्रतिनिधिमंडल, सिंडिकेट पर प्रहार और निर्बाध निवेश का संकल्प जताया — यह राज्य की औद्योगिक राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है।

मुख्य बातें

मंत्री मौमिता बिस्वास ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर पश्चिम बंगाल में उद्योगों को साजिशन विफल करने का आरोप लगाया।
टाटा समूह सहित घरेलू और विदेशी निवेशकों को कथित तौर पर रोका गया, जिससे वे अन्य राज्यों में चले गए।
BJP सरकार छोटे विदेशी प्रतिनिधिमंडल भेजकर निवेशकों को राज्य में लाने की योजना बना रही है।
बंद पड़ी जूट मिलों को पुनः शुरू करने पर विचार; इससे किसानों और श्रमिकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद।
सिंडिकेट और वसूली करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का आश्वासन; जमीन हड़पने के मामलों पर सख्त रुख।
यूनियनें अब केवल श्रमिक हित के लिए काम करेंगी, उद्योगपतियों पर हमले बर्दाश्त नहीं होंगे।

पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री मौमिता बिस्वास ने 11 जून 2026 को कोलकाता में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासनकाल में पश्चिम बंगाल में उद्योगों की स्थापना को जानबूझकर विफल किया गया। उन्होंने दावा किया कि अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार राज्य में निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन के लिए ठोस कदम उठाएगी।

ममता सरकार पर उद्योग विरोधी नीति का आरोप

मंत्री बिस्वास ने कहा कि जब भी किसी भारतीय या विदेशी निवेशक ने पश्चिम बंगाल में निवेश की योजना बनाई, तत्कालीन सरकार ने उसे साजिशन विफल कर दिया। उन्होंने टाटा समूह का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि एक बार टाटा ने राज्य में निवेश करने का इरादा जताया था, लेकिन तत्कालीन सरकार के रवैये के कारण वे अन्य राज्यों की ओर चले गए।

उन्होंने अमूल का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी ज़माने में चंद महिलाओं ने जो सहकारी संस्था शुरू की, वह आज एक विशाल संगठन बन चुकी है — यह संभावना पश्चिम बंगाल में भी थी, जो कथित तौर पर राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में नष्ट हो गई।

विदेशी दौरों पर सवाल, नई कार्ययोजना का ऐलान

मंत्री बिस्वास ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में 30-40 सदस्यीय बड़े प्रतिनिधिमंडल विदेश दौरों पर जाते थे, लेकिन व्यावहारिक निवेश के मामले में कोई ठोस परिणाम नहीं आया। उन्होंने कहा, 'अब हमारा प्रतिनिधिमंडल भी विदेश जाएगा, लेकिन उसमें कुछ ही लोग होंगे जो राज्य के विकास की पूरी कार्ययोजना लेकर जाएंगे और निवेशकों को भारत लाएंगे।'

यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में BJP की नई सरकार बनने के बाद राज्य की औद्योगिक नीति पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

सिंडिकेट और वसूली पर सख्त रुख

मंत्री ने स्पष्ट किया कि पूर्व में उद्योगों की स्थापना में सिंडिकेट की ओर से जो अवरोध उत्पन्न किए जाते थे, वह BJP शासन में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि TMC के दौर में 'गुंडों का राज' रहा और अब सरकार इन सिंडिकेटों पर 'सीधा प्रहार' करेगी।

जमीन हड़पने और वसूली के मामलों पर उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसे लोगों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं होगी।

जूट मिल पुनरुद्धार और श्रमिक हित

मंत्री बिस्वास ने बंद पड़ी जूट मिलों को दोबारा शुरू करने की योजना का भी संकेत दिया। उन्होंने कहा कि जूट मिलें खुलने से किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और उन्हें अपनी उपज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

श्रमिक संगठनों पर उन्होंने कहा कि नए दौर में यूनियनें केवल कर्मचारियों और श्रमिकों के हित के लिए काम करेंगी — उद्योगपतियों पर हमले या उन्हें डराने का काम नहीं होगा। सरकार और उद्योग के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना भी प्राथमिकता होगी।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में दशकों से औद्योगिक पलायन एक बड़ी चुनौती रही है। BJP सरकार के ये वादे अब क्रियान्वयन की कसौटी पर परखे जाएंगे। मंत्री बिस्वास ने आश्वस्त किया कि राज्य में निर्बाध रूप से उद्योगों की स्थापना सुनिश्चित की जाएगी ताकि रोजगार के अवसर बढ़ें और प्रदेश का समग्र विकास हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ठोस नीतिगत विवरण अभी भी अनुपस्थित हैं — न कोई निवेश लक्ष्य, न कोई समयसीमा, न रोजगार के आँकड़े। पश्चिम बंगाल में औद्योगिक पलायन की जड़ें केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति में नहीं, बल्कि श्रम कानूनों, भूमि अधिग्रहण की जटिलताओं और अवसंरचना की कमी में भी हैं — जिनका इस बयान में कोई उल्लेख नहीं। जूट मिल पुनरुद्धार का विचार सराहनीय है, लेकिन वैश्विक जूट बाजार की सिकुड़ती माँग के संदर्भ में इसकी व्यावसायिक व्यवहार्यता पर स्पष्टता ज़रूरी है। असली परीक्षा यह होगी कि BJP सरकार अगले छह से बारह महीनों में कितने वास्तविक निवेश समझौते और रोजगार अवसर धरातल पर उतार पाती है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंत्री मौमिता बिस्वास ने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाए?
मंत्री बिस्वास ने आरोप लगाया कि TMC सरकार ने पश्चिम बंगाल में उद्योगों की स्थापना को जानबूझकर विफल किया। उनके अनुसार टाटा समूह सहित कई घरेलू और विदेशी निवेशकों को राज्य में निवेश से रोका गया, जिससे वे दूसरे राज्यों में चले गए।
पश्चिम बंगाल में BJP सरकार उद्योग और निवेश के लिए क्या कदम उठाएगी?
BJP सरकार एक छोटे और केंद्रित विदेशी प्रतिनिधिमंडल के जरिए निवेशकों को राज्य में आमंत्रित करने की योजना बना रही है। साथ ही सिंडिकेट पर प्रहार, उद्योग-सरकार संवाद सुधार और निर्बाध निवेश माहौल सुनिश्चित करने का संकल्प जताया गया है।
पश्चिम बंगाल में जूट मिलों को लेकर सरकार की क्या योजना है?
मंत्री बिस्वास ने बंद पड़ी जूट मिलों को पुनः शुरू करने पर विचार का संकेत दिया। उनके अनुसार जूट मिलें खुलने से किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और उन्हें अपनी उपज के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
पश्चिम बंगाल में सिंडिकेट और वसूली की समस्या पर BJP सरकार का रुख क्या है?
मंत्री बिस्वास ने स्पष्ट किया कि उद्योगों की राह में अवरोध डालने वाले सिंडिकेट और वसूली करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे और किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पश्चिम बंगाल में पहले उद्योगों के पलायन का क्या असर रहा?
मंत्री बिस्वास के अनुसार रोजगार के अवसरों की कमी के कारण राज्य के कई लोग बेहतर नौकरी की तलाश में विदेश में जाकर बस गए। उन्होंने कहा कि अब BJP सरकार राज्य में ही रोजगार सुनिश्चित करेगी ताकि यह पलायन रुके।
राष्ट्र प्रेस
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