योगी को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती, सपा का दावा — जमानत जब्त होगी
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता रविदास मेहरोत्रा ने 8 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सीधी चुनौती दी — कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में अयोध्या से मैदान में उतरें। मेहरोत्रा का दावा है कि यदि मुख्यमंत्री अयोध्या से चुनाव लड़ते हैं, तो उनकी जमानत जब्त हो जाएगी।
सपा नेता का मुख्य आरोप
मेहरोत्रा ने कहा कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री को यह चुनौती इसलिए दी ताकि उन्हें स्पष्ट हो सके कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रति जनता में कितना रोष है। उनके अनुसार, 'अगर मुख्यमंत्री अयोध्या से चुनाव लड़ते हैं, तो उनकी जमानत जब्त हो जाएगी।' सपा नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि यह बयान जनभावना को दर्शाता है, न कि महज राजनीतिक बयानबाजी।
अखिलेश यादव की अयोध्या यात्रा का संदर्भ
गुरुवार, 8 अक्टूबर को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव अयोध्या में एक भागवत कथा में शामिल हुए, जहाँ आयोजकों के अनुरोध पर उन्होंने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। यहीं से उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री चुनावी परिणाम को लेकर आश्वस्त हैं, तो अयोध्या से चुनाव लड़ने में क्या संकोच है। इस पर भाजपा नेताओं ने आपत्ति जताई। मेहरोत्रा ने जवाब दिया कि सपा सभी धर्मों का सम्मान करती है और अखिलेश यादव की भागवत कथा में भागीदारी धार्मिक सद्भाव का प्रतीक है।
भाजपा पर भ्रष्टाचार और विकास का आरोप
सपा नेता ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी 'राम के नाम पर वोट माँगती है और फिर चंदा चोरी कर लेती है।' उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आरोप लगाया कि वे जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने के लिए भ्रामक बयान देते रहते हैं। मेहरोत्रा के अनुसार, राज्य में महंगाई, बेरोज़गारी और अपराध बढ़ रहे हैं, विकास कार्य ठप हैं, स्वास्थ्य सेवाएँ चरमरा गई हैं और स्कूल बंद हो रहे हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग
सपा नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर भी बात की। उन्होंने बताया कि अखिलेश यादव के निर्देश पर गुरुवार को लखनऊ सहित पूरे उत्तर प्रदेश में सपा नेताओं और पदाधिकारियों ने विरोध-प्रदर्शन किया। पार्टी की माँग है कि सीईसी तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें।
राजनीतिक असर और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की चर्चाएँ ज़ोर पकड़ रही हैं और अयोध्या एक बड़ा प्रतीकात्मक राजनीतिक केंद्र बन चुकी है। सपा की ओर से इस चुनौती को बीजेपी के विरुद्ध जन-असंतोष को रेखांकित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। अब यह देखना होगा कि भाजपा और मुख्यमंत्री कार्यालय इस चुनौती पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हैं या नहीं।