पश्चिम बंगाल फिर बनेगा व्यापार-उद्योग का केंद्र, कैट ने जताया भरोसा — BJP सरकार से रोजगार की उम्मीद

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पश्चिम बंगाल फिर बनेगा व्यापार-उद्योग का केंद्र, कैट ने जताया भरोसा — BJP सरकार से रोजगार की उम्मीद

सारांश

कैट का दावा है कि BJP के नेतृत्व में बंगाल फिर से औद्योगिक शक्ति बन सकता है — लेकिन यह तभी संभव है जब 15 साल की नीतिगत उपेक्षा को पलटा जाए।

मुख्य बातें

कैट ने 8 मई 2026 को कहा कि पश्चिम बंगाल में BJP सरकार बनने से राज्य व्यापार और रोजगार का केंद्र बन सकता है।
प्रवीण खंडेलवाल के अनुसार, पिछले 15 वर्षों में सिंडिकेट कल्चर और नीतिगत अस्थिरता से हजारों MSME इकाइयाँ बंद या अन्य राज्यों में स्थानांतरित हो गईं।
चाय, जूट, हथकरघा, चमड़ा और मिठाई उद्योग — जिनमें लाखों लोग कार्यरत हैं — बढ़ती लागत और अपर्याप्त बुनियादी ढाँचे से प्रभावित हुए।
छेना आधारित मिठाइयों पर GST लगाए जाने से पारंपरिक मिठाई उद्योग पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी.
भरतिया ने कहा कि मजबूत नेतृत्व से बंगाल निर्यात, विनिर्माण और रोजगार सृजन में अग्रणी बन सकता है।

अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) ने 8 मई 2026 को नई दिल्ली में कहा कि पश्चिम बंगाल में यदि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व में पारदर्शी और निवेशक-हितैषी सरकार बनती है, तो राज्य एक बार फिर व्यापार, उद्योग और रोजगार का प्रमुख केंद्र बन सकता है। कैट के अनुसार, यह बदलाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक दृष्टिकोण के अनुरूप होगा।

पिछले 15 वर्षों में क्या हुआ

कैट के सचिव और BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि नीतिगत अस्थिरता, निवेशकों के घटते विश्वास, उद्योगों के पलायन, सिंडिकेट कल्चर और प्रशासनिक दबाव के कारण पिछले 15 वर्षों में पश्चिम बंगाल में उद्योग, व्यापार, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), पारंपरिक व्यवसायों और उद्यमिता को महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि चुनावी संदर्भ में दिया गया बयान है। पश्चिम बंगाल की औद्योगिक गिरावट वास्तविक है, लेकिन इसके कारण केवल एक दल की नीतियों तक सीमित नहीं हैं — वैश्विक विनिर्माण बदलाव और केंद्रीय नीतियाँ भी भूमिका निभाती हैं। 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और 'स्टार्टअप इंडिया' जैसी केंद्रीय योजनाओं का लाभ देश के अन्य राज्यों में भी असमान रहा है। बिना ठोस नीतिगत रोडमैप के, यह बयान चुनावी आशावाद से अधिक नहीं लगता।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में कैट ने क्या माँगें रखी हैं?
कैट ने निवेशक-अनुकूल औद्योगिक नीतियों, बिजली शुल्क में राहत, एकल-खिड़की निकासी व्यवस्था, MSME और स्टार्टअप्स के लिए मजबूत समर्थन, बेहतर लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढाँचे और पारंपरिक उद्योगों के लिए नीतिगत संरक्षण की माँग की है।
पश्चिम बंगाल के MSME क्षेत्र को क्या चुनौतियाँ हैं?
कैट के अनुसार, पिछले 15 वर्षों में सिंडिकेट कल्चर, नीतिगत अस्थिरता और प्रशासनिक दबाव के कारण हजारों MSME इकाइयाँ या तो बंद हो गईं या अन्य राज्यों में चली गईं। बढ़ती लागत और विनियम संबंधी जटिलताओं ने पारंपरिक उद्योगों को भी प्रभावित किया है।
छेना मिठाइयों पर GST का क्या असर हुआ है?
कैट के सचिव प्रवीण खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि छेना आधारित मिठाइयों पर लगाए गए GST ने बंगाल के पारंपरिक मिठाई उद्योग पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डाला है, जिससे इस क्षेत्र में कार्यरत लाखों कारीगर और व्यापारी प्रभावित हुए हैं।
कैट के अनुसार बंगाल को फिर से औद्योगिक केंद्र बनाने के लिए क्या जरूरी है?
कैट के कार्यकारी अध्यक्ष सुभाष अग्रवाल के अनुसार, 'वोकल फॉर लोकल', 'मेक इन इंडिया', 'स्टार्टअप इंडिया' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' जैसी पहलों के अनुरूप राज्य स्तरीय नीतियाँ अपनाना जरूरी है। साथ ही औद्योगिक गलियारों और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढाँचे में निवेश भी आवश्यक बताया गया है।
कैट क्या है और इसका बंगाल से क्या संबंध है?
अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) देश का एक प्रमुख व्यापारी संगठन है। कैट के कार्यकारी अध्यक्ष सुभाष अग्रवाल स्वयं पश्चिम बंगाल के उद्योगपति हैं और संगठन ने राज्य के व्यापारिक समुदाय की चिंताओं को केंद्र में रखकर यह बयान जारी किया है।
राष्ट्र प्रेस
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