क्या नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा खत्म हो गई? बिहार में होगा भाजपा का मुख्यमंत्री: हुसैन दलवई
सारांश
Key Takeaways
- नीतीश कुमार की राजनीति पर सवाल उठ रहे हैं।
- निशांत कुमार को केवल डिप्टी सीएम बनने की संभावना है।
- भाजपा का मुख्यमंत्री बनने की संभावना बढ़ी है।
- ओम बिरला के पक्षपाती रवैये पर सवाल उठाए गए हैं।
- चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर चिंता जताई गई है।
मुंबई, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार ने जदयू कार्यालय में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के समक्ष पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने कहा कि इससे यह स्पष्ट हो गया है कि बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनेगा।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में हुसैन दलवई ने कहा कि निशांत कुमार की कोई विशेष हैसियत नहीं रहेगी और वे केवल डिप्टी सीएम बनकर रह जाएंगे। यहाँ भी दो डिप्टी सीएम हैं, लेकिन सारा काम मुख्यमंत्री ही संभालते हैं। मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम के पद में बहुत अंतर होता है। डिप्टी सीएम एक मंत्री की तरह होता है, जिसे कोई खास कानूनी या संवैधानिक अधिकार नहीं मिलते। मुख्यमंत्री के अधिकार डिप्टी सीएम को नहीं मिलते। ऐसे में एक तरह से नीतीश कुमार की राजनीति समाप्त हो जाएगी।
भाजपा द्वारा पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अपमान करने के आरोप पर हुसैन दलवई ने कहा कि राष्ट्रपति का पद ऐसा है, जिसे प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए। प्रोटोकॉल का उल्लंघन करना गलत है, लेकिन इस घटना के पीछे क्या कारण हैं, यह जानना आवश्यक है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हुसैन दलवई ने कहा कि स्पीकर को हमेशा तटस्थ रहना चाहिए। किसी एक पार्टी का समर्थन करना गलत है। ओम बिरला हमेशा वही करते रहे हैं जो भाजपा चाहती है, इसलिए यह प्रस्ताव लाया गया है। अगर नीतीश कुमार या नायडू साहब के लोग तटस्थ रहेंगे तो यह प्रस्ताव पारित हो जाएगा।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा 'द केरल स्टोरी 2' और सिनेमा इंडस्ट्री पर की गई टिप्पणी पर हुसैन दलवई ने कहा कि राहुल गांधी का कहना सही है। भाजपा के शासन में कुछ निर्माता ऐसी फिल्में बना रहे हैं, जो समाज में दरार पैदा कर रही हैं। यह गलत है। पहले की फिल्में, जैसे 'मदर इंडिया' और 'बंधिनी,' समाज में एकता लाने का प्रयास करती थीं। अब गलत तरीके से फिल्में बनाई जा रही हैं।
एसआईआर के मुद्दे पर हुसैन दलवई ने कहा कि बड़े पैमाने पर लोगों को मतदान का अधिकार नहीं मिलने की कोशिश की गई है। कई लोगों के नाम हटाए गए हैं। यह संविधान के खिलाफ है और लोकतंत्र को खतरे में डालता है। नया चुनाव आयुक्त सरकार के इशारे पर चल रहा है। यह गलत है। चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है, पर अब वह स्वतंत्र नहीं रह गया है।