WHO की पहली ग्लोबल गाइडलाइन: बच्चों में मोटापे की दर 1990 के बाद से चार गुना, 17 करोड़ प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 8 अक्टूबर 2026 को बच्चों और किशोरों में बढ़ते मोटापे की रोकथाम एवं उपचार के लिए अपनी पहली वैश्विक गाइडलाइन जारी की है। संगठन के आँकड़ों के अनुसार, 2024 में दुनियाभर में 5 से 19 वर्ष की आयु के लगभग 17 करोड़ बच्चे और किशोर मोटापे से पीड़ित थे — और यह संख्या 1990 के बाद से चार गुना बढ़ चुकी है। यह गाइडलाइन ऐसे समय में आई है जब बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी और खान-पान की बिगड़ती आदतें बचपन के मोटापे को वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट में बदल रही हैं।
चौंकाने वाले आँकड़े
WHO के अनुसार, 2024 में मोटापे से ग्रस्त 17 करोड़ बच्चों और किशोरों में 5 से 9 वर्ष की आयु के करीब 7 करोड़ बच्चे और 10 से 19 वर्ष के लगभग 10 करोड़ किशोर शामिल हैं। 1990 में इस आयु वर्ग में मोटापे की दर मात्र 2 प्रतिशत थी, जो 2024 में बढ़कर 8 प्रतिशत हो गई है। गौरतलब है कि यह वृद्धि महज तीन दशकों में हुई है, जो इस समस्या की गंभीरता को रेखांकित करती है।
मोटापे के दीर्घकालिक स्वास्थ्य खतरे
WHO का स्पष्ट कहना है कि मोटापा एक दीर्घकालिक और पुनरावर्ती बीमारी है — इसका प्रभाव सिर्फ बच्चे के वजन तक सीमित नहीं रहता। बचपन में मोटापे से टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और अन्य गैर-संचारी रोगों का जोखिम वयस्क होने पर काफी बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त, मोटापे से जूझ रहे बच्चों को स्कूल और समाज में बुलिंग, भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ सकता है, जो उनके आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालता है।
गाइडलाइन में क्या है खास
नई गाइडलाइन में WHO ने यह स्पष्ट किया है कि बच्चों के उपचार में केवल वजन घटाने पर ध्यान केंद्रित करना पर्याप्त नहीं है। इसके बजाय, संगठन ने संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव पर आधारित समग्र दृष्टिकोण अपनाने की सिफारिश की है। गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि 0 से 9 वर्ष के बच्चों के उपचार में दवाओं, बैरियाट्रिक सर्जरी और वजन घटाने वाले उपकरणों की सिफारिश नहीं की गई है।
किशोरों के लिए अलग दिशा-निर्देश
10 से 19 वर्ष के किशोरों के मामले में WHO के अनुसार दवाओं पर केवल तभी विचार किया जा सकता है, जब विशेषज्ञों की निगरानी में संचालित लाइफस्टाइल कार्यक्रम अपेक्षित परिणाम न दे सके। यह दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि चिकित्सा हस्तक्षेप अंतिम विकल्प बने, न कि पहला।
मानसिक स्वास्थ्य पर ज़ोर
गाइडलाइन में मानसिक स्वास्थ्य को भी उतनी ही प्राथमिकता दी गई है जितनी शारीरिक स्वास्थ्य को। WHO के अनुसार, चिंता, अवसाद, कम आत्मसम्मान और भावनात्मक कठिनाइयाँ बच्चों की खान-पान और जीवनशैली की आदतों को गहरे स्तर पर प्रभावित करती हैं। इसलिए मोटापे के उपचार के साथ-साथ बच्चे के मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर भी समय रहते ध्यान देना अनिवार्य है। यह गाइडलाइन वैश्विक स्वास्थ्य नीतियों और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों को नया आकार देने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है।