भारत में बढ़ता वैश्विक निवेश और सहयोग, PM मोदी बोले — '140 करोड़ भारतीयों की ताकत से दुनिया जुड़ रही है'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 19 जून को कहा कि दुनिया आज भारत को उम्मीद और उत्साह की नज़रों से देख रही है, और यह बढ़ता वैश्विक भरोसा अंतरराष्ट्रीय निवेश तथा सहयोग के रूप में ठोस रूप ले रहा है। उन्होंने यह विचार एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर माईगव इंडिया की एक पोस्ट साझा करते हुए व्यक्त किए।
मोदी का बयान: 140 करोड़ भारतीयों की शक्ति
मोदी ने अपनी पोस्ट में कहा, "भारत बेहतर दुनिया के निर्माण में जो भी संभव होगा, उसे करने के लिए हमेशा तैयार है। साथ ही भारत के 140 करोड़ लोगों की बदौलत दुनिया भारत को उम्मीद और उत्साह के साथ देख रही है। यही कारण है कि दुनिया भारत के साथ जुड़ रही है और भारत में निवेश कर रही है।"
उन्होंने जोर दिया कि देश के प्रति वैश्विक आकर्षण का मूल कारण 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयास और आकांक्षाएँ हैं — न कि कोई एकल नीतिगत कदम।
माईगव इंडिया की पोस्ट: 2014 के बाद का बदलाव
माईगव इंडिया ने 'India's Global Momentum: A Shift the World Can't Ignore' शीर्षक से एक विस्तृत पोस्ट प्रकाशित की, जिसमें पिछले 12 वर्षों में वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया गया। पोस्ट के अनुसार, 2014 के बाद से भारत केवल एक भागीदार देश नहीं रहा — अब वह वैश्विक चर्चाओं को दिशा देने वाला देश बन चुका है।
पोस्ट में कहा गया, "देश अब वैश्विक चर्चाओं को दिशा देने, साझेदारियों को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं में अधिक दृश्यता, विश्वसनीयता और भरोसे के साथ योगदान देने की भूमिका निभा रहा है।"
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
माईगव इंडिया के अनुसार, भारत अब रणनीतिक साझेदारियाँ मजबूत करने, आर्थिक कूटनीति को नई दिशा देने और अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं में सक्रिय योगदान देने की स्थिति में है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत G20 की अध्यक्षता के बाद से वैश्विक शासन में अपनी पहचान को और पुख्ता कर रहा है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अमेरिका, यूरोपीय संघ, खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ अपने आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को नए सिरे से परिभाषित किया है।
आगे क्या
प्रधानमंत्री मोदी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में उभर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह वैश्विक स्वीकार्यता आने वाले वर्षों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के प्रवाह को और गति दे सकती है।